फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेरेल और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के इंतजार में शहर की सवा लाख आबादी

विज्ञापन
विज्ञापन
आज अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या दिवस है। बीते दस साल में फतेहाबाद शहर की जनसंख्या भी 70 हजार से सवा लाख तक पहुंच गई है। जिला बने भी 24 साल बीत गए हैं। मगर मूलभूत सुविधाओं की बात करें तो आज भी शहर का बड़ा तबका जूझ रहा है। बिजली व्यवस्था तो सुधरी है, लेकिन सीवरेज संबंधी समस्या अभी भी बरकरार है। छोटे-छोटे कस्बों में रेलगाड़ियां चल रही हैं, लेकिन फतेहाबाद जिला मुख्यालय का शहर अभी भी रेल चलने का इंतजार कर रहा है। परिवहन सुविधाओं के नाम पर सिर्फ 120 रोडवेज और 90 प्राइवेट बसें हैं। सवा लाख आबादी को रेल के अभाव में रोडवेज या प्राइवेट बसों में छोटी-छोटी दूरी के भी दस गुणा दाम देकर यात्रा करनी पड़ती है।
विज्ञापन

मूलभूत सुविधाओं की यह है स्थिति
बिजली :
शहर में बिजली सप्लाई की व्यवस्था ओवरऑल ठीक है। 24 घंटे बिजली शहरवासियों को मिल रही है। सिर्फ तकनीकी कारणों या फाल्ट आने की स्थिति में ही बिजली गुल होती है। शहर में बिजली पहुंचाने के लिए एक 220 केवी, एक 132 केवी और दो 33 केवी के बिजली घर संचालित हैं।
पानी :
गर्मी के दिनों में नहरबंदी के समय को छोड़कर बाकी समय सुबह और शाम को पेयजल सप्लाई घरों में आती है। मगर सबसे भयावह स्थिति शहर के एकमात्र बसे हुए सेक्टर तीन में हैं। जहां 20 साल से लोग भूमिगत जल ही प्रयोग कर रहे हैं। एचएसवीपी प्रशासन ने अभी तक यहां नहरी पानी की सप्लाई की व्यवस्था नहीं की है। मजबूरन 350 से अधिक परिवारों को नलकूप का पानी पीना पड़ता है।
विज्ञापन

सड़क :
अशोक नगर, भाटिया कॉलोनी, इंद्रपुरा मोहल्ला, चार मरला कॉलोनी, स्वामी नगर, हंस कॉलोनी आदि एरिया ऐसा है, जहां इंटरलॉकिंग गलियां उस समय बनी थी, जब इन कॉलोनियों को विकसित किया गया था। मगर अब ज्यादातर गलियां टूट चुकी हैं। इन गलियों के पुनर्निर्माण की अत्यंत आवश्यकता है।
सार्वजनिक परिवहन :
सार्वजनिक परिवहन के मामले में फतेहाबाद जिला मुख्यालय सिर्फ रोडवेज व प्राइवेट बसों के सहारे ही है। फतेहाबाद शहर में रेल नहीं चलती है। लंबे समय से यहां की जनता रेल चलाने की मांग कर रही है। पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा अग्रोहा-फतेहाबाद को रेलमार्ग से जोड़ने की घोषणा भी की गई थी, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
स्वास्थ्य :
सबसे अधिक संकट स्वास्थ्य को लेकर है। यहां सरकारी अस्पताल में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड के अलावा छोटी सर्जरी की ही व्यवस्था है। बाकी निजी अस्पताल भी बड़े स्तर पर इलाज उपलब्ध नहीं करवा पाते हैं। इसी मजबूरी में लोगों को 50 किलोमीटर दूर हिसार या 200 से अधिक किलोमीटर दूर दिल्ली जाना पड़ता है।
आवासीय संकट :
आबादी बढ़ने के साथ ही लोगों के सामने आवासीय संकट पैदा होने लगा है। संयुक्त परिवार टूटने लगे हैं, जिससे मकानों की संख्या बढ़ाने की जरूरत महसूस होने लगी है। शहर की 50 फीसदी भूमि सिर्फ दस प्रतिशत लोगों की संपत्ति हैं। ऐसे में हालात ये हैं कि पुराने शहर में मकानों की संख्या बढ़ाने के चक्कर में गलियां संकरी हो गई हैं। अधिकांश गलियों में से सिर्फ दुपहिया वाहन ही निकल पाते हैं।
सफाई व्यवस्था :
शहरी आबादी के लिए प्रॉपर्टी टैक्स, यूजर चार्जिज जैसे शुल्क देने के बाद भी बेहतर सफाई व्यवस्था सपना ही बनी हुई है। नगर परिषद प्रशासन सफाई के अच्छे प्रबंध नहीं कर पाया है। स्थिति ऐसी है कि कचरा प्रबंधन प्लांट भी भर गया है, जहां कचरा डालने की जगह कम पड़ गई है। मुख्य रास्तों को डंपिंग प्वाइंट बनाया हुआ है।
अतिक्रमण :
शहर के बाजारों में अतिक्रमण चरम पर है। जीटी रोड के भी दोनों तरफ दुकानों के आगे फुटपाथ तक अतिक्रमण की जद में हैं। अतिक्रमण के कारण सबसे अधिक परेशानी शहर में आने वाले वाहन चालकों को होती हैं। उन्हें पार्किंग के अभाव में जाम में भी जूझना पड़ता है।
कोट
20 साल से सेक्टर तीन के निवासी ट्यूबवेलों का पानी पी रहे हैं। अधिकारियों की अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की कमी के कारण सेक्टर वासियों को नहरी पानी नसीब नहीं हो रहा है। विधायक से लेकर मंत्री व मुख्यमंत्री तक आवाज उठा चुके हैं, फिर भी समस्या बरकरार है।
बलदेव बजाज, प्रधान, आरडब्ल्यूए सेक्टर तीन।
कोट
शहर की आबादी बढ़ने के साथ ही समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं। आवासीय संकट से लेकर सफाई, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की बड़ी जरूरत है। जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को भविष्य की जरूरतों के अनुसार शहर का विकास मॉडल तैयार करना होगा।
हरदीप सिंह, प्रधान, जिंदगी संस्था।
कोट
शहर की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। काफी समस्याओं का समाधान हुआ भी है। सफाई व्यवस्था सुधारने से लेकर अतिक्रमण तक पर नियंत्रण करवाने की पूरी कोशिश रहती है।
विज्ञापन

- डॉ. मुनीष नागपाल, जिला नगर आयुक्त।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें