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रक्तदान : करके देखिए, अच्छा लगता है...

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद/टोहाना।
रक्तदान करके मनुष्य का जीवन बचाया जा सकता है। मनुष्य का रक्त नालियों में बहने की बजाय नाड़ियों में बहना चाहिए। इसी बात को सार्थक किए हुए हैं जिले के कई ऐसे रक्तदाता जिन्हें अब ब्लड मशीन की संज्ञा दी जाने लगी है। जिले के ये रक्तदाता रक्तदान को ही इंसानियत की सच्ची सेवा मानते चले आ रहे हैं और लगातार किसी ना किसी मौके पर रक्तदान करना नहीं भूलते। कई शख्सियतें तो ऐसी हैं कि जो इतनी बार रक्तदान कर चुके हैं कि अब गिनती ही भूल गए हैं। रक्तदान करने की जगह भले ही अलग-अलग हैं, लेकिन सबके रक्तदान करने का उद्देश्य सिर्फ एक ही है, मानव जीवन की रक्षा।

रक्तदान सच्ची मानवता की सेवा है क्योंकि रक्त को दान तो किया जा सकता है, लेकिन इसे बनाया नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि अपने पूजनीय पिता जी से प्रेरणा लेकर मैंने रक्तदान करना शुरू किया है। उनका प्रयास रहता है कि वो वर्ष में एक बार उनकी पुन्नी इंडस्ट्री में रक्तदान लगाकर कर्मचारियों से रक्तदान करवाएं, ताकि जरूरतमंद की मदद की जा सके। अब तक 20 बार रक्तदान कर चुका हूं।
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दीप सिंह पुन्नी, समाजसेवी।

रक्तदान करने से मनुष्य के शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती है। रक्तदान कर मनुष्य के शरीर मे नई ऊर्जा का संचार होता है तथा एक स्वस्थ्य व्यक्ति हर तीसरे महीने रक्तदान कर सकता है। अब तक 44 बार रक्तदान कर चुका हूं, लेकिन कभी कमजोरी महसूस नहीं हुई। इसीलिए रक्तदान के इस सिलसिले को जीवन भर आगे बढ़ाना चाहता हूं। बाकियों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करने का काम करता हूं। ’
मनोज नारंग, समाजसेवी एवं पार्षद प्रतिनिधि।


रक्तदान ही एक ऐसी सेवा है जिसे करने के बाद अंर्तमन से खुशी महसूस होती है। मैं रक्तदान करने के बाद अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं कि मैने मानवता की सेवा में अपना योगदान दिया है। अब तक अलग-अलग जगहों पर 86 बार रक्तदान कर चुका हूं।
रोहित मेहता, समाजसेवी व रक्तदाता।

मेरी खुद की बेटी थैलेसीमिया से पीड़ित थी, जिसे हर माह रक्त की जरूरत पड़ती थी। पता किया तो जानकारी मिली कि टोहाना में लगभग 30 बच्चे ऐसे हैं जिन्हें हर माह रक्त की जरूरत होती है। इसलिए आईएबीटीई के नाम से रक्तदान करने वाली संस्था का गठन किया। मैं खुद 20 बार रक्तदान कर चुका हूं।
लक्की बतरा, समाजसेवी व रक्तदाता।

मैं खुद अध्यापक हूं। रक्तदान के लिए हमेशा से तैयार रहा हूं। कोशिश करता हूं कि प्रत्येक तीन माह में रक्तदान अवश्य करता हूं। साथियों के साथ मिलकर और लोगों को भी इस नेक काम के लिए प्रोत्साहित करने का जिम्मा उठाया हुआ है ताकि रक्तदान के साथ किसी को जीवनदान दिया जा सके।’
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चरणजीत सिंह, समाजसेवी व रक्तदाता।

रक्तदान को लेकर भ्रांतियां
रक्तदान को लेकर अक्सर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां होती हैं। जिनके कारण आम आदमी रक्तदान करने से बचता है जबकि चिकित्सकों के अनुसार रक्तदान करना सेहत के लिए अच्छा रहता है। आइए, जानते हैं इन भ्रांतियों के बारे में
1. रक्तदान करने से रक्त कम हो जाता है। ऐसा नहीं होता, प्रत्येक तीन माह में शरीर खुद उतना रक्त पैदा कर लेता है।
2. रक्तदान करने से कमजोरी आती है। ऐसा भी नहीं होता, रक्तदान से कमजोरी बिल्कुल भी नहीं आती है।
3. रक्तदान करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसा भी नहीं होता, बल्कि नया रक्त बनने के कारण प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सकती है।

इन स्थितियों में रक्तदान से करना चाहिए परहेज
1. शराब या अन्य नशे के सेवन के बाद रक्तदान करने से परहेज करना चाहिए।
2. नाबालिगों को रक्तदान से परहेज करना चाहिए ।
3. गंभीर बीमारी की स्थिति में रक्तदान करने से बचना चाहिए।

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रक्त बहे नाड़ियों में, न कि नालियों में’ की मुहिम को सार्थक कर रहे जिले के कई रक्तदाता



13एफटीबीपी33 : दीप सिंह पुन्नी ।
32 : मनोज नारंग, पार्षद प्रतिनिधि
31 : चरणजीत सिंह, समाजसेवी ।
30: रोहित मेहता ।
29 : लक्की बतरा ।
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