10वीं के रिजल्ट ने इस बार भी बेहतर शिक्षा देने के शिक्षा विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी है। इस बार के सरकारी स्कूलों के बदहाल रिजल्ट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में 25 ऐसे स्कूल रहे जिसमें 20 प्रतिशत बच्चे भी पास नहीं हो पाए।
इतना ही नहीं, इनमें भी 6 स्कूल ऐसे हैं जिनका रिजल्ट 10 प्रतिशत से भी कम रहा है। दसवीं के रिजल्ट की औपचारिक रिपोर्ट शिक्षा विभाग के पास पहुंच चुकी है और अब विभाग के अधिकारी इस रिपोर्ट पर माथापच्ची कर बेकार रिजल्ट के कारण जानने में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि शिक्षा विभाग ऐसे स्कूलों पर कार्यवाही का मन बना चुका है। इसके साथ ये भी तय है कि गर्मियों की छुट्टियों के बाद बेकार रिजल्ट वाले स्कूलों के मुखियाओं को कारण बताओ नोटिस भेजकर जवाब मांगा जाएगा।
इन स्कूलों का रहा 20 प्रतिशत से भी कम रिजल्ट
स्कूल कुल परीक्षार्थी पास री अपीयर प्रतिशत
राजकीय हाई स्कूल 89 4 85 4.49
जीएसएसएस, एमपी सोतर 67 4 39 5.97
जीएसएसएस, लधवास 16 1 7 6.25
राजकीय हाई स्कूल, दिवाना 21 2 19 9.52
जीएसएसएस, कंहडी 40 4 36 10
राजकीय हाई स्कूल, खाराखेड़ी 33 4 29 12.12
राजकीय हाई स्कूल, भड़ोलावाली 29 4 25 13.79
राजकीय हाई स्कूल, कुलां 47 7 40 14.89
जीएसएसएस, रतिया(बी) 100 15 85 15
राजकीय हाई स्कूल, दैयड़ 52 8 44 15.38
जीएसएसएस, नन्हेंडी 32 5 27 15.62
जीएसएसएस, बलियाला 83 13 70 15.66
जीएसएसएस, महमड़ा 51 8 43 15.68
जीएचएस, लाली 43 7 36 16.27
जीएसएसएस, करंडी 55 9 46 16.36
जीएसएसएस, भूना 67 11 56 16.41
जीएसएस, बोसवाल 24 4 20 16.66
राजकीय स्कूल, धारनिया 41 7 25 17.07
जीएचएस, फूलां 23 4 19 17.39
जीएसएसएस, धौलू 50 9 41 18
जीएसएसएस, टोहाना 92 17 75 18.48
जीजीएसएसएस, टोहाना 211 39 172 20.4
जीएसएसएस, कमाना 49 10 39 20.4
राजकीय हाई स्कूल, बीराबदी 39 8 31 20.51
इन स्कूलों का रिजल्ट रहा 80 प्रतिशत से अधिक
स्कूल परीक्षार्थी पास री अपीयर पास प्रतिशत
राजकीय हाई स्कूल, कुकडावाली 12 10 2 83.31
राजकीय हाई स्कूल, मोचीवाली 19 16 3 84.21
जीएसएसएस, बादलगढ़ 52 44 8 85.61
राजकीय हाई स्कूल, चंद्रावल 21 18 3 85.71
आरोही स्कूल, कंहडी 32 28 4 87.5
क्या कहते हैं शिक्षाविद्:
दसवीं कक्षा से पहले कोई बोर्ड नहंीं है जिसके कारण विद्यार्थी पढ़ाई को लेकर नहीं गंभीर नहीं होते। पहले पांचवी तथा आठवीं कक्षा की परीक्षा बोर्ड के अधीन थी। इस दौरान विद्यार्थी सीरियस होकर पढ़ते थे। बोर्ड टूटने के कारण फेल होने का भय खत्म हो गया है। दसवीं कक्षा में आते ही सीधा बोझ पढ़ता है। यही कारण हैं कि दसवीं कक्षा में विद्यार्थी ज्यादा फेल होते हैं।
वीना भ्याणा, शिक्षाविद्
पांचवी और आठवीं से बोर्ड हटाना गलत
दसवीं का रिजल्ट कम आने के पीछे मेन कारण यही है कि दसवीं से पहले कोई बोर्ड न होना। पांचवी व आठवीं कक्षा से बोर्ड हटाना गलत निर्णय है। रिजल्ट की चिंता न होने के कारण अध्यापक ढंग से पढ़ाते नहीं है और विद्यार्थी पढ़ते नहीं।
देवेंद्र दहिया, शिक्षाविद्
जिन स्कूलों का 20 प्रतिशत से कम रिजल्ट रहा है उन्हें चेतावनी दी जाएगी और स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। किसी अध्यापक की लापरवाही सामने आने पर उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
दयानंद सिहाग, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद