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किसानों के खाते में सीधे पेमेंट डालने के सरकारी ऐलान से भड़के आढ़ती, मंडी और मार्किट कमेटी को जड़ा ताला, कमेटी परिसर में दिया धर

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फ्लैग : किसानों के खाते में सीधे पेमेंट डालने के सरकारी ऐलान से भड़के आढ़ती
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
गेहूं की पेमेंट सीधे किसानों के खाते में डालने के सरकारी आदेशों पर अनाजमंडी के आढ़ती भड़क उठे। आढ़तियों ने सरकार के आदेशों के विरोध में शनिवार सुबह अनाजमंडी के चार गेटों को बंद कर उन पर ताले जड़ दिए और गेहूं खरीद नहीं होने दी। इतना ही नहीं, व्यापार मंडल के गुस्साए पदाधिकारियों ने प्रधान सुभाष मुंजाल के नेतृत्व में अनाजमंडी की सभी दुकानों को भी बंद करवा दिया। इसके बाद पहले मार्केट गेट को ताला जड़ दिया। बाद में मार्केट कमेटी सचिव के आग्रह पर गेट तो खोल दिया लेकिन व्यापार मंडल के पदाधिकारियों और आढ़ती मार्केट कमेटी परिसर में ही धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की। दोपहर बाद प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार विजय मेहता एवं डीएफएससी के निरीक्षक ने आढ़तियों को आश्वासन दिया कि पुराने तरीके से ही पेमेंट की जाएगी, लेकिन आढ़तियों ने लिखित आदेश के बिना उनकी बात मानने से इंकार कर दिया। आढ़तियों ने स्पष्ट कहा कि उनकी हड़ताल राज्य स्तर की होगी। इसके चलते व्यापार मंडल की प्रदेश स्तरीय बैठक रविवार को करनाल में बुलाई गई है।
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यह है मामला
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशालय ने शुक्रवार को सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक एवं अन्य खरीद एजेंसियों को एक पत्र जारी कर कहा कि प्रदेश के अंबाला, फतेहाबाद, करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, फरीदाबाद, पलवल, जींद व सिरसा में पड़ोसी राज्यों के किसान गेहूं लाकर बेच रहे हैं, जिससे हरियाणा को नुकसान हो रहा है। ये आवक अवैध रूप से हो रही है। इसलिए सभी बिलिंग कम पेमेंट एजेंट अर्थात बीसीपीए आढ़तियों को गेहूं की पेमेंट न देकर सीधे किसानों के खाते में डालें और इसके लिए किसानों से आईडी प्रूफ लिया जाएगा ताकि यह साफ हो सके कि गेहूं बेचने वाला किसान हरियाणा का ही है। इन्हीं आदेशों के विरोध में शनिवार को आढ़तियों ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा की जाने वाली गेहूं की खरीद करवाने से मना कर दिया और मंडी गेट पर ताला जड़कर अपना रोष प्रकट किया। व्यापार मंडल के प्रधान सुभाष मुंजाल, सचिव रमेश तनेजा ने व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आढ़तियों ने किसानों को लाखों रुपये अग्रिम दे रखे हैं, अगर गेहूं की पेमेंट सीधा किसान के खाते में जाती है तो उन्हें सीधा नुकसान है क्योंकि उनकी एडवांस दी गई पेमेंट डूबने का खतरा है। इसके अलावा ब्याज राशि भी वापस आनी संभव नहीं क्योंकि किसान के खाते में गई राशि उसका ऋणधारक बैंक स्वयं काटेगा और बाद में किसान के पास पैसा जाएगा। इसके अलावा भी किसान द्वारा कागजी कार्यवाही असंभव सा प्रतीत होता है। इसी विरोध में मंडी के व्यापारियों ने एकत्रित होकर मंडी की दुकानें बंद करवा दी।
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जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सूत्रों की मानें तो अब तक जिले में छह लाख 36 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है जबकि बीते वर्ष कुल 6 लाख 90 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई थी। ऐसे में गेहूं की खरीद नाममात्र ही शेष रह गई है। डीएफएससी प्रमोद शर्मा के अनुसार शनिवार को 10-12 हजार क्विंटल गेहूं की ही खरीद की जानी थी। विभाग की ओर से परचेजर गेहूं की खरीद के लिए गया था, लेकिन आढ़तियों ने ही गेहूं की खरीद करवाने से मना कर दिया।
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अब तक 95 फीसदी गेहूं की खरीद हो चुकी है। जिस गेहूं की खरीद हो चुकी है, उसकी पेमेंट पुराने तरीके से ही होगी। सरकार के आदेशों से व्यापारी को कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। ’
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प्रमोद शर्मा, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, फतेहाबाद।
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मेरे पास आदेश आए हैं कि 27 अप्रैल से होने वाली गेहूं की खरीद की पेमेंट किसान के खाते में डाली जाए और गेहूं पर मिलने वाला कमीशन व लेबर की राशि आढ़ती के खाते में डाली जाए।
नरेश डेलू, बीसीपीए, अनाजमंडी फतेहाबाद ।
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