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मौत के गड्ढों पर सवार है शहर

Thu, 15 Nov 2012 12:57 PM IST
फरीदाबाद/ब्यूरो
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नगर निगम प्रशासन करीब एक हजार करोड़ रुपये का बजट बनाता है। फिर भी शहर गड्ढों में तब्दील है। यूं कहें कि लोग सड़क के रूप में मौत के गड्डों पर सवार हैं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। पिछले दो साल में कई घटनाएं गड्ढों में गिरकर घायल एवं मौत होने की हुई हैं।
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शहर में सड़कें कम, गड्ढे ज्यादा हैं। दिवाली के आसपास रिपेयरिंग के नाम पर करीब 15 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। पर रिपेयरिंग भी बहुत निम्न स्तर की हुई है। कई जगह रिपेयर सड़क उखड़ने लगी है। पानी निकासी के इंतजाम बिना ही सारी सड़कें बना दी गई हैं। ताकि, इन पर बार-बार पानी भरे और सड़क टूटे। फिर सड़क बने, फिर बिल बने और फिर....।  

शहर की कई सड़कों की सूरत देखकर तो लोग यह तक कहने लगे हैं कि सड़कें गड्ढों में बनी हैं। कोई कहता है कि यहां की सड़कों को एडवेंचर मानकर चलिए। कुछ कहते हैं कि ऊंट की सवारी का मजा लीजिए। लेकिन, हकीकत यह है कि नगर निगम की लापरवाही, भारी भ्रष्टाचार के कारण सड़कों पर गड्ढों के रूप में मौत नाच रही है। जनता चिल्लाती रहती है कि सड़क बनाओ, लेकिन निगम अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगती। मांग के बावजूद सड़क मैटीरियल की जांच तक नहीं होती।
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सूरजकुंड रोड पर गड्ढे की वजह से महिला की मौत हो या फिर दो साल पहले डबुआ एवं दो नंबर के बीच से जा रही सड़क पर इसी कारण एक युवती की दर्दनाक मृत्यु। निगम पर कोई असर नहीं पड़ता। यहां रोजाना भ्रष्टाचार की सड़कें बनती हैं। जो घटिया या कम तारकोल की वजह से जल्दी टूटने लगती हैं। सीमेंटेड सड़कों में बनने के साथ ही दरार पड़ जाती है। पार्षद जगन डागर का कहना है कि इस बार सदन में खराब सड़कों का मुद्दा प्राथमिकता से उठेगा।


सड़कों की कहानी
15-12-2009: सेक्टर छह इंडस्ट्रियल एरिया की टूटी सड़क में फंसकर शक्तिशाली वाहन ट्रैक्टर टूट गया।
10-07-2010: जवाहर कॉलोनी में तीन माह पहले बनी सड़क उखड़कर ऐसी हो गई थी कि आप कह नहीं सकते कि यह सीमेंटेड सड़क है। इसलिए किसी ने सीएम सेल में शिकायत भेज दी थी। जानकारी मिलने पर सड़क रिपेयरिंग करने की बात करने गए अधिकारियों को लोगों ने वापस भेज दिया था।
11-07-2010: जवाहर कॉलोनी में घटिया सड़क को दोबारा बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन।
19-10-2011: एनएच-दो-स्वर्गाश्रम रोड बनवाने की मांग को लेकर लोगों ने गांधीगिरी की। वादाखिलाफी के जवाब में दो नंबर के लोगों ने कार्यकारी अभियंता को फूल, बुके दिया।
18-12-2011: नेताओं एवं निगम अधिकारियों ने मना किया तो नहर पार भारत कॉलोनी में खुद ही बना दी सड़क। 80 घरों से 13 लाख रुपये की रकम एकत्र करके एक किमी. लंबी 20 फीट चौड़ी है सड़क बनाई गई।
23-04-2012: सिर्फ 24 घंटे में ही सड़क उखड़ गई। इस रास्ते सीएम को निकलना था इसलिए नगर निगम ने यह सड़क बनवाई थी।
20-02-2012: आदर्श नगर से प्याली चौक तक (डबुआ-दो नंबर के बीच) की जर्जर सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण एक 20 वर्षीय युवती की मौत। परिजनों का आरोप।
22-02-2011: युवती की मौत के बाद सड़क निर्माण व मुआवजे की मांग पर एनएच-दो निवासी तत्कालीन डीसी प्रवीण कुमार से मिले। निगम के मुख्य अभियंता एनके कटारा को डीसी ने फटकारा।
10-06-2012: नेहरू ग्राउंड में सीमेंटेड सड़क पूरी बनी भी नहीं कि दरारें पड़ गईं। न लेवलिंग न फिनिशिंग, गुणवत्ता ताक पर।

हाथ में हथियार लेकर सो रहा विपक्ष
नगर निगम में विजिलेंस कमेटी के मुखिया का पद निगम सदन में विपक्ष के नेता ओमप्रकाश रक्षवाल के पास है। लेकिन, वे सत्ताधारी पार्षदों की तरह निगम के भ्रष्टाचार वाले पहलुओं पर चुप्पी साधे हुए हैं। जनता घटिया सड़कों के निर्माण से परेशान है और अब तक विजिलेंस कमेटी ने किसी भी सड़क के मैटीरियल का सैंपल नहीं लिया है। जबकि नगर निगम के पूर्व सलाहकार केएल गेरा कई बार लिखित रूप से सड़कों का सैंपल भरकर उसकी जांच करवाने की मांग कर चुके हैं।

विदेशों में खराब हो रही है शहर की इमेज
फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान डॉ. एसके गोयल का कहना है कि जब बायर (खासकर विदेशी खरीदार) यहां की इंडस्ट्रियल सड़कों की हालत देखते हैं तो नाक-भौं सिकोड़ लेते हैं। भले ही कंपनी में वर्ल्ड क्लास का मॉल बन रहा हो, लेकिन घटिया इंफ्रास्ट्रक्चर देखकर इमेज खराब हो रही है। जिसका उद्योग जगत को नुकसान पहुंच रहा है। कई बार बायर वापस चले गए हैं। इसलिए अब उद्योगपति कोशिश करते हैं कि बड़े खरीदारों से दिल्ली में ही मीटिंग करें। पर जब खरीदार फैक्ट्री देखने की जिद करते हैं तो रास्ते में हमें टूटी सड़कों एवं गंदगी की वजह से शर्मिंदा होना पड़ता है।
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‘अगर घटिया सड़कें बन रही हैं। सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे हैं तो इस पर इंजीनियरों की क्लास लूंगा। वैसे अब तो अच्छी सीमेंटेड सड़कें बन रही हैं’।
-अशोक अरोड़ा, मेयर।
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