दिल्ली-एनसीआर के तहत आने वाले हरियाणा के पलवल जिले में स्थित गांव चिरवाड़ी में भी ग्रामीणों ने लॉकडाउन का पूर्ण रूप से पालन किया है। गांव के पूर्व पंच रहे शंकर लाल का कहना है कि ग्रामीणों में कोरोना को लेकर अब बहुत जागरूकता आ गई है।
मेवात के गांव बझेड़ा में रहने वाले अमर सिंह राजावत, जो आर्मी से सेवानिवृत हैं, वे बताते हैं कि हमने गांव को पूरी तरह सैनिटाइज कर रखा है। मंदिर और मस्जिद में भी सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित की गई है।
प्रयास यह रहता है कि लोग अपने घरों में रह कर ही धार्मिक कार्य पूरे करें। गांव के चारों ओर के रास्ते बंद कर दिए हैं। बुजुर्ग अपनी ड्यूटी समझकर पहरा दे रहे हैं। खेत खलियान की ओर से कोई बाहरी व्यक्ति गांव में प्रवेश करे, ये गुंजाइश खत्म कर दी गई है।
चारों तरफ बुजुर्गों का सख्त पहरा है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के राजस्थान प्रभारी रामपाल जाट कहते हैं, ये हमारी परंपरा है। जब कभी गांव या राष्ट्र पर कोई संकट आया है, उसे दूर करने में हमारे बुजुर्गों ने भरपूर सहयोग दिया है।
राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तरप्रदेश के कई इलाकों में ग्रामीणों ने लॉकडाउन को कामयाब बनाया है। अच्छी बात ये है कि गांव के सभी लोग बुजुर्गों की बात सुनते हैं। ऐसे में लॉकडाउन टूटने की संभावना न के बराबर होती है।
अखिल भारतीय किसान संगठन से जुड़े प्रेम सिंह गहलौत बताते हैं कि गांव में इन लोगों ने सराहनीय कार्य किया है। हरियाणा के जींद जिले के इक्कस गांव में रहने वाले वेदप्रकाश, हरिकेश और दिनेश का कहना है, हमारे बुजुर्ग लॉकडाउन को सफल बनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। कई बुजुर्ग तो दोपहर में खाना भी पहरेदारी वाले स्थल पर ही मंगा लेते हैं।