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दशहरे से पहले रावण की दुर्दशा: धड़ पंचकूला में सिर और टांगें दिल्ली में, पंचकूला में पुतला बनाने वाला लापता

Sat, 17 Oct 2026 10:43 PM IST
शाहिल शर्मा माई सिटी रिपोर्टर, पंचकूला

सार

हालत यह है कि रावण का धड़ पंचकूला में है, सिर-टांगें दिल्ली से आएंगी और बाकी इंतजाम बराड़ा से होंगे। यानी इस बार दशानन के दस सिरों से ज्यादा उसकी अधूरी कारीगरी ने आयोजकों के पसीने छुड़ा दिए हैं।
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रावण का अधूरा पुतला - फोटो : संवाद
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विस्तार
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इस बार पंचकूला में रामजी के बाण से पहले ही रावण की हालत पतली हो गई है। लंकापति का धड़ मैदान में खड़ा है, लेकिन सिर और टांगें दिल्ली से आने का इंतजार कर रही हैं। कपड़े और डाई बराड़ा से मंगवाए जा रहे हैं। जिस कारीगर को रावण को सिर से पैर तक तैयार करना था, वह बीच में ही गायब हो गया। 

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अब दशहरे से पहले रावण को पूरा खड़ा करने की चुनौती आयोजकों के सामने है। हालत यह है कि रावण का धड़ पंचकूला में है, सिर-टांगें दिल्ली से आएंगी और बाकी इंतजाम बराड़ा से होंगे। यानी इस बार दशानन के दस सिरों से ज्यादा उसकी अधूरी कारीगरी ने आयोजकों के पसीने छुड़ा दिए हैं। मामला श्री रामलीला युवा मंच का है। 

मंच के पदाधिकारी धर्मपाल के अनुसार, करीब दो सप्ताह पहले कारीगर ने पंचकूला में रावण का धड़ तैयार कर खड़ा कर दिया था। इसके बाद वह पंजाब में काम होने का बहाना बनाकर चला गया, लेकिन वापस नहीं लौटा। आयोजक उसके लौटने का इंतजार करते रहे, मगर रावण के बाकी अंग जोड़ने की नौबत ही नहीं आई। आखिरकार मंच के करीब 150 सदस्यों ने भगवान श्रीराम का नाम लेकर रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले तैयार करने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली।

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रावण बनाने निकला था, आयोजकों को ही बना गया
कारीगर की तलाश में आयोजकों ने दूसरी जगहों पर संपर्क किया तो खन्ना और लुधियाना में भी इसी तरह काम अधूरा छोड़ने की शिकायतें सामने आने की बात कही गई। इसके बाद श्री रामलीला युवा मंच के पदाधिकारियों ने सेक्टर-5 थाने में शिकायत दी। शिकायत के मुताबिक, एग्रीमेंट के तहत कारीगर ने करीब 60 प्रतिशत काम पूरा किया, जबकि शेष 40 प्रतिशत काम अधूरा छोड़कर गायब हो गया। मामले में पुलिस की कार्रवाई का इंतजार है।

दिल्ली से सिर, बराड़ा से डाई, अब खुद बनाएंगे दशानन
दशहरे की तारीख नजदीक आते देख आयोजकों ने कमान संभाल ली है। रावण और कुंभकरण के पुतलों के सिर और टांगें दिल्ली से मंगवाई गई हैं, जबकि पुतले तैयार करने के लिए डाई बराड़ा से मंगवाई जा रही है। अब मंच के सदस्य खुद ही पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। आयोजकों की कोशिश है कि समय रहते सभी पुतले तैयार हो जाएं और दशहरे पर 100 फीट ऊंचे रावण का दहन हो सके। इस बार रावण की लंका जलाने से पहले आयोजकों को उसके शरीर के अंग जोड़ने के लिए तीन शहरों के बीच दौड़ लगानी पड़ रही है।
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