इस बार पंचकूला में रामजी के बाण से पहले ही रावण की हालत पतली हो गई है। लंकापति का धड़ मैदान में खड़ा है, लेकिन सिर और टांगें दिल्ली से आने का इंतजार कर रही हैं। कपड़े और डाई बराड़ा से मंगवाए जा रहे हैं। जिस कारीगर को रावण को सिर से पैर तक तैयार करना था, वह बीच में ही गायब हो गया।
अब दशहरे से पहले रावण को पूरा खड़ा करने की चुनौती आयोजकों के सामने है। हालत यह है कि रावण का धड़ पंचकूला में है, सिर-टांगें दिल्ली से आएंगी और बाकी इंतजाम बराड़ा से होंगे। यानी इस बार दशानन के दस सिरों से ज्यादा उसकी अधूरी कारीगरी ने आयोजकों के पसीने छुड़ा दिए हैं। मामला श्री रामलीला युवा मंच का है।
मंच के पदाधिकारी धर्मपाल के अनुसार, करीब दो सप्ताह पहले कारीगर ने पंचकूला में रावण का धड़ तैयार कर खड़ा कर दिया था। इसके बाद वह पंजाब में काम होने का बहाना बनाकर चला गया, लेकिन वापस नहीं लौटा। आयोजक उसके लौटने का इंतजार करते रहे, मगर रावण के बाकी अंग जोड़ने की नौबत ही नहीं आई। आखिरकार मंच के करीब 150 सदस्यों ने भगवान श्रीराम का नाम लेकर रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले तैयार करने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली।