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परियोजनाओं का निजीकरण बर्दाश्त नहीं : जाण्डली

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परियोजनाओं का निजीकरण बर्दाश्त नहीं : जाण्डली
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। आशा वर्कर्स यूनियन पीएचसी बड़ोपल की मीटिंग प्रधान सुमन धारनियां की अध्यक्षता में हुई। मीटिंग में आशा वर्करों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई और 9 से 11 नवम्बर को ट्रेड यूनियनों द्वारा दिल्ली में डाले जाने वाले महापड़ाव में शामिल होने का निर्णय लिया गया। मीटिंग को सीटू जिला उपप्रधान रमेश जाण्डली ने संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र व राजय सरकार की परियोजनाओं की निजी हाथों व प्राइवेट कम्पनियों को सौंपने, एनजीओ को देने के खिलाफ दिल्ली महापड़ाव में बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब से केन्द्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है, तब से आशा वर्कर्स को लगातार समस्याओं का समाधान करना पड़ रहा है। मानदेय, प्रोत्साहियों का भुगतान समय पर नहीं हो रहा। उन पर अनेक नए काम थौंपे जा रहे हैं परंतु उनका पैसा नहीं दिया जाता। सरकार समय-समय अनेक मिशन और पखवाड़े मनाने का प्रोग्राम लेकर आ रही है, इन सब कामों पर आशा वर्कर्स अपना पूरा समय लगाती है लेकिन जब पैसे की बात आती है तो उन्हें कुछ नहीं मिलता। वर्कर्स पर कन्या भू्रण हत्या के केस पकड़वाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। आशाओं को लिंगानुपात कम होने का दोषी ठहरा कर लैटर निकाले जा रहे हैं और जींद की पांच आशा वर्कर्स को तो हटा भी दिया था जिन्हें काफी संघर्ष के बाद वापस लगाया गया। उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा सरकार एक तरफ घूंघट का महिमा मंडन कर रही है, महिला विरोधी परम्पराओं को बढ़ावा दे रही है। सरकार कन्या भू्रण हत्या करने वाले डाक्टरों और अल्ट्रासाऊंड सैन्टरों को सजा देने की बजाय आशाओं पर नाजायज दबाव बनाकर प्रताड़ित कर रही है। एमएचएम के कामों को एनजीओ के माध्यम से करवाकर सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को प्राइवेट करने की तरफ कदम बढ़ा रही है जिसे किसी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा और सरकार की इन नीतियों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। बैठक को मीरा बड़ोपल, प्रोमिला धांगड़, रोशनी देवी, अनिता, रजनी, राजपति भोड़ा, कौशलया, तृप्ता काजल, परमजीत बीघड़, मोनिका कुम्हारिया, बेला मताना, सुदेश चिन्दड़, सुमित्रा सहित अनेक आशा वर्कर्स शामिल हुई।
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