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दहेज की जगह सिर्फ 11 पौधे लेकर प्रेरणा बने चंद्रमोहन

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पौधों के साथ नवविवाहित चंद्रमोहन शर्मा व पूजा। - फोटो : Fatehabad
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गांव कुम्हारिया के चंद्रमोहन शर्मा ने अपनी शादी में दहेज को नकारते हुए सिर्फ 11 पौधे लेकर दूसरों के लिए प्रेरणा बनने का काम किया है। परिजनों का दावा है कि इस क्षेत्र में पहली बार ऐसा हुआ है कि दहेज को नकारते हुए सिर्फ 11 पौधे लेकर शादी संपन्न करवाई गई हो। हिसार के एक कोचिंग संस्थान में अध्यापक चंद्रमोहन की शादी राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की तहसील टिब्बी के गांव बेरवाला में वेदप्रकाश की बेटी पूजा से हुई है। चंद्रमोहन ने बताया कि उनके पिता राजेंद्र शर्मा के पास सात एकड़ जमीन हैं। वे खुद एसएससी की तैयारी करने के साथ हिसार स्थित एकेडमी में अध्यापक है। शिक्षा ग्रहण करते समय उनके गुरुजनों ने बताया था कि दहेज लेना गलत है। ऐसे में उन्होंने इसे अपने जीवन में उतार लिया। शादी में वधू पक्ष की ओर से दो लाख रुपये नकद व लाखों रुपये का घरेलू सामान दिया जा रहा था मगर उन्होंने दहेज लेने से मना कर दिया। इसके बदले में उन्होंने 11 छायादार व फलदार पौधे ही लिए। चंद्रमोहन के पिता राजेंद्र व चाचा कैलाश शर्मा ने बताया कि समाज में दहेज अभिशाप बन गया है। इसी अभिशाप को वर पक्ष के लोग ही खत्म कर सकते है। उन्होंने एक प्रयास किया है ताकि दहेज के चलते लोग बेटियों को बोझ न समझें। बेटियां परिवार परिवार का नाम हमेशा ही रोशन करती है। अब युवाओं को आगे बढ़कर इसमें बदलाव लाना होगा।
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चंद्रमोहन का कहना है कि समाज के लिए अभिशाप बन चुकी दहेज जैसी कुरीति को मिटाने के लिए खुद से ही शुरुआत करनी होगी। यही सीख वह अपने विद्यार्थियों को देते हैं। बहुत से युवा अब बदलाव ला रहे है। मैंने भी प्रयास किया है। दहेज के चलते किसी भी लड़की को परेशानी नहीं आनी चाहिए।
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