फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गांवों में लॉकडाउन को सफल बनाने वाले पहरेदारों की कहानी, 70 की उम्र में भी दे रहे हैं पहरा

Fri, 17 Apr 2020 07:22 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली-एनसीआर के तहत आने वाले हरियाणा के पलवल जिले में स्थित गांव चिरवाड़ी में भी ग्रामीणों ने लॉकडाउन का पूर्ण रूप से पालन किया है। गांव के पूर्व पंच रहे शंकर लाल का कहना है कि ग्रामीणों में कोरोना को लेकर अब बहुत जागरूकता आ गई है।
विज्ञापन
Elders in Lockdown - फोटो : Social Media (सांकेतिक)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश के हर गांव में देख लें, लॉकडाउन 2.0 को सफल बनाने का जिम्मा बुजुर्गों ने संभाल रखा है। इनमें लॉकडाउन 1.0 से बढ़ी समझ को साफ देखा जा सकता है। हरियाणा के गांवों में भी यही है। औसतन 70 साल की उम्र के बुजुर्ग गांव में बाहर से आने वालों की कुशल क्षेम पूछकर, उन्हें वहीं से लौटा देते हैं।

विज्ञापन

ताकि गांव में कोरोना का संक्रमण न फैलने पाए। सुबह 7 से शाम 6 बजे तक यह कड़ी पहरेदारी का सिलसिला लगातार जारी है। ताऊ की मुस्तैदी भी इस कदर है कि गांव में चाहे मंदिर हो या मस्जिद सोशल डिस्टेंसिंग बनवाने से नहीं चूकते।

पलवल के गांव चिरवाड़ी, मेवात के बझेड़ा, जींद इक्कस गांव में इस मुस्तैदी को जीवंत रूप में देखा जा सकता है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा के तमाम गांवों से रोज ऐसे ही किस्से सामने आ रहे हैं।

 

दिल्ली-एनसीआर के तहत आने वाले हरियाणा के पलवल जिले में स्थित गांव चिरवाड़ी में भी ग्रामीणों ने लॉकडाउन का पूर्ण रूप से पालन किया है। गांव के पूर्व पंच रहे शंकर लाल का कहना है कि ग्रामीणों में कोरोना को लेकर अब बहुत जागरूकता आ गई है।

विज्ञापन


इससे पहले गांव के उम्र दराज लोग सुबह अपने खेतों में चले जाते थे। अब वही लोग सुबह गांव के बाहर आ बैठते हैं। गांव में प्रवेश के जितने भी रास्ते हैं, उन्हें बंद कर दिया जाता है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक सरदार वीएम सिंह कहते हैं कि किसान अन्नदाता है, मगर इस समय वह दोहरी भूमिका निभा रहा है।

लोगों को रोटी मिलती रहे, इसके लिए वह खेतों में लगा है। कई जगह पर मजदूर या मशीन नहीं है, इस तरह की कई दिक्कतें उसे झेलनी पड़ रही हैं। इस समय पर उनके बुजुर्ग लॉकडाउन को कामयाब बनाने में जुटे हैं। देश के किसी भी गांव में जाकर देख लें, वहां अगर लॉकडाउन को किसी ने कामयाब बनाया है, तो वे गांव के बुजुर्ग ही हैं।

मंदिर-मस्जिद में भी सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित कराते हैं...

मेवात के गांव बझेड़ा में रहने वाले अमर सिंह राजावत, जो आर्मी से सेवानिवृत हैं, वे बताते हैं कि हमने गांव को पूरी तरह सैनिटाइज कर रखा है। मंदिर और मस्जिद में भी सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित की गई है।

प्रयास यह रहता है कि लोग अपने घरों में रह कर ही धार्मिक कार्य पूरे करें। गांव के चारों ओर के रास्ते बंद कर दिए हैं। बुजुर्ग अपनी ड्यूटी समझकर पहरा दे रहे हैं। खेत खलियान की ओर से कोई बाहरी व्यक्ति गांव में प्रवेश करे, ये गुंजाइश खत्म कर दी गई है।

चारों तरफ बुजुर्गों का सख्त पहरा है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के राजस्थान प्रभारी रामपाल जाट कहते हैं, ये हमारी परंपरा है। जब कभी गांव या राष्ट्र पर कोई संकट आया है, उसे दूर करने में हमारे बुजुर्गों ने भरपूर सहयोग दिया है।

राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तरप्रदेश के कई इलाकों में ग्रामीणों ने लॉकडाउन को कामयाब बनाया है। अच्छी बात ये है कि गांव के सभी लोग बुजुर्गों की बात सुनते हैं। ऐसे में लॉकडाउन टूटने की संभावना न के बराबर होती है।

अखिल भारतीय किसान संगठन से जुड़े प्रेम सिंह गहलौत बताते हैं कि गांव में इन लोगों ने सराहनीय कार्य किया है। हरियाणा के जींद जिले के इक्कस गांव में रहने वाले वेदप्रकाश, हरिकेश और दिनेश का कहना है, हमारे बुजुर्ग लॉकडाउन को सफल बनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। कई बुजुर्ग तो दोपहर में खाना भी पहरेदारी वाले स्थल पर ही मंगा लेते हैं।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें