फतेहाबाद। जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) न होने से मरीजों को परेशानी हो रही है। करीब एक माह से ज्यादा समय से टीका खत्म है लेकिन अब कुछ राहत मिलने के आसार हैं। नागरिक अस्पताल में मंगलवार को 200 डोज पहुंची है। इसे सिरसा से उधार लिया गया है।
सिविल सर्जन कार्यालय ने 3,500 डोज खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है। दूसरी एजेंसी को मंगलवार को 3,500 डोज मंगाने का आदेश दिया गया है। सिविल सर्जन कार्यालय प्रति डोज करीब 26 रुपये महंगे दाम पर खरीद रहा है। पहले वाली एजेंसी प्रति डोज 245 रुपये में आपूर्ति दे रही थी लेकिन अब उसने आपूर्ति से मना कर दिया है। इसका कारण टीके की दर में काफी बढ़ोतरी होना बताया गया है।
वेयर हाउस से आपूर्ति न होने पर सिविल सर्जन कार्यालय स्थानीय विक्रेता से खरीद करता है लेकिन अब वेयर हाउस से भी आपूर्ति नहीं हो रही है और न ही ठेकेदार एजेंसी आपूर्ति दे रही है। इसी वजह से करीब 35 दिनों से अस्पतालों में एआरवी उपलब्ध नहीं है। नागरिक अस्पताल में रोजाना 30 से 35 मरीज यह टीके लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं।
नागरिक अस्पताल में टीका लगवाने पहुंचे मरीजों की माहवार संख्या
वजह अगस्त जुलाई जून मई
कुत्ते का काटना 151 190 205 205
बंदर का काटना 02 04 02 02
संक्रमित गाय, भैंस का दूध पीना 23 08 23 03
चूहे का काटना 00 00 00 01
बिल्ली का काटना 00 02 02 00
बाजार से महंगा टीका खरीदने की मजबूरी
नागरिक अस्पताल में बीपीएल कार्ड धारक, आयुष्मान कार्ड धारक के लिए टीके की डोज निशुल्क देय है लेकिन सामान्य मरीज से 100 रुपये प्रति डोज लिए जाते हैं। इसके बावजूद कई बार नागरिक अस्पताल में टीका न मिलने पर मरीज को बाजार से 400 से 500 रुपये प्रति डोज के हिसाब से खरीदकर लगवाना पड़ता है।
समय पर टीकाकरण न होना बन सकता है मौत का कारण :
विशेषज्ञों के मुताबिक कुत्ते या अन्य किसी जानवर के काटने के बाद रेबीज संक्रमण की आशंका रहती है। रेबीज एक जानलेवा बीमारी है। यदि समय रहते टीकाकरण न हो तो यह मरीज की मौत का कारण भी बन जाता है। टीका लगवाने के तुरंत बाद बीमारी से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। पहली डोज में ही 40 से 50 फीसदी तक एंटीबॉडी बन जाती है। चार डोज लगने के बाद रेबीज का खतरा न के बराबर हो जाता है।
ये हैं रेबीज के लक्षण :
- शरीर में थकावट रहना।
- मांसपेशियों में दर्द होना।
- कान में आवाज सुनाई देना।
- पानी और हवा से डर लगना।
- मन में अजीबोगरीब ख्याल आना, मन विचलित रहना।
एक एजेंसी आई, ठंडे बस्ते में डाला प्रस्ताव :
शहर में कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी और टीकाकरण के लिए नगर परिषद तीन बार निविदा प्रक्रिया शुरू चुका है लेकिन यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। वजह ये है कि नगर परिषद ने करीब 34 शर्तें लगाईं हैं लेकिन एजेंसी इन शर्तों को पूरा नहीं कर पा रही है। बताया जा रहा है कि तीसरी बार लगाई गई निविदा में एक एजेंसी आई है जबकि इसके लिए दो या उससे ज्यादा एजेंसी चाहिए। इस कारण नगर परिषद ने इस प्रक्रिया को रोक दिया है। हालांकि उच्चाधिकारियों से अनुमति लेकर इसे खोला जा सकता है।
एंटी रेबीज वैक्सीन की कमी नहीं रहेगी। 3,500 डोज के आदेश किए जा चुके हैं। एजेंसी इसी हफ्ते करीब 1,500 डोज की आपूर्ति कर देगी। सिरसा से भी कुछ डोज मंगवाई जा चुकी है। - ईश्वर सिंह, वरिष्ठ फार्मेसी अधिकारी, सिविल सर्जन कार्यालय, फतेहाबाद।