सुरेंद्र असीजा
फतेहाबाद। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला के गृहक्षेत्र टोहाना-जाखल के किसान पराली जलाकर प्रदूषण फैलाने में सबसे आगे रहे। फतेहाबाद से टोहाना और जाखल से ही 70 फीसदी पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। कृषि विभाग की मानें तो जिले में अब तक कुल 190 किसानों को पराली जलाने के मामले में नोटिस दिया गया है। इसमें 120 किसान अकेले टोहाना-जाखल के ही हैं। कृषि विभाग के उपनिदेशक बलवंत सहारण ने भी इसकी पुष्टि की है।
जिला प्रशासन ने खेतों में पराली जलाने से रोकने के लिए विभिन्न अधिकारियों की ड्यूटियां लगाई थी। इसमें ग्राम स्तर पर ग्राम सचिव, तहसीलदार, पटवारी, एसडीएम, डीडीए, बीडीपीओ आदि शामिल थे। इसके अलावा पिछले साल की तरह इस बार भी सैटेलाइट के जरिए भी धान की पराली जलाने वालों पर नजर रखी गई। हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (हरसैक) द्वारा सैटेलाइट की मदद से फतेहाबाद जिले पर नजर रखी गई। सैटेलाइट से 31 अक्तूबर तक पकड़ में आए किसानों की संख्या 710 के करीब हैं जिन्होंने अपने अपने खेत में पराली जलाई। इन लोगों को जिला प्रशासन की टीमें चिह्नित कर रही हैं।
ठेके पर जमीन लेने वाले ज्यादा दोषी
कृषि विभाग के सर्वे में एक बात निकल कर आई है, वो ये कि धान की पराली जलाने के मामले में वो किसान ज्यादा दोषी मिल रहे हैं जिन्होंने खेती ठेके पर जमीन लेकर की है। कृषि उपनिदेशक की मानें तो ऐसे लोगों को ठेके पर मिली जमीन पर फसल बोने से फसल का भाव मिल गया। ऐसे में वो महंगी मशीन लेकर पराली संभालने का झंझट मोल नहीं लेना चाहता, इसके चलते ही पराली जलाने का संकट भयंकर रूप ले रहा है।
एनजीटी के आदेश भी नहीं मान रहे किसान
प्रदेश सरकार ने एनजीटी के आदेशों की पालना करते हुए धान के अवशेष पराली आदि जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके विरोध में किसानों ने काफी समय तक प्रदर्शन भी किया था। बावजूद आदेश जारी रहे। इसके बाद भी किसान आदेशों को न मानते हुए पराली जला रहे हैं। पराली से फैलने वाले स्मॉग के चलते लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और आंखों में भी लगातार जलन के मरीज सामने आ रहे हैं।
एनजीटी को आज सौंपनी है रिपोर्ट
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस बार पराली जलाने पर काफी गंभीरता दिखाते हुए कड़े आदेश दिए थे। इन्हीं आदेशों पर जिला प्रशासन ने क्या कदम उठाए, इस बारे में वीरवार को जिला प्रशासन एनजीटी को रिपोर्ट सौंपेगा।
हमने अपनी ओर से सरपंचों, किसानों को जागरूक किया था। किसानों को नोटिस दिए गए हैं तो इसका मतलब है कि प्रशासन मुस्तैद था। इस बार कुछ आदेश देरी से आए थे और कुछ किसानों को भी पर्याप्त जानकारी नहीं थी। उम्मीद है कि अगली बार से इसमें काफी गिरावट देखने को मिलेगी। सही समय पर किसानों ने जुर्माना न भरा तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।
बलवंत सिंह सहारण, कृषि उपनिदेशक, फतेहाबाद