गांव भूंदड़ा में गुरुद्वारा साहिब की भव्य इमारत देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गई। बुधवार को हुए हादसे में एक कारीगर की मौत हो गई जबकि 20 बुलडोजर की मदद से चार मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। यह हादसा कैसे हुआ, कोई समझ नहीं पा रहा। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इमारत बेहद मजबूती के साथ बनाई गई थी। गुरुद्वारा साहिब की इमारत की नींव वर्ष 1987 में रखी गई थी। इमारत की नींव से लेकर दीवारों तक को बहुत मजबूती के साथ तैयार किया गया था। तब सिर्फ छत तक काम पूरा किया गया था। लगभग 10 साल बाद पहली मंजिल पर शानदार निर्माण किया गया। उसी के ऊपर गुंबद बनाया गया था। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने निर्माण सामग्री इतनी बढ़िया क्वालिटी लगाई थी कि इमारत अगले सौ साल तक जर्जर न हो। वे कहते हैं कि अगर गुंबद के भार से इमारत को नुकसान होता तो 15 वर्ष पहले ही ऐसा हो जाता। बस, हर जुबां पर यही सवाल है कि वाहेगुरु जाने, ऐह सब क्यों होया।
चल रहा था टाइलें लगाने का काम
गुरुघर के अंदर परिसर की चारदीवारी पर टाइलें लगाने का काम चल रहा था। पांच कारीगर काम कर रहे थे, जिसमें 2 कारीगर व तीन मजदूर इमारत के अंदर थे। इनमें कारीगर अशोक कुमार बीच की दिशा में टाइलें लगाने का काम कर रहा था। राजमिस्त्री राजू सिंह पीछे की दिशा में मजदूरों सहित लगे हुए थे। अचानक गुरुद्वारा साहिब की पूरी इमारत जमीन पर बिखर गई। इस हादसे की खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई। हादसे की सूचना मिलते ही दिगोह, रहनखेड़ी, मघेड़ा, धोलू, घोटड़ू, कुनाल, महमदपुर सोत्र, रसूलपुर व कुलां से भारी मात्रा में साध संगत पहुंच गई। मलबे के नीचे लोगों को निकालने के लिए ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर राहत कार्य शुरू किया। चार लोगों को कुछ ही मिनट बाद बाहर निकाल दिया गया। राजू सिंह, रणजीत सिंह, सचिन कुमार व मुकेश कुमार शामिल हैं। जब उनकी चिकित्सा जांच की गई तो वे सुरक्षित थे। उन्हें खरोंच तक नहीं आई हुई थी। टाइल कारीगर अशोक कुमार को बचाने के लिए 20 से अधिक बुलडोजर मशीनों की मदद से एक घंटे की मेहनत के बाद बाहर निकाल लिया। जब उसकी चिकित्सा जांच की गई तो सांसें बंद हो चुकी थीं। हालांकि एक आवाज पर हजारों की संख्या में लोग मदद के लिए एक जिंदगी बचाने के लिए आगे आए।
तीन महीने से बंद था काम
भूदंडा के श्री गुरुद्वारा साहिब की बिल्डिंग के निचले हिस्से की दीवारों पर टाइलें लगाने का काम पिछले सप्ताह ही शुरू किया था। कोरोना महामारी में लॉकडाउन के चलते गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने कार्य बंद किया हुआ था। कमेटी प्रधान सुखदेव सिंह व कोषाध्यक्ष सुखचैन सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब के निचले फर्श पर पत्थर व नमी से बचाने के लिए चारदीवारी पर टाइल लगाने का काम कई महीने से चल रहा था। लॉकडाउन के दौरान 3 महीने से काम बंद था। पिछले सप्ताह ही कारीगर अशोक कुमार ने अपना काम फिर शुरू किया। इमारत अचानक क्यों गिरी, इसको लेकर हर कोई दंग रह गया है।
मन अंदर से दुखी है हमारा
भूंदडा सरपंच प्रतिनिधि दलबीर सिंह, गुरमेल सिंह, हरदीप सिंह, अमरीक सिंह, बलजीत सिंह, सुखवीर सिंह, सुखविंदर सिंह, गुरुपहलाद व देवेंद्र सिंह आदि ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब की इमारत का निर्माण वर्ष 1987 में हुआ था। एक साधारण मकान भी 50 साल तक सलामत रहता है। आखिर इस भव्य इमारत के निर्माण में कहां कमी रही। यह बात सोचकर मन अंदर से दुखी होता है।
गुरु ग्रंथ साहिब को रहनखेड़ी गुरुद्वारा में रखा जाएगा
गांव भूंदड़ा में श्री गुरुद्वारा साहिब की तीन मंजिला इमारत मलबे में ढेर होने के बाद वहां के श्री गुरु ग्रंथ साहिब को रहन खेड़ी के गुरुद्वारा साहिब में गुरु मर्यादा अनुसार विराजमान किए जाएगा। सिख धर्म में वर्तमान में श्री गुरु ग्रंथ साहिब सर्वोपरि हैं। संगत से विचार-विमर्श किया गया। उसके बाद यह निर्णय लिया गया है।
सात माह पहले अशोक ने ली थी बच्ची गोद
गांव भूंदड़ा में गुरुद्वारा की इमारत के मलबे के नीचे दबने से जिस टाइल मिस्त्री अशोक की मौत हुई है उसकी खुद की संतान नहीं थी। उसने सात माह पहले ही रिश्तेदार की बच्ची गोद ली थी।
गुरुद्वारा में यह कर रहे थे काम
राजस्थान के जिला झुंझनू की तहसील उदयपुरवाटी के गांव बड़फोदिया एवं हाल राजपूत मोहल्ला गुडा निवासी 43 वर्षीय टाइल कारीगर अशोक कुमार, रतिया के गांव चिम्मों निवासी 27 वर्षीय राजमिस्त्री राजू सिंह, भूंदड़ा निवासी मजदूर रणजीत सिंह, लहरिया निवासी 25 वर्षीय मजदूर सचिन कुमार व कुलां निवासी 36 वर्षीय मुकेश कुमार मजदूर काम कर रहे थे। उनके ऊपर अचानक तीन मंजिला श्री गुरुद्वारा साहिब की बिल्डिंग गिर गई। अचानक बिल्डिंग गिरने की आवाज को सुनकर गांव में हाहाकार मच गया। ग्रामीणों ने आसपास के गांवों के गुरुद्वारों में मुनादी करके मौके पर ज्यादा से ज्यादा बुलडोजर मशीन सहित पहुंचने की अपील की। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस टीम मौके पर पहुंची। कारीगर व मजदूरों को बचाने के लिए मुहिम चलाई गई। एक राजमिस्त्री व तीन मजदूरों को कुछ ही देर बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हादसे में टाइल कारीगर अशोक कुमार की मलबे के नीचे दबने से मौत हो गई।
कोट
घटना की सूचना मिलने पर पंचायत विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी। जिसमें बीडीपीओ, ग्राम सचिव व मौजूद थे। गुरुद्वारा की बिल्डिंग कैसे और क्यों गिरी, इसकी पंचायती राज के तकनीकी विभाग से जांच करवाई जाएगी।
- नरेंद्र सिंह, समाज शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी।
गुरुद्वारा साहिब की गिरी इमारत।- फोटो : Fatehabad