फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घसोला गांव के पांच डॉक्टर और दो इंजीनियर विदेशों में सेवाएं देकर बढ़ा रहे देश का मान

विज्ञापन
घसोला गांव के बाहरी क्षेत्र में लगा गौरव पट्ट। - फोटो : CharkhiDadri
विज्ञापन
करीब 700 साल पहले बसे घसोला गांव में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। गांव की साक्षरता दर 90 प्रतिशत है। गांव के होनहार डॉक्टर और इंजीनियर बनकर विदेशों में देश का मान बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा पांच हजार की आबादी वाले इस गांव के पांच वीर आजाद हिंद फौज के सिपाही रह चुके हैं जबकि चार सैनिकों को राष्ट्रपति मेडल भी मिल चुका है। गांव के दो जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहादत भी दी है।
विज्ञापन

गांव के मौजिज लोगों ने बताया कि घसोला गांव राजस्थान के सिद्ध मुख से आए घासीराम ने बसाया था और इसे चलते ही गांव का नाम घसोला पड़ा था। गांव में करीब 1200 घर हैं। यहां राजकीय स्कूल के अलावा जलघर की सुविधा भी है लेकिन ग्रामीणों ने इन सुविधाओं में विस्तार करने की मांग की है।
दादरी शहर से घसोला गांव की दूरी करीब तीन किलोमीटर है। गांव में करीब साढ़े 2800 वोट हैं। 90 फीसदी ग्रामीण पढ़े लिखे हैं। गांव के युवा डॉक्टर और इंजीनियर बनकर देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। गांव निवासी दो सगे भाई अमेरिका में डॉक्टर है जबकि गांव की एक बेटी कनाडा में इंजीनियर है। छोटे से गांव के होनहार अपने गांव के अलावा जिले और देश का विदेशों में मान खूब बढ़ा रहे हैं।
विज्ञापन

इन्होंने बढ़ाया है गांव और देश का मान
आजाद हिंद फौज- धर्म सिंह, जुगलाल, शहीद सुदन सिंह, रामसिंह और हरि सिंह।
राष्ट्रपति से ये हो चुके सम्मानित- कप्तान रामकिशन, सिपाही नरेंद्र, मेजर शशिकांत, योगेंद्र।
इन्होंने दी शहादत- दूसरे विश्व युद्ध में सुदन सिंह और 1971 में शीशपाल शहीद हुए।
ये हैं विदेशों में डॉक्टर- डॉ. जितेंद्र, डॉ. सतेंद्र, डॉ. नरेंद्र अमेरिका में डॉक्टर हैं।
ये हैं विदेशों में इंजीनियर- प्रियंका स्विटरजरलैंड और सतीश कनाड़ा में इंजीनियर है।
ग्रामीण बोले: गांव में आपसी भाईचारा और सौहार्द है कायम
गांव की साक्षरता में काफी सुधार हुआ है और इसका नतीजा है कि विदेशों में गांव के होनहार डॉक्टर और इंजीनियर तैनात है। अभी गांव में विकास और सुविधाओं में इजाफा करने की जरूरत है।
- शीशराम, ग्रामीण
गांव में आपसी सौहार्द और भाईचारा आज भी कायम है। गांव के ज्यादातर युवा नौकरी लगे हुए हैं और इसके चलते अपराध का ग्राफ न के बराबर है। गांव के होनहार विदेशों में देश का मान बढ़ा रहे हैं।
- रघबीर, पूर्व बीडीसी
गांव के युवा में विदेशों में देश का नाम चमका रहे हैं जो प्रत्येक ग्रामीण के लिए खुशी की बात है। गांव में पिछले कुछ सालों में साक्षरता दर और लिंगानुपात में काफी सुधार है और आगे भी ग्रामीण सहयोग करेंगे।
- शीशपाल, पंच
गांव के ज्यादातर घरों में रहने वाले लोग शिक्षित हैं। युवा सेना के अलावा इंजीनियर और डॉक्टर बनकर देश और विदेशों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं जो पूरे गांव के लिए गौरव की बात है। हमे गांव के होनहारों पर फख्र है।
- रणधीर, ग्रामीण
गांव में सौहार्द और भाईचारा कायम है। गांव के पांच लोग आजाद हिंद फौज के सिपाही रह चुके हैं जबकि पांच डॉक्टर इस समय विदेशों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। साक्षरता दर को 100 फीसदी करने का हमारा प्रयास है।
विज्ञापन

- सुरेश कुमार, सरपंच, घसोला
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें