पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि जिस जगह यह सेंटर बनाया जाएगा, वहां ज्यादा निर्माण कार्य की संभावना नहीं है और ज्यादातर खर्च सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर पर ही आएगा। डीआरडीओ के कई अपने इन-हाउस सॉफ्टवेयर ही हैं, जो यहां लगेंगे। छह महीने के भीतर यह सेंटर बन कर तैयार हो जाएगा। सेंटर चेहरा पहचान प्रणाली (फेशियल रेक्गनिशन सिस्टम) पर भी काम करेगा। संदिग्ध और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का डाटा शहर में लगाए गए हाई-रेजोल्यूशन कैमरों से जोड़ा जाएगा। ऐसे में किसी भी संदिग्ध की जानकारी प्राप्त होते ही अलर्ट जारी किया जाएगा। इसके बाद पुलिस उसे तुरंत पकड़ पाएगी।
पड़ोसी राज्यों को भी मिलेगी मदद
इस सेंटर के बनने से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों को भी साइबर अपराधों को सुलझाने और जानकारी का आदान-प्रदान करना आसान होगा। बता दें कि चंडीगढ़ ज्वाइंट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन टीम का नोडल सेंटर है। गृह मंत्रालय ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के तहत इस टीम को बनाया था। इसका मकसद साइबर अपराधों और अपराधियों से जुड़ा डाटा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच साझा करना था। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायतों का विश्लेषण करने के आधार पर चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा (मेवात बेल्ट), पंजाब, उत्तराखंड, झारखंड (जामतारा बेल्ट), जम्मू एंव कश्मीर तथा लद्दाख के लिए कोऑर्डिनेशन टीमें बनाई गई थीं।