हरियाणा के सात नए निगमों में जो गांव शामिल हुए थे, उनके बाशिंदों को हाउस टैक्स से छूट मिल सकती है। विभाग ने मसौदा तैयार कर मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पास भेज दिया है।
प्रदेश में करीब चार साल पहले सात नगर निगम पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, रोहतक और हिसार गठित किए गए थे। इन निकायों में पहले नगर परिषद या नगर पालिकाएं कार्य कर रही थीं।
नगर परिषदों को नगर निगम बनाने के लिए क्षेत्र के आसपास के अनेक गांव शामिल किए गए थे। पंचकूला नगर निगम में कालका और पिंजौर नगर पालिका भी शामिल की गई थी।
करीब साढ़े तीन साल तक तो इन निगमों में आम चुनाव ही नहीं हुए। इसके अलावा जो गांव इन निगमों में शामिल हुए थे उन पर हाउस टैक्स का अचानक बोझ भी पड़ गया।
सरकार ने हाउस टैक्स का फार्मूला बदला तो हाउस टैक्स की दरें कम हो गईं लेकिन ग्रामीणों को उतनी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिली और हाउस टैक्स का बोझ अलग से पड़ गया।
कुछ पार्षदों ने सरकार से आग्रह किया कि जब तक गांवों में मूलभूत सुविधाएं न मिल जाएं तब तक उनसे हाउस टैक्स न वसूला जाए। सरकार उनके आग्रह पर गौर कर रही है और गांवों को यह छूट जल्द मिल सकती है।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग निदेशक नहीं कर सकेंगे कार्रवाई
नए नगर निगमों में जितना कंट्रोल एरिया शामिल हुआ है, उसमें अब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक कार्रवाई नहीं कर सकेंगे।
नगर निगम कानून में अध्यादेश के जरिए संशोधन किया गया है कि उस क्षेत्र में अब शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक ही कार्रवाई कर सकेंगे।
सरकार के पास मांग आई थी कि निगमों में शामिल गांवों में मूलभूत सुविधाएं मिलने तक हाउस टैक्स न लगाया जाए। सरकार इस मांग पर विचार कर रही है। निगमों में शामिल कंट्रोल एरिया में कार्रवाई करने का अधिकार निकाय विभाग के निदेशक को देने वाला अध्यादेश जारी कर दिया है।
पी. राघवेंद्र राव, प्रधान सचिव, शहरी स्थानीय निकाय विभाग, हरियाणा
मेयरों की बैठक आज चंडीगढ़ में
हरियाणा की शहरी स्थानीय निकाय मंत्री सावित्री जिंदल आज सात नए नगर निगमों पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, रोहतक और हिसार के मेयरों के साथ बैठक करेंगी।
मेयरों की तरफ से पहले ही मांग पत्र विभाग के प्रधान सचिव पी. राघवेंद्र राव के पास पहुंच चुके हैं। मेयरों ने शक्तियां बढ़ाए जाने की मांग की है।
उनकी प्रमुख मांग है कि सातों नगर निगमों में निगम आयुक्त स्थायी तौर पर नियुक्त किए जाएं। अब तक संबंधित जिला उपायुक्त ही नगर निगम आयुक्त हैं। इससे विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है।
उपायुक्त अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं। सावित्री जिंदल ने अमर उजाला को बताया कि वे मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से आग्रह करेंगी कि नए निगमों में फरीदाबाद, गुड़गांव की तर्ज पर स्वतंत्र निगम आयुक्त तैनात किए जाएं।
उन्होंने कहा कि वे चाहती हैं कि निगमों समेत सब निकायों में तेजी से विकास कार्य हों। लोगों को साफ-सुथरा माहौल मिले। स्ट्रीट लाइटें एकदम दुरुस्त हों।