हरियाणा के जिला सिरसा के थाना बड़ागुढ़ा क्षेत्र के गांव आनंदगढ़ में पंचायत के हुक्का-पानी बंद करने के फरमान केे बाद तीन परिवारों ने लघु सचिवालय परिसर में डेरा डाल दिया है।
इन परिवारों को इस बात की सजा सुनाई गई है कि उन्होंने मंदिर कमेटी की ओर से हटाए गए पुजारी से पूजा करवाई।
हुक्का-पानी बंद करने के फरमान केे साथ ही परिवार से संबंध रखने वालों पर 1100 रुपये जुर्माने का भी ऐलान किया गया है।
इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने थाना बड़ागुढ़ा प्रभारी से रिपोर्ट मांगी है। उधर, सरपंच का कहना है कि इस मामले से उसका कोई लेना-देना नहीं है, जो कुछ भी हुआ वह मंदिर कमेटी का फैसला है।
पीड़ित परिवार के सदस्य रामजीलाल, रणजीत, राधाकृष्ण ने बताया कि कुछ दिन पहले राधाकृष्ण ने नया घर बनाने के लिए गांव के ही एक पुजारी से भूमि पूजन करवाया था। यह बात मंदिर कमेटी और पंचायत को नागवार गुजरी।
पंचायत और मंदिर कमेटी के मुताबिक पुराने पुजारी को मंदिर कमेटी ने हटा दिया था। गंाव में सभी धर्म कर्म राजस्थान से बुलाए गए पुजारी से ही करवाने के लिए कहा गया था।
तीनों परिवारों को पंचायत में बुलाकर माफी मांगने के लिए कहा गया। रणजीत और रामजी लाल आदि ने ऐसा करने से मना कर दिया, जिसके बाद मंदिर कमेटी और पंचायत ने उनका हुक्का पानी बंद कर दिया।
पीड़ित रामजीलाल ने बताया कि पंचायत के फरमान से गांव वालों ने जुर्माने की डर से उनसे मिलना ही बंद कर दिया। अब उन्होेंने गांव छोड़ने का मन बना लिया है।
उन्होंने कहा कि न्याय नहीं मिला तो वे मुख्यमंत्री के आवास पर धरना देंगे। पीड़ित परिवार के 15 सदस्य सोमवार को घरेलू सामान को दो ट्रैक्टर ट्रालियों में भरकर गांव से सिरसा के लिए रवाना हो गए।
सभी आरोप निराधार : मंदिर कमेटी
मंदिर कमेटी के सदस्य भोजराज नंबरदार का कहना है कि पीड़ित परिवार के सभी आरोप निराधार हैं। उन्हाेंने उन पर कोई बंदिश या बहिष्कार नहीं किया। वे खुद ही फैसला करके गए हैं।
उधर, पूजा करवाने आए पंडित बंसीधर शर्मा ने कहा कि उन्हें गांव में आए ढाई साल हो गए। लोगों ने कई बार उन्हें गालियां भी दीं, जिसकी शिकायत मंदिर कमेटी के प्रधान सुरेंद्र गोदारा से की गई।
गांव छोड़कर जाने वाले परिवार को क्या कहा गया, इसकी जानकारी कमेटी को ही होगी।
गांव छोडने के लिए नहीं कहा : सरपंच
सरपंच बलवंत गोदारा ने कहा कि गांव के पंडित से कोई भी कार्य न करवाने बारे फैसला कई वर्षों से लिया गया है।
रामजी लाल और उसके भाइयों के बारे में जो भी फैसला लिया गया है, वह पंचायत, समस्त ग्रामीणों और मंदिर कमेटी का है, लेकिन उन्होंने किसी को गांव से पलायन करने के लिए मजबूर नहीं किया।
उन्होंने कहा कि कमेटी ने जो भी निर्णय लिया, उसमें उनकी कोई निजी भूमिका नहीं है। यह कमेटी और ग्रामीणों का फैसला है।
एसएसपी ने थाना प्रभारी से मांगी रिपोर्ट
जब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लेकर उपायुक्त कार्यालय में पहुंचा तो पता चला कि उपायुक्त फील्ड में है। ऐेसे में पीड़ित परिवार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सौरभ सिंह से मिला।
एसएसपी ने उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन देकर गांव जाने के लिए कहा। साथ ही उन्हें सुरक्षा दिलाने की बात कही। एसएसपी ने इस बारे में बड़ागुढां थाना प्रभारी से रिपोर्ट मांगी है।
उधर, थाना प्रभारी किशोरी लाल का कहना है कि पीड़ित परिवार ने कभी भी इस प्रकार की शिकायत नहीं की। सूचना मिली तो वे गांव गए थे। पता चला कि पीड़ित परिवार सिरसा चला गया है।
उन्हाेंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित के साथ न्याय किया जाएगा।