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मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे किसान, ढाई घंटे तक रोका राजमार्ग, मूक दर्शक बनी रही पुलिस

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद।
पिछले कई दिनों से मांगों को लेकर डीसी कार्यालय के बाहर धरना दे रहे किसानों ने शुक्रवार को भाकियू के राष्ट्रीय आह्वान पर हिसार रोड पर नई सब्जी मंडी के बाहर जाम लगा दिया। हालांकि किसानों की संख्या कम होने पर किसान नेताओं ने पहले से ही समर्थित माकपा और आम आदमी पार्टी के अलावा लघु सचिवालय में प्रदर्शन करने पहुंची आंगनबाड़ी वर्करों को भी धरने में शामिल किया। किसानों ने करीब ढाई घंटे तक राजमार्ग पर जाम लगाए रखा।
किसानों ने सब्जी मंडी के ठीक सामने जाम लगाया था, जिसके कारण पुलिस को वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से निकालने में आसानी हुई। इसके चलते पुलिस ने भी किसानों को शांति से उनके धरने का समय पूरा करने दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने एक आध बार किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन किसानों ने एक न सुनीं और सड़क पर बैठे रहे। किसानों के इस प्रदर्शन को कई अन्य जनसंगठनों ने भी अपना समर्थन दिया। पहले आशंका जताई जा रही थी कि धरने के तुरंत बाद पुलिस आंदोलनकारी किसानों पर नेशनल हाइवे जाम करने के आरोप में मामला दर्ज करेगी, लेकिन देर सांय तक भी पुलिस द्वारा इस बारे में कोई कार्यवाही नहीं की गई थी।
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रोड जाम से पूर्व किसान संगठनों द्वारा नई सब्जी मंडी में सभा का आयोजन हुआ। सभा को किसान सभा के जिला प्रधान रामस्वरूप ढाणी गोपाल, किसान यूनियन के नेता अजय झाझड़ा एडवोकेट, हंसराज सिवाच, माकपा जिला सचिव जगतार सिंह सहित अनेक किसान व मजदूर नेताओं ने संबोधित किया। किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा ने चुनावों से पूर्व डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का वादा किया था और इस मुद्दे को लेकर भाजपा नेता आए दिन प्रदर्शन भी करते रहे, लेकिन सत्ता में आते ही भाजपा नेताओं ने अपना रंग बदल दिया और अब वे स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू न करने का हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दे चुके हैं। देश में जब किसान अपनी फसलों के लाभकारी दाम व कर्जमाफी को लेकर आंदोलन कर रहे हैं तो भाजपा सरकार उन पर दमनात्मक कार्रवाई करते हुए किसानों पर गोलियां चलाकर उनकी हत्या कर रही है। किसान सरकार की ऐसी दमनात्मक कार्रवाईयों से डरने वाले नहीं और सरकार की कृषि विरोधी नीतियों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार ऐसे संशोधन कर देश के किसानों व पशुपालकों को उजाड़ने का काम कर रही है। पशु बिक्री पर रोक लगने से जहां पशुओं की खरीद-बेच का कारोबार पूरी तरह ठप हो जाएगा। वहीं इससे पशुपालकों के सामने भी गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। आंदोलनकारी किसानों ने अपनी मांगों में उनकी फसलों के लाभकारी दाम मिलने, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने, मध्यप्रदेश में किसानों पर गोलियां चलाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई और मध्यप्रदेश सरकार को बर्खास्त करने की मांग रखी। इसके अलावा किसानों ने पशु क्रूरता अधिनियम में किए गए किसान विरोधी संशोधनों को वापस लेने, आवारा पशुओं पर नियंत्रण के उपाय करने, किसानों को कर्जमुक्त करने, फसल बीमा योजना के नाम पर हो रही जबरी वसूली पर रोक लगाने, भूना में बंद की गई शुगर मिल को दोबारा चालू कर क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिए जाने की भी मांग की है।


मूक-दर्शक बनी रही पुलिस फोर्स, हाइवे से किसानों को उठाने तक का प्रयास नहीं
किसानों द्वारा रोड जाम करने का ऐलान पहले से किया गया था और इसके मद्देनजर पुलिस व जिला प्रशासन की ओर से लगातार तैयारियों की बात भी की जा रही थी। शुक्रवार को किसानों द्वारा नेशनल हाइवे जाम करने पर पुलिस केवल मूक-दर्शक बनी रही। कहने को पुलिस विभाग की ओर से दो-दो एसएचओ व सिक्योरिटी इंचार्ज के नेतृत्व में अच्छी खासी पुलिस फोर्स तैनात की गई थी, लेकिन ऊपर से आदेश नहीं आने के चलते पूरी पुलिस फोर्स धरनास्थल से एक निश्चित दूरी पर खड़ी रही। पुलिस अधिकारियों ने एक बार भी किसानों को नेशनल हाइवे से उठाने का प्रयास नहीं किया। साफ तौर पर लग रहा था कि प्रशासन की मंशा सिर्फ किसानों का धरने का समय पूरा करने की है।
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वैकल्पिक रास्ते से निकाला वाहनों को
किसानों द्वारा सब्जी मंडी के सामने नेशनल हाइवे के दोनों तरफ जाम लगाने से एकबारगी तो वाहनों का आना-जाना दूभर हो गया, लेकिन पुलिस ने इसका तुरंत तोड़ निकाल लिया और वाहनों को धरनास्थल पर पहुंचने से पहले ही वैकल्पिक रास्तों से निकाल दिया गया। पुलिस द्वारा भूना रोड, इंडस्ट्रियल एरिया, सचिवालय के सामने व मिनी बाईपास के पास नाके लगाए गए थे और वाहनों को धरना स्थल की बजाए अन्य रास्तों से शहर के अंदर और बाहर ले जाया जा रहा था। धरनारत किसानों ने भी गलियों में से गुजर रहे वाहनों को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया।


सड़कों पर उतरे किसान, ढाई घंटे तक रोका राजमार्ग, मूक दर्शक बनी पुलिस
सब्जीमंडी के सामने सड़क के दोनों तरफ धरने पर बैठे किसान, आंगनबाड़ी वर्कर भी समर्थन में बैठी धरने पर
वाहनों को पुलिस ने वैकल्पिक रास्तों से निकाला बाहर, अनेक किसानों पर मामला दर्ज होने की आशंका


16एफटीबीपी10 : फतेहाबाद में नेशनल हाइवे पर बैठकर रोड जाम करते किसान व अन्य जनसंगठनों के सदस्य।
16एफटीबीपी11 : किसानों द्वारा किए रोड जाम के दौरान सड़क पर धरना देकर बैठी आंगनबाड़ी कर्मचारी।
16एफटीबीपी12 : फतेहाबाद में किसानों के धरने के दौरान दूर खड़े पुलिस कर्मचारी।
16एफटीबीपी13 : किसानों के जाम के दौरान एक वाहन चालक को वापिस भेजते पुलिसकर्मी।
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