फतेहाबाद।
गुरुग्राम के रायन स्कूल में नन्हे प्रद्युमन के साथ हुई वारदात के बाद जिस अंदाज में प्रदेश और जिले की सरकारों ने तेजी दिखाते हुए तरह-तरह के आदेश जारी किये थे, आज उस वारदात के एक माह बाद वो प्रशासनिक दावे एक-एक करके कागजी साबित होते जा रहे हैं। खासकर स्कूल वैनों के ड्राइवरों और कंडक्टरों की जांच के दावों की पोल इस बात से खुल जाती है कि पिछले एक माह से आरटीओ दफ्तर में विभिन्न स्कूलों के ड्राइवरों और कंडक्टरों के लाइसेंस के कागजात जांच के लिए पड़े हैं । लेकिन अभी तक आरटीओ दफ्तर से इन दस्तावेजों की वैरिफिकेशन या जांच तक नहीं की जा सकी है। लाइसैंस की जांच के बाद ही पुलिस वैरिफिकेशन का प्रोसेस शुरू होना था लेकिन अब वो भी ठप्प पड़ा है। शायद किसी अन्य हादसे के बाद ही जिला प्रशासन के लापरवाह अधिकारी और कर्मचारी इस ओर ध्यान देंगे।
एक माह से आरटीओ दफ्तर में उलझे लाइसेंस वैरिफिकेशन कागज
स्कूल संचालकों की मानें तो गुरुग्राम हादसे के बाद जब स्कूल वैन ड्राइवरों और कं डक्टरों की वैरिफिकेशन की बात सामने आई तो विभाग की ओर से इनकी जांच के आदेश जारी किए गए। इसके लिए पुलिस विभाग ने पहले स्कूल संचालकों को आदेश दिए कि वे पहले आरटीओ दफ्तर से इन ड्राइवरों और कंडक्टरों के लाइसेंस वैरिफाई करवाएं। इस पर स्कूल संचालकों ने अपने-अपने स्तर पर स्कूल बस ड्राइवरों और कडंक्टरों के लाइसेंस वैरिफिकेशन के लिए कागजात जमा करवा दिए। आरटीओ दफ्तर के सूत्रों की मानें तो अब तक 25 से 30 स्कूलों से भी ज्यादा स्कूल प्रबंधनों की ओर से अपने-अपने ड्राइवर और कडंक्टरों के लाइसेंस वैरिफिकेशन के कागजात आरटीओ दफ्तर में जमा करवा दिए हैं लेकिन अभी तक इस संदर्भ में किसी प्रकार की कोई कार्यवाही ही नहीं हुई है।
जिले में 3 सौ से अधिक स्कूल, साढ़े 7 सौ के करीब हैं स्कूल बसें
फतेहाबाद जिले में निजी स्कूलों की संख्या लगभग 3 सौ के करीब हैं। इन स्कूलों में कुल साढ़े 7 सौ से अधिक स्कूल बसें हैं। जिसमें फुल बस, के अलावा ट्रैवलर बस, टाटा ऐस आदि गाड़ियां भी शामिल हैं। एक बस पर आमतौर पर दो कर्मचारी रहते हैं जिनमें ड्राइवर और कडंक्टर शामिल हैं। इस प्रकार जिले में लगभग 15 सौ से लेकर 2 हजार के करीब स्कूल बस ड्राइवर और कंडक्टर हैं। इन्हीं के लाइसेंस और अन्य कागजातों की वैरिफिकेशन आरटीओ दफ्तर में पैडिंग है।
अनफिट बसों में सफर कर रहे बच्चे, चालान काटने तक सिमटे आरटीओ के अफसर
स्कूल बसों से जुड़ी सभी खामियों के लिए आरटीओ दफ्तर की ही जिम्मेदारी बनती है लेकिन इस विभाग का स्कूल बसों की ओर ध्यान कम ही जा रहा है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी अंजु आर्या ने स्कूल बसों में कमियां देखी थीं, कुछ बसों के चालान काटे गए। इससे पहले पिछले छह माह में ट्रैफिक और आरटीए दफ्तर ने लगभग 88 से करीब स्कूल बसों के चालान काटे हैं। 11 बसों को इंपाउंड भी किया गया है। लेकिन इस दौरान एक भी ड्राइवर या कडंक्टर का लाइसेंस वैरिफाई करने तक का प्रयास नहीं किया गया।
वर्जन
जिला प्रशासन के निर्देशों के आधार पर ही हमने अपने सभी स्कूल बसों के ड्राइवर-कंडक्टरों के लाइसेंस वैरिफिकेशन के लिए आरटीओ कार्यालय में कागज जमा करवाए हैं। लेकिन लंबा समय बीतने के बावजूद अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। लाइसेंस वैरिफिकेशन के बाद ही पुलिस विभाग अपनी वैरिफिकेशन कराएगा।’
अमित मक्कड़, निदेशक, अपैक्स कान्वेंट स्कूल, फतेहाबाद
ये गंभीर मसला है। इन दिनों अवकाश चल रहे हैं, अवकाश के बाद पहले वर्किंग डे पर मैं इस खुद मसले को देखूंगा। इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हरदीप सिंह, उपायुक्त, फतेहाबाद
20एफटीबीपी10 : फतेहाबाद के एक स्कूल की बस में सीढ़ियों पर खड़ा कडंक्टर । (फाइल फोटो)
20एफटीबीपी11 : अमित मक्कड़, निदेशक, अपैक्स कान्वेंट स्कूल, फतेहाबाद ।
20एफटीबीपी12 : हरदीप सिंह, उपायुक्त, फतेहाबाद ।