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प्रमुख त्योहारों होली व दीवाली पर श्मशान घाट में करता था तंत्र क्रियाएं बाबा

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सुशील सिंगला
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टोहाना। शक्ति नगर में मंदिर बनाकर महिलाओं का यौन शोषण करने वाला बाबा अमर पुरी नागा की तंत्र क्रियाओं से पूरा मोहल्ला उससे भय खाता था। यह खुलासा मोहल्ले में रहने वाले लोगों ने किया है। उनका कहना है कि बाबा के पास इलाज करवाने आने वाली महिलाएं बाद में रोती हुई जाती देखी गई थी। जाहिर है बाबा नशे की दवा देकर उनसे यौन शोषण तो करता ही था, साथ ही उनको धमकियां भी देता था। यहीं नहीं प्रमुख त्योहारों पर बाबा श्मशान घाट में जाकर तंत्र क्रिया करता था।
बाबा बिल्लू उर्फ अमर पुरी पहले शहर के शास्त्री बाजार में जलेबियां बनाने का कार्य करता था। बाबा की जलेबियां पूर्ण रूप से मशहूर थी तथा दूर-दूर से लोग जलेबी लेने के लिए आते थे। पड़ोसियों के मुताबिक बाबा यहां शक्ति नगर में घर में रहने लगा तथा कुछ समय बाद उसकी पत्नी की किन्हीं कारणों से बीमारी के चलते मौत हो गई। बाबा की 3 बेटियां हैं और 2 बेटे हैं। बाबा की 3 बेटियों की शादी पंजाब में की हुई है तथा दो बेटों में से एक बेटा अमरवीर बैंगलोर में बिजली की दुकान करता है तथा दूसरा बेटे को बाबा ने बेदखल किया है।
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श्मशान घाट में जाकर करता था पूजा
मोहल्लावासियों के अनुसार बाबा बड़े त्योहार जैसे होली व दीवाली पर शमशान में जाकर पूजा करता था। कई बार गली में रात्रि के समय नग्न होकर नृत्य करता और फायरिंग भी करता था, लेकिन मोहल्लावासी कुछ भी कहने से डरते थे। मोहल्लावासियाें ने बताया कि वे परेशान थे, लेकिन इसके खिलाफ आवाज उठाने वाली महिला पर इसने इल्जाम लगाकर फंसा दिया।
पहले बचाया था बेटी ने
बाबा के खिलाफ 13 अक्तूबर 2017 को टोहाना के एक गांव निवासी महिला ने झाड़फूंक के नाम पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। तब पुलिस ने बाबा के खिलाफ केस दर्ज करके उसे गिरफ्तार भी कर लिया था। बाद में बाबा की बेटी ने ही महिला से राजीनामे की बात कहकर उसे रुपये लेते पुलिस को पकड़वा दिया था। जिससे बाबा बच गया था।
चूहे व खरगोश रखने का था शौकीन
पड़ोसियों की मानें तो बाबा शाही शौक रखता था। उसने अपने पास सफेद रंग के चूहे व खरगोश रखे हुए थे। वह उनके साथ भी अपना कुछ समय व्यतीत करता था। उसके पास हथियार भी थे और वह फायर आदि भी करता था, जिससे मोहल्ले के लोग उससे भय खाने लगे थे। वहीं उसकी तंत्र विद्या से भी लोग उससे डरते थे।
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हमें नहीं पता था क्या होता था यहां : बेटा।
बाबा के बेटे अमरवीर ने बताया कि उसके पिता पहले यहां जलेबी की रेहड़ी लगाने का कार्य करते थे। उसके बाद उसकी माता की मृत्यु हो गई तथा उन्होंने मंदिर बना लिया। इसके बाद यहां वे लोगों की समस्याओं का निराकरण तंत्र विद्या द्वारा करने लगे। उसने बताया कि वह बैंगलोर रहता है और उसे नहीं पता था कि मंदिर में क्या होता है। वह उसके पिता पर आरोप लगने के बाद यहां आया है।
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