डॉ. कुलदीप कहते हैं कि हम कोरोना वायरस से जारी इस लड़ाई में अपने जिले के कप्तान डीसी पंकज और दूसरे अधिकारियों के साथ दिन-रात काम कर रहे हैं। कहते हैं, हमारे पास एक अंदाजे की संख्या भी थी कि इतने लोग दिल्ली से आए हैं। हमने पता लगाया कि तब्लीगी जमात में कौन-कौन शामिल होते हैं।
मालूम पड़ा कि वहां की कई तरह की धार्मिक परंपराएं हैं। जैसे 'चिल्ला', इसमें धर्म के प्रचार के लिए जमात के लोग 40 दिन की यात्रा पर निकलते हैं। दूसरे, ऐसे भी लोग होते हैं लो 120 दिन वाले होते हैं। 40 दिन वाले मरकज में दो या तीन-बार जाते हैं।
जैसे शुरू में गए, वापस लौट आए। इसके बाद दोबारा चले गए। जब मरकज के धार्मिक कार्यक्रम का समापन होता है तो फिर ये लोग वहां से मेवात पहुंचते हैं। दो हजार से अधिक लोगों का मार्च में निजामुद्दीन मरकज से मेवात आना-जाना हुआ था।
दूसरी तरफ, 120 दिन वाले वे होते हैं जो एक बार जाते हैं और उसके बाद अपने अपने इलाकों में धार्मिक प्रचार के लिए निकल पड़ते हैं। चिल्ला परंपरा वालों का पता लगाना हमारे लिए बहुत अहम था। हमने मेवात के लोगों से पता लगाया कि कहां पर कितने ऐसे लोग हैं जो चिल्ला वाले हैं।
बहुतों से लोगों का पता चल गया। इसके बाद हमारी राह कुछ आसान हो गई। वजह, संक्रमण होने का खतरा इन्हीं लोगों से ज्यादा था, क्योंकि ये कई बार मरकज में गए और आए हैं।
नूंह के डीसी पंकज बताते हैं, हमारे लिए यह उतना आसान नहीं था, लेकिन हम आगे बढ़ते रहे। इलाके के मुअज्जिज लोगों से अपील की गई कि वे जमातियों के बारे में सूचना दें। साथ ही यह पता लगा कि 84 विदेशी लोग भी मेवात आए हैं।
फिर यह पता लगा लिया गया कि 286 लोग ऐसे रहे हैं जो कोरोना पॉजिटिव लोगों के सीधे संपर्क में आए थे। फिर 1267 लोगों को सर्विलांस में रखा गया।
अभी तक 130 लोगों का सर्विलांस पीरियड पूरा हो गया है और 1137 लोग सर्विलांस के तहत हैं, 378 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, 318 लोगों की सैंपल रिपोर्ट निगेटिव आई है और 38 लोगों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव मिला है।
पंकज कहते हैं कि जब देखा कि यह चेन बहुत लंबी हो रही है, तो हमने हर घर के सर्वे शुरू किया, जिसके अब दो-तीन दिन में पूरा होने की उम्मीद है। गुरुवार को एक बार फिर मुअज्जिज लोगों की बैठक बुलाई है। जनप्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे।
उनसे अपील की जाएगी कि जल्द से जल्द ऐसे लोगों को जांच के लिए तैयार करें जो मरकज से लौटे हैं या वे उनके संपर्क में रहे हैं। अब 148 गांवों में प्रवेश करने और बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई है और 36 गांवों को पूरी तरह सील करके 112 अन्य गांवों को बफर क्षेत्र मानकर जांच की जा रही है। घर-घर जाकर स्कैनिंग शुरू कर दी गई है।
सीएमओ कहते हैं, हमारी टीम सुबह सात बजे काम में लग जाती है। कहीं पर कोई शक होने की उम्मीद नहीं छोड़ेंगे। सरकार तो पहले ही अपील कर रही है कि जिसे खुद में या किसी अन्य में कोरोना के लक्षण प्रतीत होते हैं तो वे सामने आएं।
सरकार उनकी जांच और इलाज कराएगी। कोई जानबूझकर छिपता है तो कार्रवाई होगी। इसका नतीजा यह हुआ कि आठ अप्रैल को 11 ऐसे लोग खुद सामने आ गए। उन्होंने बताया कि वे मरकज में गए थे।
अब नूंह में 38 कोरोना के मरीज हैं, 22 नतीजे आने बाकी हैं और 62 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। पॉजिटिव रिपोर्ट वालों में श्रीलंका के 6, दक्षिण अफ्रीका 1, इंडोनेशिया 1, थाईलैंड 1 केरल 5, जम्मू-कश्मीर 3, बिहार 5, यूपी 5, मध्यप्रदेश 2, महाराष्ट्र 2, तमिलनाडु 2, आंध्रप्रदेश 2 और नूंह के तीन लोग शामिल हैं।