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पशु मेले में नियमों को ताक पर रखकर दे दिए 54 लाख के ठेके, कई अफसरों की मिलीभगत की आशंका

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अमित रूखाया
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फतेहाबाद।
फतेहाबाद में हमेशा से ही अफसरी भ्रष्टाचार का गढ़ माने जाने वाले पशु मेले में नियमों को ताक पर रखकर लगभग 54 लाख के ठेके बांट दिए गए। इसके लिए छह माह पहले प्रदेश सरकार द्वारा पशु मेलों के संदर्भ में आए नए आदेशों की पालना करने की बजाए दस साल पुराने आदेशों के मार्फत ही इस सारे गोरखधंधे को अंजाम दे दिया गया है। ऐसे में इस पूरे मामले में जिला प्रशासन के कई बड़े अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है। उधर जिला उपायुक्त और डीडीपीओ सब कुछ नियमानुसार ही होने की बात कह रहे हैं। लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में जारी किए निर्देशों को धता बताया गया है।
डीसी की अध्यक्षता में गठित कमेटी को जानकारी ही नहीं, करवा दिए टेंडर
नवंबर 2017 में प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश के जिला उपायुक्तों को आदेश जारी किया था कि पशु मेलों से संबंधित कमेटी बनाई जाए, जिसके चेयरमैन उपायुक्त खुद होंगे। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक, एडीसी, जिला मुख्यालय का एसडीएम, जिला परिषद चेयरमैन, आरटीए सचिव, पशुपालन विभाग के उपनिदेशक, जिला पंचायत एवं विकास विभाग अधिकारी और जिले में पशुओं के संदर्भ में काम कर रही संस्थाओं के दो सदस्यों को शामिल किया गया था। इसके लिए विधानसभा में सरकार ने हरियाणा कैटल फेयर्स एक्ट 1970 में बदलाव भी किया था। जिले में पशु मेले के संचालन और लगाने से संबंधित सभी प्रकार के सुझाव इस कमेटी ने देनेे थे। लेकिन पिछले पांच माह में इस कमेटी की एक बैठक भी नहीं हुई और जिला विकास एवं पंचायत विभाग ने बैठक से पहले ही पशु मेले से संबंधित टेंडर करवा दिए।
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कमेटी सदस्यों ने जताया ऐतराज तो टेंडर के दिन शामिल होने का भेजा गया पत्र
खंड पंचायत एवं विकास कार्यालय के सूत्रों की मानें तो टेंडर प्रक्रिया शुरू होने से पहले सरकार द्वारा गठित कमेटी के कुछ गैर अफसरी सदस्यों को इसकी भनक लग गई और उन्होंने बिना कमेटी की बैठक के इस तरह टेंडर जारी करने पर सवाल खड़े किए। ऐसे में आनन-फानन में उन्हें एक पत्र जारी कर दिया गया कि फतेहाबाद में पशु मेले के 2018-19 के लिए पेयजल, लोडिंग-अनलोडिंग, टैंट आदि के लिए टेंडर जारी होने हैं, चूंकि वो डीसी द्वारा गठित कमेटी के सदस्य हैं, इसलिए वो भी इस बैठक में शामिल हों।
टेंडर अलाट होने के बाद एक साल तक तब्दीली नहीं करवा सकेंगे अधिकारी
साल 2018-19 के लिए पशु मेले से संबंधित सभी प्रकार के टेंडर जारी हो चुके हैं और बाकायदा अलाट भी किए जा चुके हैं। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जाचनकारी के अनुसार ‘अमर उजाला’ द्वारा इस मामले की पड़ताल शुरू करने की जानकारी मिलते ही अब जिला प्रशासन अगले एक-दो दिन में इस विशेष कमेटी की बैठक करने की तैयारी में है ताकि पिछले चार-पांच माह में कोई बैठक ना होने के दाग से बचा जा सके। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जब एक साल के लिए टेंडर अलाट ही हो गए हैं तो अधिकारी किस हक से जारी हो चुके टेंडर में बदलाव करेंगे। ऐसा करने पर ठेकेदार का विरोध भी संभव है।
54 लाख में छूटा फतेहाबाद पशु मेले के टेंट, पेयजल और लोडिंग का ठेका
पशु मेले में टेंट आदि के लिए बोली के बाद ठेके दे दिए गए हैं। यह ठेके लाखों रुपये में छूटे हैं। पशु मेले में टेंट का ठेका 19 लाख रुपये में छूटा है, इसे जोगेन्द्र पुत्र कृष्ण कुमार निवासी भैणी महाराजपुर ने लिया है। इस प्रकार पानी का ठेका 15 लाख रुपये में छूटा और यह गिरधारी एसोसिएट्स हिसार के नाम आया है। इसी प्रकार लोडिंग अनलोडिंग का ठेका 20 लाख रुपये में छूटा और इसे जसबीर पुत्र जगतार सिंह निवासी हिजरावां ने लिया है। बोली के लिए 59 लोगों ने भाग लिया था। इसके अलावा अभी गाडिय़ों की पाकर्ग़ि आदि को लेकर स्थिति साफ नहीं है क्योंकि ये जगह हुडा के तहत आती है लेकिन चूंकि ठेका खंड विकास एवं पंचायत विभाग की ओर से है तो पार्किंग का ठेका भी उनकी तरफ से होता है या नहीं, इस पर स्थिति साफ होनी अभी बाकी है। इस मेले में प्रति सप्ताह तकरीबन 4 से पांच सौ गाड़ियां आती हैं।
वर्जन
डीसी की अध्यक्षता में गठित कमेटी सिर्फ सलाह दे सकती है लेकिन पशु मेले के आयोजन की पूरी जिम्मेदारी खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय के साथ साथ पशु मेला अधिकारी की है। हमने टेंडर प्रक्रिया के लिए आवश्यक सभी नियमों का पालन किया है और उसी अनुसार टेंडर अलाट किया गया है।
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राजेश खोथ, जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी, फतेहाबाद।
सरकार के आदेश आने के बाद फतेहाबाद जिले में विशेष कमेटी बनाई गई है लेकिन दुर्भाग्यवश अभी तक इसकी बैठक नहीं हो पाई है। वैसे भी हमने इस कमेटी के माध्यम से पशु मेले के आयोजन संबंधी सुझाव ही देने थे, वो बैठक आयोजित करके दे ही देंगे। टेंडर प्रक्रिया को रुकवाने का अधिकार जिला प्रशासन के पास नहीं है।
- डा. हरदीप सिंह, जिला उपायुक्त, फतेहाबाद।
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