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कुतों के झुण्ड ने बोला 12 साल के बच्चे पर हमला, कई जगहों से नोचा

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कुत्तों के झुंड ने 12 साल के बच्चे पर हमला कर नोंचा
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। हिसार रोड स्थित पुलिस लाइन के सामने झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले एक 12 साल के बच्चे को आवारा कुत्तों के झुंड ने नोच खाया। घायल बच्चे को उपचार के लिए फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जहां पर उसे एंटी रेबीज वैक्सीन के अलावा इंनोग्लोबिन का इंजेक्शन भी लगाना पड़ा। कुत्तों ने बच्चे को गले के पास काटा, जिस कारण इंनोग्लोबिन इंजेक्शन का प्रयोग करना पड़ा। चिकित्सकों के अनुसार, अब बच्चा खतरे से बाहर है और आगे उसका ट्रीटमेंट चलता रहेगा।
झुग्गी में रहने वाले पांडूराम का बेटा एसपी कुमार (12) मंगलवार को मैदान में खेल रहा था। इसी दौरान हिंसक कुत्तों का एक झुंड वहां आ गया और उन्होंने बच्चे पर हमला बोल दिया। कुत्तों ने बच्चे के मुंह और छाती को नोंच खाया। उसके चीखने की आवाज सुनकर झुग्गियों में रहने वाले लोग वहां आ गए और बच्चे को कुत्तों के चुंगल से छुड़वाया और उसे नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया। झुग्गी वासियों ने बताया कि पहले भी इन कुत्तों के झुंड ने एक भेड़ के बच्चे को मार दिया था। बच्चे के लिए अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन तो उपलब्ध था, लेकिन कुत्तों ने उसे गर्दन के पास से काटा था। इस पर फिजिशियन ने उसके लिए इंनोग्लोबिन इंजेक्शन और लगाने को कहा, यह अस्पताल में मौजूद नहीं था, जिस पर अस्पताल प्रशासन ने बाहर से अपने स्तर पर इस इंजेक्शन को परचेज करके बच्चे को लगाया।
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अक्सर आते हैं ऐसे केस
नागरिक अस्पताल में डाग बाइट के मामले अक्सर गर्मियों में अधिक आते हैं। चिकित्सकों के अनुसार, अगर कोई कुत्ता पागल हो जाता है तो वह एक ही समय में कई लोगों को काट सकता है। हालांकि ऐसा केस अभी तक यहां नहीं आया है। हालांकि ऐसे हालात में यह देखा जाता है कि डाग बाइट कितनी है और खून निकला है अथवा नहीं। अगर खून निकला है तो 7 इंजेक्शनप एंटी रेबीज वैक्सीन के लगाए जाते हैं, उसके बाद उसे बूस्टर दिया जाता है। अगर पालतु कुत्ते ने काटा होता है तो मात्र 3 इंजेक्शन से काम चल जाता है।
सर्दी के मौसम में आ जाते हैं 15 केस
अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार, सर्दी के मौसम में डाग बाइट के 15 केस पूरे जिले में सामने आ जाते हैं। हालांकि अधिकत्तर केस पालतु कुत्तें के ही होते हैं। एक या दो ही केस आवारा कुत्तों के होते हैं। उसमें भी यह जानना पड़ता है कि कुत्ता आवारा था अथवा पागल। इसके अलावा गांवों से कुत्तों के काटने के केस अधिकत्तर आते हैं। इसका मुख्य कारण रतिया व टोहाना व अन्य कस्बों तथा पीएचसी, सीएचसी में वैक्सीन का ना होना है। इसलिए सभी डाग बाइट के केस फतेहाबाद मुख्यालय के नागरिक अस्पताल में ही आते हैं।
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अस्पताल में हर समय उपलब्ध है एआरवी: एसएमओ
इस बारे में एसएमओ डा.ओपी दहमीवाल ने बताया कि नागरिक अस्पताल में हर समय एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध रहती है। कई बार मरीज की स्थिति को देखते हुए इंनोग्लोबिन इंजेक्शन लगाया जाता है। यह उस स्थिति में लगता है जब कुत्ते ने किसी को गर्दन के पास काट लिया हो। यह इंजेक्शन काफी महंगा होता है। मंगलवार को बच्चे के लिए इसकी आवश्यकता पड़ी तो हमने मार्केट से खरीदकर बच्चे को लगाया है।
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