छत्रपति से पहले फतेहाबाद का पत्रकार बना था डेरा अनुयायियों के गुस्से का निशाना
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम व उनके तीन साथियों को पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया है। लेकिन रामचंद्र छत्रपति से पहले फतेहाबाद का भी एक पत्रकार डेरा सच्चा सौदा अनुयायियों के गुस्से का शिकार होकर अपनी जान गंवाते-गंवाते बचा था। रामचंद्र छत्रपति को अक्तूबर 2002 में गोलियां मारी गई थी जबकि जून 2002 में ही डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ लिखने से गुस्साए डेरा अनुयायियों की भीड़ ने फतेहाबाद के पत्रकार आरके सेठी व मदन बंसल के कार्यालय को तहस-नहस कर दिया था।। दफ्तर को तहस-नहस करने के बाद भीड़ ने आरके सेठी के जवाहर चौक स्थित निवास पर भी हमला किया था और घर को जलाने का प्रयास किया था। लेकिन किसी तरह से सेठी व उनके परिवार ने भीड़ से बचकर जान बचाई थी।
बाद में इस मामले की जांच जब सीबीआई को सौंपी गई तो सीबीआई ने ऐसे सारे मामलों को इकट्ठा करके अपनी जांच शुरू की और आरके सेठी के भी बयान दर्ज किए। इसके बाद बतौर सीबीआई गवाह आरके सेठी ने कई बार सिरसा, अंबाला व पंचकूला की कोर्ट में राम रहीम के खिलाफ गवाही भी दी। शुक्रवार को रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम व उनके साथियों को दोषी ठहराए जाने के बाद आरके सेठी ने संतोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि आखिरकार 16 साल के लंबे अर्से के बाद ही सही, लेकिन कोर्ट ने इस मामले में इंसाफ किया है। सेठी ने कहा कि इस फैसले के बाद न्यायपालिका में लोगों का विश्वास और पुख्ता होगा कि आरोपी चाहे कितना भी ताकतवर क्यों ना हो, अगर उसके खिलाफ मजबूती से खड़ा हो जाएं तो न्यायपालिका आपको जरूर इंसाफ देगी।