शहर में घरों से दूर किराए पर रहने वाले लोगों की बड़ी संख्या है, पर किराए के रूप में इन्हें कितनी रकम चुकानी है, यह तय नहीं है। बिजली का बिल और पानी का चार्ज मिलाकर इन्हें अच्छी-खासी रकम किराए के रूप में खर्च करनी होती है।
जल्द ही प्रदेश सरकार ‘हरियाणा रेंट कंट्रोल एक्ट’ में संशोधन करने जा रही है, जिसमें किरायेदारों के हितों को ध्यान में रखते हुए नियमों-शर्तों में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। इससे मकान मालिकों को भी किराएदारों की मनमानी से राहत मिलेगी।
हरियाणा सरकार के विशेष सचिव की ओर से मिले निर्देशों के बाद नगर निगम प्रशासन ने इसके लिए एक कमेटी गठित की है। इसमें मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को रखा गया है।
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक , शहर में 2.5 लाख मकान हैं। 80 से 90 हजार मकानों में किरायेदार हैं। उप महापौर राजेंद्र भामला ने बताया कि 27 जुलाई को प्रदेश सरकार ने रेंट कंट्रोल एक्ट में बदलाव का फैसला लिया था। इस बारे में निगम से सुझाव व विचार मांगे गए हैं।
जल्द ही नगर निगम शहर की आम जनता, आरडब्ल्यूए, सामाजिक संगठनों, निगम पार्षदों, किरायेदार एसोसिएशन और कानून के जानकारों से सुझाव लेगा। भामला के मुताबिक, निगम प्रशासन चाहता है कि एक्ट में किसी भी पक्षके साथ अन्याय न हो। किराएदार व मकान मालिक दोनों के हितों का ध्यान रखा जाए। उधर, रेंट कंट्रोल एक्ट में बदलाव के फै सले का किरायेदार एसोसिएशन के प्रधान जगन सिंह शाह ने स्वागत किया है।
क्या होगा बदलाव
संभावना जताई जा रही है कि एक्ट में क्षेत्र और कॉलोनी के अनुसार किराया निर्धारित किया जाएगा। साथ ही बिजली, पानी की दरों को भी तय किया जा सकता है, ताकि मकान मालिक उनसे मनमानी कीमत न वसूल सकें।