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ऑक्सीजन की कमी नहीं, नागरिक अस्पताल में सरकार की ढिलाई भारी पड़ सकती है नवजातों पर

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद।
उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में अस्पताल में ऑक्सीजन बंद करने से 40 बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में ऑक्सीजन की तो कमी नहीं है, लेकिन जनाना वार्ड में जगह की किल्लत ने जरूर गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की सांसें संकट में डाल रखी हैं। सिविल सर्जन डॉ. मनीष बंसल ने गोरखपुर हादसे के बाद शनिवार को नागरिक अस्पताल का निरीक्षण जरूर किया, लेकिन दबी जुबान में वो भी मानते हैं कि वर्तमान हालात में फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में केवल महिला एवं नवजात बच्चों के लिए सौ से डेढ़ सौ बिस्तर की आवश्यकता है। लेकिन तीन साल में सरकार की ओर से महज घोषणा और आश्वासन के अलावा कुछ नहीं किया गया है।

एक बिस्तर पर दो महिलाएं, फिर भी वार्ड की गैलरी में पलंग लगाने को मजबूर प्रसूता
नागरिक अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित नवजात एवं प्रसूता वार्ड की हालत इस कदर बुरी है कि वार्ड में एक ही बिस्तर पर दो-दो प्रसूता लेटने को मजबूर हैं। जगह की किल्लत के चलते मजबूरन स्वास्थ्य विभाग को वार्ड की गैलरी में पलंग लगाने पड़े हैं। जनाना वार्ड का फर्श जगह-जगह से टूटा हुआ है। इसके अलावा, मरीजों की देखभाल के लिए उनके परिजनों के बैठने तक के लिए जगह नहीं है। इससे मरीजों के परिजनों को वार्ड के बाहर बैंचों पर बैठना पड़ता है और थोड़ी-थोड़ी देर के बाद वे अपने मरीज को संभालते रहना पड़ता है।
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हिसार से आती है ऑक्सीजन की सप्लाई, समय-समय पर खुद संभालते हैं चिकित्सक
फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में मरीजों को ऑक्सीजन सप्लाई के लिए सेंट्रलाइज सिस्टम है। यानी मरीजों के प्रत्येक पलंग पर ऑक्सीजन की व्यवस्था है। फतेहाबाद नागरिक अस्पताल के लिए हिसार से ऑक्सीजन के सिलेंडर मंगवाए जाते हैं। यहां पर तकरीबन प्रत्येक माह 50 से 60 हजार रुपये तक के ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा ऑक्सीजन सप्लाई रूम में दो कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है जो सेंट्रल सिस्टम के लिए ऑक्सीजन के सिलेंडरों की पूरी व्यवस्था देखते हैं।

एक साल पहले हादसे में गई थी नवजात की जान, आरोपी चिकित्सक फिर हुआ था बहाल
लगभग एक साल पहले कंडम इमारत के चलते जनाना वार्ड की छत का मलबा गिर गया था। इस हादसे में एक नवजात बच्चे की मौत हो गई थी जबकि तीन प्रसूताओं को चोटें आई थी। स्वास्थ्य विभाग एवं निगरानी कमेटी की मैराथन जांच में एक चिकित्सक और स्टाफ नर्स लापरवाही की दोषी पाई गई थी। इसके बाद स्टाफ नर्स के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे जबकि अनुबंध आधार पर लगाए गए चिकित्सक को तुरंत पद से हटा दिया गया था। हालांकि, चिकित्सकों की कमी से दो-तीन माह के बाद ही उसी चिकित्सक को दोबारा सरकारी अस्पताल में ही ज्वाइन कराना पड़ा था।

50 बेड की बिल्डिंग, दो सौ बिस्तर तक बढ़ा दी क्षमता
नागरिक अस्पताल की वर्तमान बिल्डिंग 50 बिस्तर के लिए बनाई गई थी। इस बिल्डिंग को बने हुए तकरीबन 35 साल से अधिक समय हो चुका है। समय के साथ साथ जनसंख्या का बढ़ता हुआ दबाव इस अस्पताल की बिल्डिंग पर भी नजर आने लगा है। 50 बिस्तर के लिए बनाए गए इस अस्पताल में वर्तमान में दो सौ पलंग लगा दिए गए हैं लेकिन इसके बावजूद मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही। इतना ही नहीं, नागरिक अस्पताल की ईमारत में लगातार जगह की कमी के चलते सिविल सर्जन कार्यालय ही सेक्टर तीन स्थित पॉलीक्लिनिक में शिफ्ट करना पड़ा है, ताकि अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग में चल रहे कुछ कार्यालय अस्पताल से निकालकर यहां मरीजों के लिए जगह बनाई जा सके।
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नागरिक अस्पताल की क्षमता से कहीं अधिक मरीजों की संख्या है। जिले को इस समय कम से कम तीन सौ बिस्तर के अस्पताल की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को इस बाबत एक प्रपोजल भेजा है। अगर उनकी स्वीकृति आती है तो नागरिक अस्पताल की प्रस्तावित इमारत को दो सौ से बढ़ाकर तीन सौ बिस्तर का करने का प्रोसेस शुरू करेेंगे।
- डॉ. मनीष बंसल, सिविल सर्जन, फतेहाबाद



- ऑक्सीजन की कमी नहीं, अस्पताल में सरकार की ढिलाई नवजातों पर पड़ सकती है भारी
- कंडम बिल्डिंग को बार-बार रिपेयर करवा चलाया जा रहा काम, हादसे में नवजात की हो चुकी है मौत
- वार्ड की गैलरी में बिछे हैं पलंग, जनाना वार्ड में नवजात और महिलाओं के लिए नहीं है पर्याप्त व्यवस्था
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