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नगर परिषद को अदालत से झटका, चार मरला पार्क पर छोडना होगा दावा

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नगर परिषद को अदालत से झटका, चार मरला पार्क पर छोड़ना होगा दावा
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। पिछले कई सालों से चार मरला कॉलोनी की मुख्य पार्क की जगह को लेकर चराईपोत्रा परिवार के साथ कानूनी लड़ाई लड़ रहे नगर परिषद प्रशासन को करारा झटका लगा है। अतिरिक्त सत्र एवं न्यायाधीश आरती सिंह की अदालत ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए नगर परिषद की अपील खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद नगर परिषद को पार्क की जमीन को समतल कर चराईपौत्रा परिवार को सौंपनी पड़ेगी। शहर की सबसे महंगी चार मरला कॉलोनी के माल रोड पर तकरीबन 1 कनाल 16 मरले जगह की कीमत करोड़ों में बताई जाती है।
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क्या है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक भीमा बस्ती निवासी ईश्वर देवी विधवा आत्मा राम के वारिसों नंदलाल, किशनचंद, सोहन लाल, सुभाष चंद पुत्र आत्मा राम, राजकुमार पुत्र स्वामी दित्ता, जयदयाल, हरदयाल पुत्र लक्ष्मण दास निवासी 4 मरला कॉलोनी, तारावंती विधवा गोबिंद राम, शंकर लाल पुत्र गोबिंद राम निवासी मॉडल टाऊन, ओमप्रकाश पुत्र गोबिंद राम निवासी सेक्टर तीन हुडा, नारायण देवी विधवा रामदियाल, सुनीता रानी विधवा बंसराज, नीतू विधवा जुगल किशोर निवासी सुर्या एनक्लेव बीघड़ रोड फतेहाबाद ने 13 अगस्त 2011 को नगर परिषद के खिलाफ अदालत में दिवानी दावा किया था कि नगर परिषद बस्ती भीमा की खसरा नम्बर 544/12, 2 कनाल 2 मरले जमीन में से 1 कनाल 16 मरला पर बनी चहारदीवारी और वहां लगी ग्रील हटाने को लेकर दावा दायर किया था। यह मामला अदालत में करीब 4 साल चला। नगर परिषद ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस जमीन पर नगर परिषद ने 1975 में पार्क बनाया था और अब तक विकसित करने में नगर परिषद ने लाखों रुपये खर्च किए हैं। पार्क विकसित करने के कागजात भी नगर परिषद ने अदालत में रखे और अपने हक में गवाह भी पेश किए। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के पश्चात दिवानी दावा करने वाले नंदलाल आदि को राहत प्रदान करते हुए नगर परिषद को बस्ती भीवां की खसरा नंबर 544/12, 1 कनाल 16 मरला की जमीन पर उसके द्वारा किए गए निर्माण को रिमूव करने व 2 कनाल 2 मरला पर किसी प्रकार का निर्माण न करने के आदेश दिए थे। नगर परिषद ने इस फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरती सिंह ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है और नगर परिषद की अपील खारिज कर दी। इस फैसले के बाद अब नगर परिषद को यहां से कब्जा हटाना पड़ेगा। इस बारे में बात करने पर जब नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र कुमार से बात की गई तो सोमवार सांय साढ़े पांच बजे से साढ़े छह बजे तक लगातार उनका फोन स्विच आफ रहा।
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