गांव बड़ोपल में सिलिंडर लेने के लिए लाइन में लगे लोग स्त्रोत ग्रामीण
फतेहाबाद। गैस सिलिंडर की कालाबाजारी रोकने के लिए जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की टीमों ने शनिवार को जिले भर में ढाबों, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानें पर जांच की। 23 टीमों ने इस दौरान 36 गैस सिलिंडर जब्त किए। इनमें 17 कॉमर्शियल और 19 घरेलू सिलिंडर रहे।
जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी कुशल पाल बूरा ने बताया कि कई जगह पर कॉमर्शियल सिलिंडर का इस्तेमाल हो रहा है। इसे रोकने के लिए एजेंसी स्तर पर टीमें गठित की गई हैं। शनिवार को टीमों ने फतेहाबाद, भट्टूकलां, रतिया, भूना में छापे मारे। जांच के दौरान कई जगहों पर घरेलू सिलिंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल होता हुआ मिला जिन्हें टीम ने जब्त कर लिया। अधिकारियों के अनुसार दुकानदार इन सिलिंडरों का रिकॉर्ड नहीं दिखा पाए। सिलिंडर कनेक्शन का रिकॉर्ड होने पर ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
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12 शादियों के लिए जारी हुए 56 सिलिंडर
विवाह आयोजन पर गैस सिलिंडर की जरूरत के लिए प्रशासन कमेटी गठित कर चुका है। विभाग को कॉमर्शियल सिलिंडर के लिए 62 आवेदन प्राप्त हुए थे जिनमें से 12 स्थानों पर 56 सिलिंडर उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। डीएफएससी के अनुसार 21 मार्च को 6044 नए रिफिल प्राप्त हुए हैं। पहले से मौजूद 11,940 सिलिंडरों के साथ अब जिले में कुल 17,984 घरेलू गैस सिलिंडर उपलब्ध हैं।
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ऑनलाइन किया भुगतान, सिलिंडर देने से इन्कार का आरोप
गांव बड़ोपल के बस स्टैंड के पास आने वाली सुखमणी भारत गैस एजेंसी की गाड़ी के खिलाफ ग्रामीणों ने रोष व्यक्त किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि एजेंसी की ओर से केवाईसी के नाम पर उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। गांव निवासी ईश्वर चंद्र, विनोद कुमार और अभय सिंह ने बताया कि उन्होंने गैस सिलिंडर के लिए पहले ही ऑनलाइन भुगतान कर दिया था इसके बावजूद उन्हें समय पर नहीं दिया गया। जब पैसे पहले ही कट चुके हैं तो एजेंसी को तुरंत सिलिंडर उपलब्ध करवाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि पहले बिना केवाईसी के भी सिलिंडर आसानी से मिल जाते थे लेकिन अब केवाईसी के नाम पर तरह-तरह के बहाने बनाकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। कई ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि एजेंसी द्वारा बिना सिलिंडर दिए ही रिकॉर्ड में एंट्री कर ली जाती है।