संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। नाबालिग बच्ची के साथ यौन अपराध के मामले में फास्ट ट्रैक आरोपी अभिजीत निवासी ढाणी बस्ती भीमा को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सजा के निर्धारण के दौरान अतिरिक्त एवं सत्र न्यायधीश, स्पेशल जज कम फास्ट ट्रैक के न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे अपराध समाज पर गहरा आघात हैं और दोषी पर दया दिखाना न्याय का मजाक होगा।
13 अक्तूबर 2024 को पीड़िता के पिता ने हुडा चौकी में शिकायत दी थी कि आरोपी अभिजीत उनकी बेटी को स्कूल जाते समय खाने-पीने की चीजों का लालच देकर बहलाता-फुसलाता था। आरोपी उसे जबरन चिल्ली वाली झील के पास खेतों में ले गया, जहां उसने उसके साथ दुष्कर्म किया और विरोध करने पर मारपीट की।
पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। 16 अक्तूबर 2024 को आरोपी को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान चिकित्सकीय साक्ष्य, बयान और अन्य प्रमाण अदालत में पेश किए गए। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कम उम्र और पारिवारिक परिस्थितियों का उल्लेख किया, मगर अदालत ने अपराध की गंभीरता को सर्वोपरि माना।
अदालत ने पोक्सो अधिनियम की धारा 4(2) में 20 वर्ष सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया। बीएनएस की धारा 87 में 10 वर्ष सश्रम कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना, धारा 137(2) में 7 वर्ष सश्रम कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना तथा पोक्सो अधिनियम की धारा 12 में 3 वर्ष सश्रम कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माना निर्धारित किया। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भी काटना होगा।
कुल 1 लाख 70 हजार रुपये जुर्माने में से 1 लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे, जबकि शेष राशि राज्य के खजाने में जमा होगी। अभियोजन पक्ष की पैरवी जिला न्यायवादी देवेंद्र मित्तल और उप जिला न्यायवादी जगसीर सिंह बराड़ ने की।