चूहों के बिलों से चंद्रावल माइनर में आई 30 फीट चौड़ी दरार, दो किसानों की 800 क्विंटल धान खराब, 24 लाख का नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
भूना। मंगलवार सुबह भूना के नजदीक से गुजर रही चंद्रावल माइनर में 30 फुट चौड़ी दरार आ गई जिसके चलते आसपास के दो किसानों के खेतों में निकाला गया धान पानी में भीग गया। इस घटना में दो किसानों ने 24 लाख रुपयों का नुकसान होने की आशंका जताते हुए मुआवजे की मांग की है। पीड़ित किसानों ने सिंचाई विभाग के खिलाफ गहरा रोष प्रकट किया है। किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। किसान धर्मपाल और सुशील का आरोप है कि माइनर को पाटने में देरी की गई जिसके कारण उनकी फसल पानी से बर्बाद हो गई। किसानों ने माइनर को पाटने के लिए भरसक प्रयास किया। किंतु पानी के तेज बहाव के कारण किसान बेबस नजर आए। घटना के दो घंटे की देरी के बाद पहुंचे सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जेसीबी मशीन व दर्जनों मजदूरों की सहायता से माइनर को पाटने का कार्य शुरू किया। लेकिन जब तक माइनर को पाटा गया तब तक किसानों की मेहनत पर पानी फिर चुका था।
चंद्रावल माइनर की बुर्जी नंबर 30800 राइट दिशा की तरफ मंगलवार की सुबह जैसे ही माइनर में पानी आया तो चूहों के बिल के कारण पटरी में दरार आ गई। जिसको देखकर किसान धर्मपाल का कहना है कि उसने सुबह पौने 4 बजे सिंचाई विभाग के बेलदार सतबीर सिंह व संजय कुमार को सूचना दी। इसके अतिरिक्त किसान ने विभाग के उपमंडल अधिकारी मदन लाल मित्तल को भी टेलीफोन के द्वारा अवगत करवाया और मौके पर पहुंचकर किसानों के लिए मदद के लिए गुहार लगाई। अधिकारियों के पहुंचने से पहले आसपास के दर्जनों किसानों ने अपने स्तर पर दरार को पाटने के लिए कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। पानी का तेज बहाव के चलते निकाले हुआ धान बह गया और तीन दिन पहले गेहूं की बिजाई की गई फसल भी नष्ट हो गई। सूचना के बाद कनिष्ठ अभियंता ललित सिंगला ने मौके पर पहुंचकर मजदूरों की सहायता से जेसीबी के द्वारा माइनर को दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद काबू पा लिया गया ।
ये हुआ नुकसान
गांव कानीखेडी के किसान धर्मपाल ने प्रति एकड़ 50 हजार रुपये ठेके पर जमीन लेकर धान की फसल की पैदावार की थी। फसल निकालकर जमीन पर रखी हुई थी जो माइनर के टूटने के कारण पानी में बह गई। किसान ने बताया कि लगभग सवा छह सौ क्विंटल पानी से खराब हो गया है। दूसरे किसान सुशील पुत्र बनवारी लाल के 7 एकड़ की सवा सौ क्विंटल धान पानी की भेंट चढ़ गया । इससे दोनों किसानों को लगभग 24 लाख रुपयों का नुकसान हुआ है। वहीं मात्र दो दिन पहले 15 एकड़ में बिजाई की गई गेहूं की फसल पानी में डूब गई जिससे किसान की फसल भी नष्ट हो गई है। किसानों ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंप कर नुकसान की भरपाई सिंचाई विभाग से करवाने की गुहार लगाई है ।
मंगलवार की सुबह साढे़ 4 बजे के करीब उनको माइनर टूटने की सूचना मिली थी। जिसके तुरंत बाद मजदूरों और जेसीबी मशीन को मौके पर भेजकर माइनर को पाटने का कार्य शुरू हुआ जो 2 घंटों की कड़ी मेहनत के बाद पानी के तेज बहाव पर काबू पाकर माइनर की दरार को पाट दिया गया है।
- ललित सिंगला, कनिष्ठ अभियंता, सिंचाई विभाग।