बीके अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारियों के विवाद का शिकार बुधवार को अस्पताल में आने वाले मरीज हुए। वेतन न मिलने के कारण 58 स्वास्थ्य कर्मियों ने काम काज बंद कर दिया। इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक जगह-जगह गंदगी देखी गई।
इमरजेंसी और ओपीडी सेवा प्रभावित रही। आननफानन में स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को बुलाकर बिगड़ी स्थिति को संभालने का प्रयास किया गया।
ओपीडी कार्ड बनवाने के लिए मरीजों को मारामारी करनी पड़ी। जबकि दवा काउंटरों पर दोपहर तक मरीजों की लाइन लगी रही। ओपीडी लैब, एक्स-रे, ईसीजी में कर्मचारी न होने के कारण उन्हें समय से पहले बंद कर दिया गया। ऑपरेशन थिएटर स्टाफ न होने के कारण कई मरीजों के ऑपरेशन बृहस्पतिवार के लिए टाल दिए गए। अस्पताल प्रबंधन ने जून में 58 स्वास्थ्य कर्मियों को ठेके पर रखा था। लेकिन अब तक वेतन नहीं मिला।
बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन की वरिष्ठ नेता आशा शर्मा ने बताया कि पीएमओ के आश्वासन के बाद हड़ताल समाप्त कर दी गई है। अगर 14 अक्तूबर तक वेतन नहीं मिला तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।