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तीन दिन से जारी बरसात का सिलसिला आज थमने के आसार, धान पर मंडराया बीमारी का खतरा

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद। पिछले तीन दिनों से लगातार चल रही बारिश से धान की फसल के खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। तेज हवाओं से नीचे गिरी धान की बालियां अभी भी जमीन पर बिछी हुई हैं। धान की बालियों को देखकर किसान भी परेशान हैं। सोमवार को भूना, जाखल व टोहाना के गांवों में बरसात होती रही। सोमवार को टोहाना में 20 एमएम, रतिया में 6 एवं फतेहाबाद में 12 एमएम बारिश रिकार्ड की गई है। धान की अगेती बासमती किस्म को लेकर किसान काफी उत्साहित थे, वजह थी कि धान का शुरुआती तौर पर ही 25 सौ रूपये प्रति क्विंटल का भाव निकलना। इस बार अपेक्षाकृत बीमारी कम लगने से किसान की लागत में भी काफी कमी थी, लेकिन जब धान की फसल पककर तैयार थी तो ऐन मौके पर मौसम ने करवट ली और तेज बरसात से तीसरे दिन भी फसल भीगती नजर आई। इसी तरह नरमे की फसल पर भी इस बार बारिश ने काफी प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
जिले में कुल 1 लाख 19 हजार हेक्टेयर भूमि पर रोपाई की गई धान की फसल में आधे से ज्यादा बासमती किस्म की वैरायटी है जो आमतौर पर परमल से एक माह पहले ही मंडियों में आ जाती है। हाल ही में ये वैरायटी मंडियों में आनी शुरू हुई थी लेकिन इस सप्ताह कटने को तैयार फसल पर प्रकृति की मार पड़ी और अब खेतों में ही फसल बिछी पड़ी है। परमल चावल को आने में अभी एक माह का समय लगेगा, इसलिए इस वैरायटी पर कोई खास नुकसान की आशंका नहीं है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एक दो दिन में मौसम खुलने के बाद परमल धान की फसल पर बीमारी की कोई संभावना नहीं रहेगी जबकि बासमती किस्म पर अभी भी बीमारी का खतरा बरकरार रहेगा।
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कई जगह जलभराव की स्थिति
उधर बारिश के चलते शहर में भी कई जगह जलभराव की स्थिति है। जवाहर चौक, बीघड़ रोड, सरकारी अस्पताल रोड, थाना रोड पर कई जगह जलभराव की स्थिति रही और वाहनों को इसमें से निकलने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके अलावा सड़कों में कई जगह गढ्ढों में भी पानी भरने के कारण लोगों को पैदल निकलने में भी दिक्कतें उठानी पड़ी। हालांकि राहत की बात ये है कि मंगलवार को मौसम विभाग ने बारिश ना होने की संभावना जताई है। इसके चलते किसानों की फसल और शहरवासियों को परेशानी से निजात मिलने की उम्मीद बंध गई है।
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