अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष दलबीर किरमारा ने परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों को सलाह दी है कि वे कंफ्यूजन छोड़कर धरातल पर काम करें। उन्होंने 8200 चालकों-परिचालकों को फिर से अस्थाई मानने व विरोध के स्वर उठने पर कंफ्यूजन शब्द का सहारा लेकर पत्र वापिस लेने के मामले की जांच करवाये जाने व सरकार से ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
एक बयान में दलबीर किरमारा ने कहा कि 21 जनवरी 2014 को तत्कालीन सरकार के मंत्री रहे रणदीप सुरजेवाला की मध्यस्थता से सरकार के साथ हुए समझौते के तहत इन 8200 चालकों-परिचालकों को नियमित करने पर सहमति बनी थी। इसके बाद बनी भाजपा सरकार ने भी 19 जनवरी 2016 को कैबिनेट की बैठक में इन कर्मचारियों को पक्का किये जाने के फैसले पर मोहर लगा दी थी।
हाल ही में विभाग के महानिदेशक ने पत्र जारी करके माननीय सुप्रीम कोर्ट के समान काम-समान वेतन वाले फैसले का हवाला देते हुए इन 8200 कर्मचारियों को अस्थाई मानने से इनकार कर दिया था परंतु इस बात पर गौर नहीं किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही ये कर्मचारी नियमित हो चुके थे और सुप्रीम कोर्ट का फैसला जनवरी 2017 में आया है। ऐसे में अधिकारियों ने अपनी मनमर्जी चलाते हुए कर्मचारियों को मानसिक प्रताडना दी और उन्हें आंदोलन के लिए उकसाया। अधिकारियों के इन आदेशों के विरोध में कई डिपुओं में बस सेवाएं बाधित रही और यात्रियों को परेशानी हुई।
दलबीर किरमारा ने कहा कि शुक्रवार को अधिकारियों ने 8200 चालकों-परिचालकों को अस्थाई मानने का आदेश जारी करने वाला पत्र वापिस ले लिया और कंफ्यूज शब्द का सहारा लिया लेकिन इससे वे अपनी जिम्मेवारी से बच नहीं सकते। उन्होंने मुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री से मांग की कि वे ऐसे कंफ्यूज अधिकारियों की जवाबदेही तय करके उन पर कार्रवाई करें, क्योंकि इस प्रकरण से साबित हो गया है कि रोडवेज कर्मचारियों को आए दिन इस तरह के फैसलों से आंदोलन के लिए बाध्य किया जाता है और जनता में कर्मचारियों को बेवजह बदनाम होना पड़ता है।
उन्होंने आम जनता, छात्र वर्ग एवं प्रबुद्ध वर्ग से अपील की कि वे इस प्रकरण से अधिकारियों की कार्यप्रणाली देख लें ताकि ये न रहें कि रोडवेज कर्मचारी बेवजह आंदोलन करते हैं। इससे पहले अधिकारियों ने अपनी मनमर्जी चलाते हुए 60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों की निशुल्क यात्रा की सुविधा वापिस लेने संबंधी पत्र जारी किया था, जिसमें दो अधिकारी अभी सस्पेंड हैं वहीं मुख्यमंत्री को विधानसभा में भी इस पत्र का खंडन करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के इस तरह के रवैये से रोडवेज कर्मचारी हर समय तनाव में रहता है। बीमार होने पर भी उन्हें छुट्टी देने से मना कर दिया जाता है कि और मात्र 2 या 4 रुपये की टिकट न कटने पर भी अधिकारी कर्मचारी को निलंबित करके इतना शोर मचाते हैं, जैसे उन्होंने बहुत बड़ा घोटाला पकड़ लिया हो। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे अधिकारियों की लगाम खींचे ताकि सरकार बदनामी से बच सकें।