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चार साल से अपने डेब्यू फुटबाल मैच और शुभारंभ का इंतजार कर रहा फतेहाबाद का पहला और इकलौता एस्ट्रोटर्फ मैदान

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अमित रूखाया
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फतेहाबाद। 14 जून से शुरू होने वाले फीफा वर्ल्ड कप की जहां पूरी दुनिया में खुमारी छाई हुई है और खिलाड़ियों में उत्साह देखा जा रहा है वहीं फतेहाबाद के फुटबॉल मैदान को अपने डेब्यू मैच का इंतजार है। इस अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मैदान बनने की घोषणा के साथ दरियापुर में स्थित जिस फुटबाल अकादमी का शिलान्यास पूर्व की कांग्रेस सरकार ने किया था, मौजूदा बीजेपी सरकार ने चार साल बीतने के बावजूद उस शानदार फुटबॉल मैदान को अपना डेब्यू मैच तक खेलने का मौका नहीं दिया है। मैच तो छोड़िये, आज तक इस फुटबॉल मैदान का शुभारंभ तक नहीं किया गया है। लगभग 13 करोड़ की लागत से बने दरियापुर स्थित फुटबॉल अकादमी में जिले का पहला एस्ट्रोटर्फ फुटबॉल मैदान है। लेकिन अफसरी ढिलाई और सरकारी लापरवाही के चलते अब शानदार ग्राउंड की हालत बदतर होती जा रही है। अगर समय रहते इस संभाला ना गया तो जल्द ही जिले के खिलाड़ियों के लिए कभी वरदान बन सकने वाला ये मैदान खंडहर बनने में समय नहीं लगाएगा।
हॉस्टल का निर्माण था प्रस्तावित, अब आधे खर्च के वादे से पीछे हटी प्रदेश सरकार
लगभग छह साल पहले 2012 मेें पूर्व सांसद डा. अशोक तंवर के प्रयासों से केंद्रीय खेल मंत्रालय ने फतेहाबाद जिले में अंतरराष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल अकादमी को मंजूरी दी थी। इसके बाद 7 अगस्त 2012 को तत्कालीन केंद्रीय खेल मंत्री अजय माकन, तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व सांसद रहे डा. अशोक तंवर ने दरियापुर गांव में आकर इस फुटबॉल अकादमी का शिलान्यास किया। इसी मौके पर डा. तंवर के प्रयासों से केंद्रीय खेल मंत्री रहे अजय माकन ने इसे एस्ट्रोटर्फ फुटबॉल मैदान बनाने का भी ऐलान किया। इसी के साथ उन्होंने ऐलान किया कि अगर प्रदेश सरकार आधा खर्च वहन करती है तो केंद्र सरकार इसी फुटबॉल अकादमी के साथ सौ बिस्तर का एक हॉस्टल बनाएगी जिसमें खिलाड़ी रह सकेंगे। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उसी समय हामी भर दी। जिसके बाद 2014 आते आते एस्ट्रोटर्फ फुटबाल मैदान तो शुरू हो गया लेकिन सरकार बदलते ही बीजेपी सरकार ने यहां प्रस्तावित हॉस्टल से अपने कदम पीछे खींच लिए। इसका नुकसान ये हुआ कि ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया और आजतक हॉस्टल ना बनने के कारण फुटबॉल मैदान का भी इस्तेमाल नहीं हो सका।
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टूट चुके हैं जालीदार दरवाजे
दरियापुर स्थित फुटबाल मैदान की बात की जाए तो कहने को सरकार ने इसकी चारदीवारी की थी, लेकिन देखरेख के अभाव में चारदीवारी तो कमजोर हो ही चुकी है। साथ ही एस्ट्रोटर्फ मैदान की सुरक्षा के लिए लगाए गए जालीदार चारदीवारी भी बुरी तरह क्षतिगस्त हो चुकी है। जालीदार चारदीवारी का दरवाजा तो टूट कर अलग हो ही चुका है। अगर समय रहते सरकार ने इसे ना संभाला तो जल्द ही जिले के इकलौते एस्ट्रोटर्फ फुटबाल मैदान पर आवारा पशु आराम फरमाते नजर आएंगे।
सिरसा में हॉकी का एस्ट्रोटर्फ मैदान, तैयार हो रही खिलाड़ियों की शानदार पौध
सिरसा के संतनगर इलाके में हॉकी का एस्ट्रोटर्फ मैदान है, जिसके कारण वहां के खिलाड़ियों को अभ्यास में बहुत मदद मिल रही है। सरदार सिंह सरीखे शानदार खिलाड़ी इसी मैदान से निकले हैं और अभी भी वहां पर खिलाड़ियों की एक शानदार पौध तैयार हो रही है। अगर फतेहाबाद जिले का पहला एस्ट्रोटर्फ मैदान राजनीति की भेंट ना चढ़ता तो शायद फतेहाबाद जिले से भी बेहतरीन फुटबॉल खिलाड़ी निकल सकते थे।
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पूर्व सांसद और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष तंवर ने सरकार को बताया खिलाड़ियों का दोषी
मैंने अपने प्रयासों से केंद्र की यूपीए सरकार से ये फुटबॉल अकादमी पास करवाई थी। प्रदेश सरकार से लगातार बातचीत कर इसके हॉस्टल के लिए आधा खर्च प्रदेश सरकार से हामी भरवाई, लेकिन बीजेपी सरकार हॉस्टल बनवाना तो दूर, जिले के इकलौते छव पहले एस्टोटर्फ मैदान का शुभारंभ तक नहीं कर सकी। ये सरकार खेल विरोधी सरकार है।
- अशोक तंवर, पूर्व सांसद व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष।
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