फतेहाबाद। जिले में लगातार हो रही भारी बारिश से वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों पर संकट गहरा गया है। खासतौर पर गांव रामसरा, दैयड़ और खाराखेड़ी में लगभग 5 हजार सफेदे के पौधे पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। यदि जलभराव जल्द नहीं हटा तो पौधे पूरी तरह नष्ट हो सकते हैं।
वन विभाग ने वर्ष 2025 में अब तक जिले में 10 लाख पौधों का रोपण कार्य पूरा किया है। इनमें से करीब 3 लाख पौधे नहरों और सड़कों के किनारे लगाए गए हैं। लगातार चार दिनों से हो रही बारिश के चलते कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जिससे पौधों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
वन विभाग की जमीन भी प्रभावित
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, बारिश के कारण सड़कों पर कटाव और जलभराव से न सिर्फ लगाए गए पौधों, बल्कि वन विभाग की अपनी भूमि पर भी नुकसान की संभावना है। हालांकि, टीमें मौके पर भेजी गई हैं, लेकिन लगातार बारिश के चलते वास्तविक नुकसान का आकलन नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव की उचित निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण खेतों और खाली जमीनों में पानी भर गया है। जिससे न केवल वन विभाग के पौधे, बल्कि कृषि भूमि भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जलनिकासी के पुख्ता इंतजाम की मांग की है।
पर्यावरणविदों की चेतावनी
पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा है कि सिर्फ पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, देखभाल और जलनिकासी जैसी व्यवस्थाएं भी समान रूप से जरूरी हैं। यदि यह सिलसिला यूं ही चलता रहा, तो पौधारोपण अभियान का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
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जिले में अधिक बारिश होने और कई दिनों तक जलभराव रहने की स्थिति में पौधों के नष्ट होने की संभावना है। अभी तक नुकसान का स्पष्ट आकलन नहीं हो पाया है, लेकिन अगर जलभराव जल्द नहीं हटा, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। - राजेश लीलड़, जिला वन अधिकारी, फतेहाबाद।