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महीनों बाद खुलते ही फिर विवादों में पशु मेला, नए नियम से भड़के पशु व्यापारी, हंगामा

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद। फतेहाबाद में प्रत्येक रविवार को लगने वाले पशु मेले में अधिकारियों द्वारा अपनाए जा रहे तानाशाही रवैये से पशु व्यापारियों में रोष है। भूना रोड बाईपास पर हर रविवार लगने वाले पशु मेला को प्रशासन ने पिछले काफी समय से बंद कर रखा था। पशु व्यापारियों की मांग को देखते हुए कई माह के बाद आखिरकार प्रशासन ने रविवार को नई शर्तों के साथ फिर से मेला शुरू करवा दिया। प्रशासन ने पशु मेला तो शुरू करवा दिया लेकिन व्यापारियों के लिए मेले में पशुओं की खरीद-बेच को लेकर लागू किए गए नए नियम पशु व्यापारियों के लिए मुसीबत बन गए है।
भूना रोड बाईपास पर रविवार को लगे पशु मेले के दौरान व्यापारियों ने प्रशासन द्वारा थोपे गए नियमों के खिलाफ हंगामा किया और नारेबाजी शुरू कर दी। इसके चलते मेले में पशु खरीद-बेच का काम भी ठप रहा। मेले स्थल पर हंगामा करने के बाद पशु व्यापारी लघु सचिवालय उपायुक्त से मिलने भी पहुंचे लेकिन उपायुक्त के न मिलने के कारण उन्हें लौटना पड़ा। हंगामे के दौरान पशु व्यापारियों ने फतेहाबाद के बीडीपीओ पर पंजाब के फग्गु में लगने वाले मेले के व्यापारियों से सांठ-गांठ कर फतेहाबाद के पशु मेले को फेल करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। पशु व्यापारियों सुभाष, रमेश, रामकुमार आदि ने आरोप लगाते हुए कहा कि पशु व्यापारियों के लंबे संघर्ष के बाद प्रशासन ने दोबारा पशु मेले को शुरू करवाया है। अधिकारी फतेहाबाद मेले को नियमों व गर्मी का हवाला देकर बंद करवा देते हैं जबकि दूसरे शहरों में पशु मेले धड़ल्ले से चल रहे हैं।
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इन नियमों का विरोध कर रहे पशु व्यापारी
पशु व्यापारियों ने प्रशासन द्वारा थौंपे गए नए नियमों का विरोध करते हुए बताया कि मेले में पहले कोई एंट्री फीस नहीं थी लेकिन अब पशु के प्रवेश करने पर प्रशासन ने 100 रुपये एंट्री फीस रख दी है जोकि गलत है। इसी तरह पशु बेचने पर पहले 50 रुपये फीस सरकार के खाते में जाती थी लेकिन अब इस फीस को बढ़ाकर कुल कीमत का 4 फीसदी कर दिया है, जो पशुपालक के साथ धोखाधड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीडीपीओ द्वारा यह सब फतेहाबाद पशु मेले को फेल करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस पशु मेले से पशु पालकों के साथ-साथ करीब एक हजार लोगों का रोजगार चल रहा है। व्यापारियों का कहना है कि पशुओं की खरीद-फरोख्त करना ही उनका मुख्य रोजगार है, लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण उनका रोजगार ठप्प हो गया है। उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि नई शर्तों को वापिस लेकर पुराने तरीके से ही चलाया जाए ताकि पशु पालकों व पशु व्यापारियों को नुकसान न हो। पशु व्यापारियों ने समस्या का समाधान न करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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यह कहना है बीडीपीओ का
इस बारे जब बीडीपीओ सोमवीर कादियान से बात की गई तो उन्होंने सरकार के नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए बताया कि सरकार द्वारा 29 जून को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार प्रति पशु 100 रुपये एंटरी फीस निर्धारित की गई है। 2 साल से अधिक आयु के पशु की बिक्री पर कम से कम 1 हजार रुपये व अधिकतर कुल राशि का 4 प्रतिशत फीस ली जाएगी। इसके अलावा 2 साल से कम उम्र के पशुओं की बिक्री पर कम से कम 300 रुपये व अधिकतम कुल राशि का 4 प्रतिशत फीस ली जाएगी। पशु व्यापारियों द्वारा लगाए गए रिश्वत के आरोपों पर उन्होंने इसको लेकर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।
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