सुख-समृद्धि एवं मनोकामना पूर्ति के लिए मशहूर छठ पर्व की तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। दर्जनों जगह पर इसके लिए घाट तैयार करवाए गए हैं। शुक्रवार को इन घाटों पर डूबते सूर्य देवता को अर्घ्य दिया जाएगा। हर घाट पर मेले जैसा माहौल है, जहां पर लोगों ने बृहस्पतिवार को पूजा सामग्री की खरीदारी की।
डबुआ स्थित भोजपुरी-अवधी समाज के कार्यालय, सेक्टर-52 के शिव मंदिर, सेक्टर-22 के शिव मंदिर, सेक्टर-52, सेक्टर-23 स्थित नीलकंठ मंदिर, संजय कॉलोनी सोहना रोड, एनएच-तीन, सेक्टर-तीन, सेक्टर-55, खेड़ी पुल, पल्ला पुल, नंगला रोड तालाब, एनएच-तीन स्थित राजा चौक, डबुआ सब्जी मंडी के सामने एवं बल्लभगढ़-सोहना रोड पर घाट बनाए गए हैं।
लोक आस्था के इस पर्व पर हर जगह पूर्वांचल एवं बिहार के लोग शुक्रवार को सूर्य देवता को अर्घ्य देने की तैयारी कर रहे हैं। पूजा स्थलों पर रंगाई-पुताई की गई है। शहर में चार लाख लोगों के इस पूजा में भाग लेने की संभावना है।
कुछ जगहों पर गरीब व्रतधारियों के लिए फल एवं पूजा सामग्री के मुफ्त वितरण का भी इंतजाम है। यह अपने आप में इस बात के लिए अनूठा त्योहार है, जिसमें उगते सूर्य के साथ-साथ डूबते सूर्य की भी पूजा की जाती है। व्रतियों को चार दिन तक उपवास करना पड़ता है इसलिए इसे महाव्रत कहते हैं।
प्राचीन हनुमान मंदिर सेवा समिति के प्रधान गंगेश तिवारी के मुताबिक, इस पर्व के बारे में मान्यता है कि इसका आरंभ कुंती द्वारा सूर्य की आराधना से हुआ था।
आराधना में कुंती ने सूर्य से अपने पुत्र के कल्याण की कामना की थी। कहा जाता है कि पांडवों के राजपाट छिन जाने पर द्रौपदी ने छठ का व्रत रखने का प्रण किया था। मनोकामना पूरी होने पर उन्होंने छठ का व्रत किया।