ग्वार में उखेड़ा रोग लाईलाज नहीं, उपचार संभव : डॉ. सैनी
ग्वार रोग रोकथाम के लिए शिविरों का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। रेतीले इलाकों में ग्वार फसल का उखेड़ा रोग एक गंभीर समस्या है लेकिन लाईलाज नहीं। जानकारी के अभाव में किसान इसके लिए उपाय नहीं अपना पाते। यह बात चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं पूर्व अध्यक्ष कीट विभाग डॉ. आरके सैनी ने गांव खाराखेड़ी व चिंदड़ में जागरुकता शिविर में कही।
उन्होंने कहा कि उखेड़ा रोग के जीवाणु जमीन के अंदर रहते हैं जो बीज के उगते ही पौधों की जड़ों पर आक्रमण कर देते हैं जिसके कारण जड़ें काली होकर सूखने लगती है और पौधा मर जाता है। उन्होंने बताया कि यह भूमि जनित रोग है अत: इसकी रोकथाम का सरल व सस्ता उपाय कार्बन्डाजिम से बीज का उपचार कर बिजाई करना है। प्रति एकड़ मात्र 20 किलो बीज को 15 ग्राम दवाई से उपचार कर बिजाई करने से इस रोग की सफल रोकथाम हो जाती है। डॉ. सैनी ने बताया कि उखेड़ा रोग के अलावा ग्वार का झुलसा रोग भी फसल को भारी नुक्सान पहुंचाता है जो बारिश के झोंकों से तेजी से फैलता है। इनकी रोकथाम फसल की बिजाई के डेढ़ महीने बाद व रोग के आरंभ होते ही प्रति एकड़ 30 ग्राम स्ट्रैप्टो साइकिल तथा 400 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोईड को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर 15 दिन के अंतराल पर स्प्रे करनी चाहिए। शिविरों में बीजोंपचार की दवाओं के सैंपल, रबड़ के दस्ताने तथा ग्वार पर पठन सामग्री मुफ्त में बांटे गए। इस अवसर 150 के लगभग किसानों ने भाग लिया। इस दौरान सरपंच एसोसिएशन प्रधान राजेंद्र कुमार, महाबीर सिंह, रामकुमार, महेंद्र सिंह, पालाराम, भजनलाल, हाकम चंद, ओमप्रकाश, जयप्रकाश, सरपंच प्रधान सिंह, बनवारी, सुनील, ओमप्रकाश, नरसी, अमर सिंह, गंगा सिंह मौजूद थे।
04 फतेहाबाद के गांव खाराखेड़ी में आयोजित ग्वार जागरुकता शिविरों को सम्बोधित करते डा. सैनी