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हैडिंग...मजबूरी : कहीं शौचालय के गेट पर बनता नौनिहालों का निवाला, कहीं ठिठुरती ठंड में खाने को मजबूर नौनिहाल

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अमित रूखाया
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फतेहाबाद।
एक ओर सरकार मिड-डे मील में फ्लेवर्ड दूध देने की तैयारी में जुटी है तो दूसरी ओर फतेहाबाद शहर के दो प्राइमरी स्कूलों में नौनिहालों का निवाला शौचालय के गेट पर पक और बंट रहा है। इतना ही नहीं, जिले के कई अन्य ऐसे प्राइमरी स्कूल हैं जिनमें मिड-डे मील बनाने के लिए स्कूल प्रबंधन को मजबूरन नियमों की अनदेखी करनी पड़ रही है। इसको लेकर संबंधित स्कूल प्रबंधन और पंचायतें शिक्षा मंत्री से लेकर स्थानीय शिक्षा विभाग के कर्मचारियों तक के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन बेहतर और स्वस्थ भविष्य के नारों से सजी सरकार के न तो मंत्री और न ही अधिकारी-कर्मचारी प्राइमरी स्कूलों की दुर्दशा के प्रति गंभीर हैं। अगर ऐसा ना होता तो नौनिहालों के हिस्से का निवाला यूं शौचालय के गेट पर तैयार ना किया जा रहा होता।
केस एक
स्वामी नगर प्राइमरी स्कूल के दो कमरों में साढ़े तीन सौ बच्चे, मजबूरी में शौचालय के गेट पर मिड-डे मील
शहर की सीमा के साथ लगते स्वामी नगर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय की जर्जर इमारत के दो कमरों में तकरीबन साढ़े तीन बच्चे पढ़ते हैं। मिड-डे मील खाने के समय स्कूल के बरामदे में बैठी दो क क्षाओं के विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई बंद करनी पड़ती है। दो कमरे ही हैं तो एक कक्षा के आखिर में अलमारियों की दीवार बनाकर हैडमास्टर का दफ्तर बनाया गया है। जगह की कमी के कारण स्कूल के शौचालय के गेट पर ही मिड-डे मील का खाना बनता है और बंटता भी यही है। ये दरअसल उन गगनभेदी दावों की खोखली सच्चाई है जिसमें अंतोदय की बात की जाती है। यहां के हैडमास्टर सुभाष कुमार और उनकी टीम सालों से इस स्कूल के स्थानांतरण के लिए शिक्षामंत्री, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष, स्थानीय अधिकारियों तक को पंचायत की ओर से मांगपत्र दे चुके हैं लेकिन स्थिति आज तक वही ढाक के तीन पात वाली ही है।
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ये है बदतर हालात की वजह
स्वामी नगर प्राइमरी स्कूल की नई बिल्डिंग के लिए दो एकड़ जगह नंदीशाला के लिए निर्धारित की गई है। अलाट हो चुकी है लेकिन तीन बार प्रस्ताव भेजने के बावजूद अभी तक स्कूल की नई बिल्डिंग बनाने के लिए ग्रांट नहीं आई है। ग्रांट अगर आ जाये तो नंदीशाला के पास दो एकड़ की जगह में लगभग दस कमरों वाली स्कूल की नई इमारत बनकर तैयार हो जाएगी और बच्चों को शौचालय के पास बने मिड-डे मील को नहीं खाना पड़ेगा।
केस दो
शहर की सबसे पॉश कालोनी में से एक एमसी कालोनी में स्थित ठाकर बस्ती प्राइमरी स्कूल। महज 8 मरले की जगह में 180 छोटे बच्चे पढ़ते हैं। अब चार कमरों का स्कूल है तो मिड-डे मील कैसे और कहां बनाया जाए, कैसे खिलाया जाये। 8 मरले की जगह में ऐसा करना संभव नहीं था तो आसपास के लोगों और स्कूल स्टाफ ने आपस में सहयोग करके स्कूल की छत पर एक शैड बनाया है। अब 180 बच्चे इसी शैड शके नीचे मिड-डे मील खाते हैं और यही बनता भी है। गमियों के दिनों में सूरज की तेज धूप जहां यहां बैठने वाले बच्चों को पसीने से तरबतर कर देती है तो सर्दियों में ठिठुरने वाली ठंड नौनिहालों को कई बिमारियों की ओर धकेल देती है।
जगह की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाइये कि एक छोटे से स्टोर में हैडमास्टर का दफ्तर है और स्कूल के कमरों में विद्यार्थियों के पीछे ही गेहूं के ड्रम रखने पड़ते हैं। यहां के हैडमास्टर राजेश ने भी स्कूल के स्थानांतरण के लिए लंबे समय से प्रयास किये लेकिन फाइलें मानों जहां हैं, वहीं जाम होकर रह गई हैं। अब हालात ये है कि राजेश और उनके साथ पौने दो सौ बच्चों ने भी जैसे नियति से समझौता कर लिया है।
ये है बदतर हालात की वजह
स्कूल प्रशासन की मानें तो ठाकर बस्ती प्राइमरी स्कूल के लिए पुरानी कचहरी की जगह पर एक एकड़ जगह अलॉट हो चुकी है लेकिन बिल्डिंग बनाने की ग्रांट पिछले तीन साल से अटकी हुई है। अगर समय रहते ग्रांट आ गई होती तो अब तक विद्यार्थी नये स्कूल में शिफ्ट हो चुके होते लेकिन अफसरी लापरवाही के चलते नये स्कूल की ग्रांट ही नहीं आई। ऐसे में मजबूरन बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह ही कक्षाओं में रहना और मिड-डे खाना पड़ रहा है।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संगठन भी आया स्कूलों के समर्थन में, बोले, जल्द जारी हो ग्रांट
इस बारे में बात करने पर राजकीय प्राथमिक शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष विकास टुटेजा भी ठाकर बस्ती स्कूल और स्वामी नगर स्कूल प्रबंधन के पक्ष में आ खड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से इन स्कूलों की नई बिल्डिंग के लिए ग्रांट देने में देरी की जा रही है जबकि इन स्कूलों के अध्यापक और इंचार्ज लगातार मेहनत कर व्यवस्था बनाने की कोशिशें कर रहे हैं लेकिन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। विकास टुटेजा ने इस संदर्भ में जल्द ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मुलाकात करने की बात भी कही।
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स्कूलों में मिड-डे मील की मजबूरी देख डीसी भी हुए हैरान, बोले, जल्द दुरुस्त होगी व्यवस्था
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी संगीता बिश्रोई द्वारा फोन ना उठाने के बाद जब इस संदर्भ में उपायुक्त हरदीप सिंह के संज्ञान में जब ये मामला लाया गया तो एक बारगी तो वे भी शौचालय के पास मिड-डे मील बनते देखकर हैरान हुए। इसके बाद उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद इस मसले को जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को बताया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि इस संदर्भ में जल्द से जल्द उचित व्यवस्था की जाए। नई बिल्डिंग के लिए ग्रांट के लिए भी शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वो रिकॉर्ड लेकर संबंधित उच्च अधिकारियों से बात करें और ग्रांट जल्द से जल्द मुहैया करवाई जाए।
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