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दुड़ाराम और प्रहलाद दोनों को गया था प्रभारी केहरवाला का फोन, लेकिन हरिद्वार गए प्रहलाद तो दिल्ली पहुंचे दुड़ाराम, विफल रहा कांग्

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद। मोदी सरकार को पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर घेरने के विपक्ष के एक और प्रयास को भी जिले के दुकानदारों व व्यापारियों ने विफल कर दिया। कांग्रेस द्वारा भारत बंद के तहत सोमवार को शहर के बाजार बंद करवाने का प्रयास पहले से मंदी की मार झेल रहे दुकानदारों को रास नहीं आया और शहर में दुकानें खुली ही नजर आई। शहर में कांग्रेसियों को बंद के लिए ज्यादा समर्थन ना मिलता देखकर कांग्रेसियों ने अपना प्रदर्शन महज केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी तक ही सीमित कर कार्यक्रम की इतिश्री करने में भलाई समझी। इस बंद में महज कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के समर्थक समझे जाने वाले नेता व कार्यकर्ता ही नजर आए। बाजार बंद के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं का नेतृत्व कांग्रेस के हरियाणा प्रभारी व अखिल भारतीय कांग्रेस सेवा दल के सचिव राजेन्द्र रास रानियां ने किया। प्रदर्शनकारियों ने लाल बत्ती चौक, फव्वारा चौक, हंस मार्केट, थाना रोड पर दुकाने बंद करवाने की अपील की। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खास माने जाने वाले पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा व कुलदीप बिश्रोई के चचेरे भाई एवं पूर्व सीपीएस दुड़ाराम ने इस प्रदर्शन व बंद से दूरी बनाए रखी।
फतेहाबाद में बंद के दौरान दुकानदारों को संबोधित करते हुए राजेंद्र रास रानियां ने कहा कि आज की मंहगाई ने आम वर्ग की कमर तोड कर रख दी है। पिछले काफी समय से लगातार पेट्रोल व डीजल की रेटों में बढ़ोतरी कर यह साबित कर दिया है कि भाजपा जनता की कितनी हितैषी है। इस अवसर पर दीपक भिरडाना, नरेश सरदाना, सुभाष बिश्नोई, व्यास करण लूथरा, नरेन्द्र मग्घर, प्रवीन भिरडाना, भूपेन्द्र नारंग, सुरजीत मेडल, अनूप डच, कपिल पूनिया, गुरदीप संधू, केतन मिढ़ा सहित अनेक कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे।
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गौरतलब है कि आठ सितंबर को इनेलो ने भी पेट्रोल व डीजल के बढ़ते दामों के खिलाफ प्रदेश व्यापी बंद का आह्वान किया था, लेकिन फतेहाबाद में इनेलो नेताओं द्वारा पूरा जोर लगाने के बावजूद इनेलो का बाजार बंद भी कामयाब नहीं हो सका था। इसके बाद से कांग्रेस पर एक दबाव था कि वो अपने बाजार बंद को सफल बनाए। लेकिन पहले से ही ये संभावना जताई जा रही थी कि दुड़ाराम व प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा अगर इस बंद से खुद को दूर रखेंगे तो कांग्रेसियों की लाज बचना मुश्किल होगा और सोमवार को कमोबेश हुआ भी कुछ ऐसा ही। कांग्रेस की द्वितीय पंक्ति के नेताओं ने बंद को कामयाब करने के लिए प्रयास तो किए लेकिन ये प्रयास नाकाफी ही साबित हुए। हालांकि कांग्रेस के मीडिया प्रभारी प्रवीण भिरडाना ने बयान जारी कर इस बंद के सफल होने का दावा जरूर किया गया लेकिन बाजार में हर जगह खुली दुकानें उनके दावों पर धज्जियां उड़ाती नजर आई।
स्वामी दिव्यानंद से मिलने हरिद्वार पहुंचे थे प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, दुड़ाराम भी निकले दिल्ली
सोमवार को बाजार बंद करवाने के लिए एक और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के समर्थक बाजार में घूमकर दुकानदारों को मनाने का असफल प्रयास करते दिख रहे थे तो दूसरी ओर फतेहाबाद में कांग्रेस के दो दिग्गज नेता शहर से बाहर पहुंचे हुए थे। पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा हरिद्वार में स्वामी दिव्यानंद के आश्रमश में उनसे मिलने पहुंचे हुए थे जबकि दुड़ाराम भी किसी जरूरी काम से सोमवार सुबह ही दिल्ली निकल गए। प्रहलाद सिंफ के स्वामी दिव्यानंद से मिलकर आशीर्वाद लेते के फोटो भी सोमवार दोपहर सोशल मीडिया पर जारी किए गए। इस तरह फोटो जारी करने की टाइमिंग को इसी बात से जोड़कर देखा जा रहा है कि यही संदेश जाए कि उन्होंने कांग्रेस द्वारा बुलाए गए बंद को नजरअंदाज नहीं किया बल्कि अपने कार्यक्रम के चलते वो शहर से बाहर हैं। दूसरी ओर दुड़ाराम का ये कहना है कि वो सोमवार सुबह फतेहाबाद में थे, इस दौरान उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को बंद को सफल बनाने के लिए कहा भी सही, लेकिन इससे पहले उन्हें एक जरूरी काम से तुरंत दिल्ली जाना पड़ गया था। दोनों को कांग्रेस प्रभारी ओमप्रकाश केहरवाला का फोन आया था कि वो बंद में शामिल हों।
ये रहे इनेलो-कांग्रेस के बाजार बंद के विफल होने के मुख्य कारण
1. बाजार में इन दिनों मंदी का माहौल है, ऐसे में दुकानदार भरसक प्रयत्न कर रहे हैं ताकि बिक्री बढ़े।
2. जन्माष्टमी के बाद अब गणेश चतुर्थी के चलते दस दिन रौनक रहेगी, इसके बाद 15 दिन के श्राद्ध के चलते बिक्री एक दम से गिरेगी। ऐसे में दुकानदारों ने विपक्ष के आह्वान को ज्यादा तवज्जो नहीं दी।
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3. हाल ही में थाना रोड पार्किंग ठेकेदारों व थाना रोड के दुकानदारों के बीच विवाद हुआ था, लेकिन अखबारी बयान जारी करने के अलावा जमीन पर कोई कांग्रेस या इनेलो का नेता दुकानदारों के साथ खड़ा नहीं नजर आया। जिसका खामियाजा इनेलो-कांग्रेस को अपने बंद के दौरान भुगतना पड़ा।
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