मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण की अनिवार्यता ने जिले के हजारों किसान परिवारों को परेशानी में डाल दिया है। सरकार के आदेशानुसार केवल उन्हीं किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ दिया जाएगा, जो पोर्टल पर पंजीकरण करवा चुके हैं। 20 मार्च पंजीकरण की अंतिम तारीख थी। अब तक जिले के 14 हजार किसान परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने पंजीकरण नहीं करवाया।
कृषि विभाग ने फैमिली आईडी के हिसाब से आंकड़े जुटाए हैं, जिसके मुताबिक जिले में 49400 किसान परिवार हैं। किसी परिवार में एक किसान है तो किसी में दो या इससे ज्यादा। कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 20 मार्च यानी अंतिम तिथि तक 36140 किसान परिवारों का पंजीकरण हो चुका है। ऐसे में बचे हुए करीब 14 हजार किसान परिवार अभी तक पंजीकरण नहीं करवा पाए। यह कुल संख्या का लगभग 28 फीसदी है।
टोहाना में वंचितों की संख्या ज्यादा
पंजीकरण से वंचित किसान परिवारों की संख्या टोहाना खंड में ज्यादा है। पोर्टल से जुड़ी खामियों को लेकर टोहाना क्षेत्र के किसानों की शिकायतें ज्यादा रही है। टोहाना खंड में सिर्फ 6800 किसानों का पंजीकरण हुआ है, जबकि वहां किसानों की संख्या 10 हजार से ज्यादा है। कृषि विभाग का कहना है कि पोर्टल पर जमीन का रिकॉर्ड अपलोड होने में दिक्कत आई है। इसके लिए राजस्व विभाग को लिखा गया है।
पंजीकरण के अभाव में आएंगी परेशानियां
सरकार साफ कह चुकी है कि फसल का ब्योरा न देने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे में इन 14 हजार किसान परिवारों के लिए अनाज बेचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। किसानों को उम्मीद ये भी है कि पंजीकरण की अंतिम तारीख शायद बढ़ जाए। मगर 22 मार्च तक कृषि विभाग के पास इस संदर्भ में कोई नोटिफिकेशन नहीं आया। जबकि अप्रैल के प्रथम सप्ताह में गेहूं की आवक मंडी में शुरू हो जाती है। इसके अलावा सब्सिडी जैसे अन्य कई लाभ भी पंजीकरण के अभाव में नहीं मिलेंगे।
कोट
पंजीकरण की 20 मार्च अंतिम तिथि थी। बचे हुए किसान परिवारों का क्या रहेगा, अभी नई अधिसूचना नहीं आई। नियम यही है कि पंजीकरण के बगैर न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा।
-राजेश सिहाग, कृषि उप निदेशक।