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कपास में सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन ने प्रबंध नीति तैयार की

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कपास में सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन ने तैयार की प्रबंध नीति
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
कपास की फसल में सफेद मक्खी से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने प्रबंध नीति तैयार की गई है, जिससे सफेद मक्खी से समय पर फसल को बचाया जा सके। इस संबंध में कृषि अधिकारियों के साथ एक बैठक में उपायुक्त डॉ. जेके आभीर ने निर्देश दिए कि सफेद मक्खी के प्रकोप से बचाव के लिए किसानों को व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए । इस अभियान के तहत सीआईसीआर सिरसा और कृषि विश्व विद्यालय द्वारा अनुमोदित स्प्रे शेड्यूल के बारे में प्रचार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त सफेद मक्खी प्रबंधन को लेकर किसानों को पर्चे भी वितरित किए जाएंगे।
बैठक के दौरान कृषि उप निदेशक डॉ. बलवंत सहारण ने बताया कि खरीफ 2017 सीजन में जिला फतेहाबाद की 74875 हेक्टेयर भूमि पर कपास की बिजाई की गई है। इसमें से लगभग 700 हेक्टेयर फसल पर सफेद मक्खी का असर हुआ है। इसलिए सीमित क्षेत्र में ही इस बीमारी को रोकने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने व्यापक प्रबंध कर लिए है। उन्होंने बताया कि सभी किसान भाई विभाग या अन्य सरकारी संस्थान द्वारा सिफारिश की गई दवाओं को ही खरीदे और इन दवाओं को खरीदते वक्त विक्रेता से बिल जरूरी लें। कृषि उप निदेशक ने कहा कि कपास की फसल में अपने आप से बदल-बदल कर दवाईयों का छिड़काव करना नुकसान देह हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसान कपास की फसल पर प्रति एकड़ एक लीटर नीम के तेल को 200 लीटर पानी में मिलाकर इसका छिड़काव करे तो सफेद मक्खी के प्रकोप को समाप्त किया जा सकता है। इसके अलावा 2 किलोग्राम यूरिया में आधा किलोग्राम जिंक (21 प्रतिशत) के साथ इसे 200 लीटर पानी में मिलाकर भी इस बीमारी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। कृषि उप निदेशक ने कहा कि जिला में अभी हालात नियंत्रण में है। जिसके लिए सफेद मक्खी से फसल को बचाने के लिए समय पर सर्वे किया जा रहा है। इसकी समय-समय पर रिपोर्ट तैयार होगी। जिसके अनुसार अगर कहीं पर सफेद मक्खी का प्रकोप शुरू हुआ है। उस पर निपटने के लिए कार्य किया जाएगा।
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क्या है सफेद मक्खी
सफेद मक्खी छोटा सा तेज उड़ने वाला पीले शरीर और सफेद पंख का कीड़ा है। छोटा एवं हल्के होने के कारण ये कीट हवा द्वारा एक दूसरे से स्थान तक आसानी से चले जाते हैं। इसके अंडाकार शिशु पतों की निचली सतह पर चिपके रहकर रस चूसते रहते हैं। भूरे रंग के शिशु अवस्था पूरी होने के बाद वहीं पर यह प्यूपा में बदल जाते हैं। ग्रसित पौधे पीले व तैलीय दिखाई देते हैं। जिन काली फंफूदी लग जाती है। यह कीड़े न केवल रस चूसकर फसल को नुकसान करते हैं।
02 कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की आयोजित बैठक में अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश देते उपायुक्त डॉ. जेके आभीर।
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