फरीदाबाद। वाईएमसीए मेट्रो स्टेशन के निर्माण का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। वजह यह है कि अधिग्रहीत जमीन पर उद्यमियों व हुडा के बीच चल रहा विवाद खत्म हो गया है।
वाईएमसीए यूनिवर्सिटी के पास बनी औद्योगिक इकाइयों की कुछ जमीन मुजेसर गांव में अधिग्रहीत की गई थी। मुआवजा घोषित होने पर जमीन का मालिकाना हक हुडा के सामने उद्यमी साबित नहीं कर पाए थे। इस कारण विवादाें में फंसी करीब 10 उद्यमियों की जमीन का मुआवजा उठाने पर हुडा ने रोक लगा दी थी। उद्यमियों को जमीन का मालिकाना हक साबित करने का मौका दिया गया। हुडा की ओर से तय की गई समय सीमा में उद्यमियों ने अपने मालिकाना हक के साक्ष्य प्रस्तुत कर दिए हैं।
गौरतलब है कि बदरपुर-वाईएमसीए मेट्रो कॉरिडोर के रूप में शहर में 13.875 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाने की प्रक्रिया चल रही है। इसी के तहत शहर में नौ मेट्रो स्टेशन सराय ख्वाजा, सेक्टर-27, एनएचपीसी, मेवला महाराजपुर, बड़खल, ओल्ड फरीदाबाद, अजरौंदा, न्यू टाउन व वाईएमसीए का निर्माण होना है। इन स्टेशनों के लिए हुडा के पास कुछ जमीन कम पड़ गई थी। जमीन जुटाने के लिए हुडा ने पिछले दिनों 9.23 एकड़ का अधिग्रहण किया। मुजेसर गांव की 2.42 एकड़ जमीन के अधिग्रहण पर पता चला कि यहां के करीब 10 उद्यमियों का राजस्व रिकार्ड में डाटा ही मौजूद नहीं है। उद्यमियों के पास जमीन की रजिस्ट्री मौजूद थीं। इस पर हुडा ने उद्यमियों को मुआवजा उठाने से रोक दिया था।
भूमि अर्जन अधिकारी राजेंद्र सिंह गहलोत ने बताया कि अब सभी 10 उद्यमियों को मुआवजा उठा लेने की सलाह दी गई है। इसके बाद जल्द ही जमीन कब्जे में लेकर मेट्रो प्रशासन को सौंप दी जाएगी।