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%अब किसानों ने खेतों में लगा दी है धारा-144, अपनी जिम्मेदारी पर खेतों में घुसें अफसर’

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद।
पराली जलाने पर सरकारी प्रतिबंध से भड़के किसानों ने अब अधिकारियों के साथ आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। सोमवार को फतेहाबाद में आयोजित किसान महापंचायत में किसानों ने अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी है कि पराली मुद्दे पर खेतों में पहुंचने वाले अधिकारी अपनी जान के जिम्मेदार खुद होंगे। इतना ही नहीं, महापंचायत के बाद किसानों ने शहर में रोष मार्च निकाला। इसके बाद लघु सचिवालय के सामने सड़क जाम कर सरकार का पुतला फूंका। महापंचायत की अध्यक्षता किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष गुरबचन सिंह व शहीद भगत सिंह नौजनवान के हरियाणा, पंजाब प्रभारी मनदीप नथवान ने की।
इससे पहले महापंचायत में किसानों ने एकसुर में सरकार द्वारा पराली के निष्पादन की समस्या का हल किए बगैर किसानों पर मुकदमे दर्ज करने के फरमान पर गहरा रोष जताया। इस मौके पर किसान मजदूर एकता मंच के प्रधान कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया, स्वामी नाथन संघर्ष समीति ऑल इंडिया प्रधान विकल पचार, इन्द्रजीत सिंह, धर्मपाल जाखल, करनैल सिंह, रमेश बैनीवाल, डॉ. सतनाम सिंह ने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि वे पराली को आग नहीं लगाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इससे पहले सरकार किसानों को पराली निष्पादन का कोई विकल्प तैयार करके दे। कोर्ट ने पराली न जलाने को लेकर जो गाइडलाइन जारी की है, उससे पहले सरकार ने किसानों को पराली की निष्पादन के लिए यंत्र दिए जाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन सरकार किसानों को कोई यंत्र नहीं दे रही है।
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उन्होंने मांग रखी कि सरकार किसानों को पराली न जलाने की एवज में 8 हजार प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दे। उन्होंने कहा कि किसानों पर सरकार अत्याचार कर रही है, मगर किसान सरकार के किसान विरोधी फैसले का डटकर सामना करेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती तो 21 नवंबर को झाड़ साहब में पूरे प्रदेश के किसानों की महापंचायत आयोजित की जाएगी। इसमेें किसान विरोधी फैसलों के विरुद्ध आगामी रणनीति बनाई जाएगी।
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इस अवसर पर किसान नेताओं ने स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की मांग की और किसानों पर पराली जलाने के नाम दर्ज किए गए मुक दमों को खारिज करने की भी मांग रखी। इस मौके पर मंदीप नथवान सहित अन्य किसान नेताओं ने एक बार फिर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जिस प्रकार अधिकारी धारा 144 लागू कर किसानों को लघु सचिवालय में आने से रोकते हैं, उसी प्रकार किसानों ने भी अपने खेतों में देसी धारा लागू कर दी है। अगर कोई अधिकारी किसान के खेत में घुसता है तो उसके लिए वह अधिकारी ही अपने नुकसान का जिम्मेदार होगा। इस मौके पर संतोख सिंह, सुखदेव सिंह, मुकेश, अंग्रेज सिंह, जगदीप सिंह, हरदीप, परविन्द्र, मांगेराम, गोधासिंह, सुखदेव सिंह, बलवंत सिंह, ओमप्रकाश, प्रगट सिंह, रामरत्न, सुरजीत, कुलदीप, प्यारा सिंह, निर्मल सिंह, रविन्द्र सिंह, रामस्वरूप, भालसिंह, कृष्ण लाल आदि मौजूद थे।
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