चरखी दादरी। मानसून मौसम समाप्त होने के बाद जिले के सभी जलघरों की सफाई की जरूरत है। करीब एक साल से अधिक समय से नियमित रूप से सफाई नहीं होने के कारण कई जलघरों में पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। मानसून के दौरान स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है, क्योंकि इस दौरान नहरों में खेतों से बहकर आने वाला पानी पहुंचता है। यही पानी आगे जलघरों में पहुंचने के कारण उसमें मिट्टी, गाद, कचरा और अन्य अशुद्धियां जमा हो जाती हैं। जिले में करीब 65 जलघरों को सफाई की जरूरत महसूस रही है।
बॉक्स: पानी में मिले रसायन
जिले के अधिकांश जलघरों में नहरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जाता है। पिछले करीब दो माह से नहरों में ऐसा पानी भी पहुंचता रहा है, जिसे खेतों से उठाकर नहरों में डाला गया। बारिश के दौरान खेतों में जमा पानी अपने साथ मिट्टी, कीटनाशकों और रासायनिक खादों के अवशेष भी लेकर नहरों तक पहुंचता है। इसके बाद यही पानी जलघरों में पहुंचने से वहां पानी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
बॉक्स : पानी की गुणवत्ता होती है खराब
किसान फसलों के बढ़िया उत्पादन के लिए रासायनिक खादों और विभिन्न कृषि रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। बारिश होने पर खेतों में पानी भरने पर इसकी निकासी ड्रेनों व नहरों की जाती है। यही पानी जलघरों में भरा जाता है, इससे पानी में लवणीयता बढ़ने के साथ पोषक तत्वों का संतुलन भी प्रभावित होता है। पानी में मौजूद विभिन्न तत्वों की मात्रा असंतुलित होने से इसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है। यही कारण है कि बारिश के मौसम में नहरों के पानी की गुणवत्ता सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा प्रभावित होती है। पानी में करीब 18 प्रकार के पोषक तत्व होते हैं जिनमें ऑक्सीजन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, फास्फोरस, पोटैशियम, जिंक, खनिज लवण व विटामिन्स होते हैं।
बॉक्स: जलघरों में गाद जमा
वर्तमान में कई जलघरों में पानी के साथ पहुंची मिट्टी और गाद नीचे जमा हो चुकी है। इसके अलावा जलघरों में कचरा और अन्य अशुद्धियां भी जमा हैं। लंबे समय तक सफाई नहीं होने से तल में जमी गाद की मात्रा बढ़ती जा रही है। इससे पानी को साफ करने की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। जलघरों की सफाई करना जरूरी हो गया है, ताकि आगामी समय में लोगों को साफ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
बॉक्स: जलघर साफ करना बना चुनौती
विभाग के सामने जिले के करीब 65 जलघरों की सफाई कराने की चुनौती है। जलघरों की नियमित सफाई होने से न केवल जमा गाद और कचरा हटेगा, बल्कि पानी की गुणवत्ता में भी सुधार लाया जा सकेगा। इसके साथ ही नहरों में आने वाले प्रदूषित पानी की गुणवत्ता पर भी नजर रखने की जरूरत है, ताकि खेतों से बहकर आने वाले रसायनों और अन्य अशुद्धियों का असर जलापूर्ति पर कम किया जा सके।
बयान:
समय-समय जलघरों की सफाई करवाई जाती है। इस बार भी जलघरों की सफाई करवाई जाएगी। विभाग लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया करवाने को कृतसंकल्प है।
सोहनलाल, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।