चरखी दादरी। इस भागदौड़ भरी जीवनशैली में जहां तनाव और बीमारियां आम बात हो गई हैं। वहीं इन हालातों में कई लोग ऐसे भी हैं जो योग को अपनाकर न केवल खुद को स्वस्थ रख रहे हैं बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। इन्हीं में से एक नाम है गांव चिड़िया निवासी विकास राणा का, वे पिछले करीब 16 वर्षों से निस्वार्थ भाव से लोगों को योग का प्रशिक्षण दे रहे हैं। खास बात यह है कि वह पंचायतीराज विभाग में महाग्राम सचिव के पद पर कार्यरत हैं और कार्यवाहक एसईपीओ भी हैं। ऐसे में वे सरकारी ड्यूटी निभाने के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के लिए भी लगातार प्रयास कर रहे हैं।
योग को बनाया हथियार
विकास राणा के योग साधक बनने की कहानी भी काफी भावुक कर देने वाली हैं। वह बताते है कि वे बचपन से ही गांव रावलधी स्थित अपने ननिहाल में रहते थे। वर्ष 2008 में उनकी नानी मिसरी देवी, जिन्हें वे मां कहते थे, उनका देहांत हो जाने के बाद वे तनाव में रहने लगे थे। तनाव के कारण ही वे बीमार होने के साथ ही डिप्रेशन का भी शिकार हो गए जिसके बाद उन्होंने बाबा रामदेव द्वारा करवाए जा रहे योग शिविर में जाने का मन बनाया। इस योग शिविर में जाने से उन्हें काफी आराम मिला। उनके स्वस्थ होने पर स्वयं बाबा रामदेव ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए खुद तक सीमित रखने के बजाय योग को आगे बढ़ाने की बात कही। जिस पर उन्होंने पतंजलि योग पीठ हरिद्वार में ही योग का प्रशिक्षण लिया। तब से ही विकास राणा लोगों को योग के प्रति जागरूक करने का काम कर रहे हैं।
प्रेमनगर में 2012 से जारी है योग कक्षाएं
विकास राणा द्वारा वर्ष 2012 से स्थानीय प्रेमनगर स्थित एक निजी स्कूल में नियमित योग कक्षा का संचालन किया जा रहा है। वर्ष भर सुबह 5 से 7 बजे तक वे लोगों को निशुल्क योग अभ्यास करवाते हैं। सुबह के शांत वातावरण में उनकी कक्षाओं में हर आयु वर्ग के लोग शामिल होते हैं। उनकी योग कक्षाओं में आकर कई लोग बीमारियों से निजात पा चुके हैं और कुछ लोग योग साधक बनकर अब दूसरों को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं।
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सरकारी जिम्मेदारी और सामाजिक सरोकार
महाग्राम सचिव और कार्यवाहक एसईपीओ के पद पर तैनात विकास राणा अपनी ड्यूटी और सामाजिक सेवा के बीच संतुलन बनाए रखते हैं। ड्यूटी के बावजूद वे सरकार की ओर से समय-समय पर चलाए जाने वाले अभियानों, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, सूर्य नमस्कार अभियान आदि में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
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योग केवल शरीर को लचीला बनाने का साधन नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा को जोड़ने का विज्ञान है। आज की युवा पीढ़ी को मानसिक तनाव से बचाने के लिए आवश्यक है कि वे अपनी दिनचर्या में योग, प्राणायाम और ध्यान को जरूर शामिल करें। - विकास राणा, कार्यवाहक एसईपीओ, दादरी।