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विजेंद्र कौशिक
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फतेहाबाद। कबीर महाकुंभ में पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन नेताओं को टाइम मैनेजमेंट की सीख दी, जो अक्सर रैली व दूसरे सार्वजनिक कार्यक्रमों में देरी से पहुंचते हैं। खुद राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने मंच से राष्ट्रपति के इस पहल की प्रशंसा की।
राष्ट्रपति को कबीर महाकुंभ में मुख्य अतिथि के तौर पर 10 बजकर 33 मिनट पर फतेहाबाद के भोड़ियाखेड़ा स्थित स्टेडियम में पहुंचना था, जहां उनका हेलीकॉप्टर 10 बजकर 09 मिनट पर उतरा। वहां से 11 मिनट में सड़क मार्ग से सिरसा रोड स्थित नई अनाज मंडी स्थित कबीर महाकुंभ में पहुंच गए, लेकिन राष्ट्रपति के मंच पर पहुंचने का समय आयोजकों ने 11 बजे रखा था। आयोजकों ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे पहले मंच पर आ जाएं, लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया। 40 मिनट मंच के पीछे बैठकर इंतजार किया। पूरे 11 बजे राष्ट्रपति मंच पर आए। उनके साथ राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी, मंत्री कृष्णलाल पंवार भी थे। आयोजकों की तरफ से एमपी से पूर्व सांसद नारायण केसरी, धानक महासभा फतेहाबाद के अध्यक्ष जयभगवान, धर्मेंद्र खटक, सुरेंद्र धानक व जिला परिषद पलवल की चेयरमैन चमेली सोलंकी ने स्वागत किया।
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राज्यपाल बोले, जो गांधी टाइम कहकर राष्ट्रपिता का नाम खराब करते हैं, वे राष्ट्रपति से सीख लें
अपने संबोधन में प्रदेश के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि 26 मिनट पहले आकर भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मंच के पीछे इंतजार करते रहे। टाइम मैनेजमेंट देश की विशेषता है। देरी से आने वालों से जब पूछा जाता है वे अक्सर कहते हैं कि यह तो गांधी समय है। ऐसा कहकर राष्ट्रपिता को बदनाम करते हैं। भारत ने विश्व को टाइम मैनेजमेंट का भी संदेश दिया है।
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एससी/एसटी आयोग के चेयरमैन रामशंकर कठेरिया तबीयत बिगड़ने के चलते नहीं आए
प्रोटोकॉल के तहत विषम संख्या में राष्ट्रपति के साथ कुर्सी लगाई जाती हैं। आयोजकों को राष्ट्रपति भवन की तरफ से नौ कुर्सी लगाने की अनुमति मिली थी। इसमें सबसे बीच में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, एक तरफ राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, दूसरी तरफ मंत्री कृष्णलाल पंवार, जो सीएम मनोहर लाल के प्रतिनिधि के तौर पर आए थे, उनको बैठना था। जबकि मंत्री से आगे पूर्व सांसद नारायण सिंह केसरी, धमेंद्र खटक व पलवल की जिला परिषद चेयरमैन चमेली सोलंकी की कुर्सी लगाई गई। उधर, दूसरी तरफ राज्यपाल के साथ राष्ट्रीय एससी/एसटी आयोग के चेयरमैन रमाशंकर कठेरिया, आयोजक जयभगवान खटक व सुरेंद्र धानक की कुर्सी लगाई गई। राष्ट्रपति के आगमन पर पता चला कि एससी/एसटी आयोग के चेयरमैन रमाशंकर कठेरिया बीमार हो गए हैं। नियमों के तहत राष्ट्रपति की मौजूदगी में कुर्सी खाली नहीं रहनी चाहिए। इसके कारण कुर्सी को हटा दिया गया।
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....जब कमलेश कनेरिया ने तोड़ दिया प्रोटोकॉल
आयोजकों की तरफ से सबसे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को संत शिरोमणि कबीर की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके बाद राज्यपाल व मंत्री को सम्मानित किया गया। इसी बीच एमपी से आई कमलेश कनेरिया मंच पर आई और राष्ट्रपति को चादर भेंट कर सम्मानित किया।
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सांसद राजकुमार सैनी व सुनीता दुग्गल ने भीड़ में बैठकर सुना राष्ट्रपति का भाषण
कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद राजकुमार सैनी भी कार्यक्रम में पहुंचे, लेकिन राष्ट्रपति भवन की तरफ से मंच पर राष्ट्रपति के साथ केवल राज्यपाल के अलावा एससी/एसटी आयोग के चेयरमैन रमाशंकर कठेरिया, मंत्री कृष्णलाल पंवार व आयोजक पूर्व सांसद नारायण केसरी जयभगवान कायत, धमेंद्र खटक व सुरेंद्र धानक को ही बैठने की अनुमति दी गई थी। सांसद राजकुमार सैनी व अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की चेयरपर्सन सुनीता दुग्गल ने भीड़ के बीच बैठकर ही राष्ट्रपति व राज्यपाल का भाषण सुना। इस मौके पर प्रहलाद सिंह सोलंकी, वेद फुलां, इंद्र कुमार निनानियां, बीआर पाटिल, चक्की लाल मास्टर, लक्ष्मण इंदौरिया, डॉ भुक्कल, मुकेश कुमार, जय नारायण खुंडिया, मुकेश सोलंकी, विनोद खनगवाल, जगदीश, भूपेंद्र केसरी, सुधीर, कमलेश, उपायुक्त हरदीप सिंह, पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण भी मौजूद रहे।
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