अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। जिले भर में आज जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। अगर आप कान्हा को खुश करना चाहते हैं तो सांझ ढले घर और मंदिरों में कान्हा जी को केसर की खीर का भोग लगाएं। इसके अलावा उस खीर में तुलसी की पत्ती भी डालें। जन्माष्टमी पर ये योग आपको आर्थिक संपन्नता की ओर लेकर जाएगा। इस बार जन्माष्टमी का पर्व अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का अद्भुत संयोग लेकर आ रहा है। ऐसे में सांझ के समय घर पर तुलसी पर घी का दीपक जलाना भी अत्यंत लाभकारी होगा। तीन सितंबर को अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का अद्भुत संयोग सांय 7 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।
जन्माष्टमी पर्व को लेकर शहर भर के मंदिरों में तैयारियां लगभग अंतिम चरण में हैं। रविवार शाम से अधिकांश मंदिरों को विभिन्न प्रकार की रंग-बिरंगी लाइटों से सजा दिया गया है। मंदिरों की झांकियों को लेकर भी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। दुर्गा मंदिर में हमेशा की तरह इस बार भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके लिए मंदिर प्रांगण के बीचोंबीच एक विशाल स्टेज बनाई गई है जिसमें विभिन्न कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। इस बार भगवान शिव के अघोरी रूप के दर्शन होंगे तो मां काली भी अपना विकराल रूप लेकर प्रकट होंगी। इसके अलावा दुर्गा मंदिर की झांकियों में इस बार कान्हा जी के विभिन्न रूपों के साथ साथ भगवान शिव और पार्वती, श्रीवक्रतुंड, द्वारकाधीश, वेंकेटेश्वर जी, अवध बिहारी, रूणीचा सरकार, शिव-गंगा अवतरण, झूला, जुगल सरकार एवं मां वैष्णो दरबार प्रमुख होंगे।
परेशानियों के निदान के लिए अपनाइए इन उपायों को
1. कुंडली में सर्पदोष या राहू-केतु दोष हो तो जन्माष्टमी पर मोर पंख लेकर आएं और इसे सिर से पांव तक तीन बार झाड़े के रूप में प्रयोग करें।
2. संतान प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी से रोज एक सौ आठ बार ‘ओम श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:’ मंत्र को करना चाहिए।
3. संतान प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी के दिन टॉफी या चाकलेट चढ़ाई जा सकती है।
4. कुंडली में बुध या गुरु कमजोर होने का पता चले तो जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण को तुलसी की माला अर्पित करें
5. बच्चा अगर पढ़ाई में कमजोर है तो मोरपंख से कान्हा जी को पांच बार हवा करें और फिर उस मोरपंख को बच्चे के स्टडी टेबल पर रख दें। किसी विशेष विषय में दिक्कत हो तो मोरपंख को उस किताब में रखवा दें।
6. मां तुलसी पर घी का दीपक जलाएं और शाम में 11 बार तुलसी जी की परिक्रमा करते हुए ऊं वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें।