रतिया में एक गाय की टांग और पूंछ काटी, दूसरे की पीठ पर चोटें
अमर उजाला ब्यूरो
रतिया। शहर के वार्ड नंबर पांच में अज्ञात लोगों द्वारा दो गायों की टांग व पूंछ काटने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले की सूचना मिलते ही बजरंग दल के जिला संयोजक विकास अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचे और जख्मी गायों को उपचार के लिए भिजवाया। अज्ञात बदमाशों ने एक गाय की टांग और पूंछ काट दी गई है। जबकि दूसरे गाय की पीठ पर चोटों के निशान हैं। गायों पर हमले के मामले के सामने आने के बाद बजरंग दल की रतिया शाखा ने इसके खिलाफ रतिया पुलिस को लिखित शिकायत सौंपकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है।
इस बारे में बात करने पर बजरंग दल के जिला संयोजक विकास ग्रोवर ने बताया कि उनके पास किसी परिचित का फोन आया कि वार्ड नंबर पांच में किसी ने गाय पर हमला कर उसकी टांग काट दी है। ग्रोवर के अनुसार जब वो मौके पर अपने साथियों मोहन, रोहित आदि के साथ पहुंचे तो देखा कि किसी ने बड़ी निर्दयता से एक गाय की टांग व पूंछ काट दी है और जिसके कारण गाय बुरी तरह तड़प रही है। इसके अलावा वही बैठी दूसरी गाय की पीठ पर भी चोटों के निशान मिलने से इस बात की आशंका बढ़ गई है कि हमला जानबूझकर और गायों को निशाना बनाकर ही किया जा रहा है। विकास ने बताया कि उन्होंने तुरंत पशु एंबुलेंस बुलवाकर दोनों गायों को उपचार के लिए गौशाला भेज दिया जहां उनका उपचार किया जा रहा है।
बजरंग दल के जिला संयोजक विकास ग्रोवर ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही गायों पर हमला करने वाले आरोपियों को काबू नहीं किया गया तो बजरंग दल के कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे और आंदोलन छेड़ा जाएगा। दूसरी ओर रतिया शहरी चौकी इंचार्ज ओमप्रकाश ने गायों पर हमले की शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले में गाय की चिकित्सकीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आसपास के लोगों से भी जानकारी हासिल की जा रही है और साथ शहर में गश्त भी तेज कर दी गई है।
स्ट्रै कैटल फ्री जिले के दावों पर लग रहे सवालिया निशान
गायों पर हमले का मामला सामने आने के बाद प्रशासन के स्ट्रै कैटल फ्री जिले के दावों पर भी सवालिया निशान उठने शुरु हो गए हैं। आए दिन सड़कों पर घूमते आवारा पशु प्रशासन के दावों की पोल खोलते हैं। अगर सोमवार देर रात से पहले भी नगर पालिका के कर्मचारियों ने शहर की सड़कों और गलियों में घूमते गोवंश को गौशाला या नंदीशाला पहुंचा दिया होता तो शायद दो गायों की जान भी आफत में ना पड़ती।