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Charkhi Dadri News: बाजरा खरीद के पहले दिन ही मंडी में हंगामा, वेरिफिकेशन ने अटकाए किसानों के गेटपास

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डीएमईओ ज्योति धनखड़ से बात करते हुए किसान।  - फोटो : 1
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चरखी दादरी। जिले में बाजरे की खरीद शुरू होने के पहले ही दिन वीरवार को मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज फसल के डाटा को पटवारियों की ओर से वेरिफिकेशन न होने से किसानों और मंडी प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में किसान फसल लेकर खरीद केंद्रों पर पहुंच गए लेकिन पोर्टल पर डाटा वेरिफिकेशन पूरा न होने से उनके गेटपास नहीं कटे, ऐसे में कर्मचारियों ने उन्हें वापस फसल ले जाने के लिए कहा।
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बार-बार इसी प्रकार के मामले सामने आते रहे जिसके कारण दिनभर किसानों व कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ। किसानों का आरोप रहा कि उन्हें वेरिफिकेशन की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई जिसके कारण वे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बाजरा लेकर मंडी पहुंच गए। अब वापस फसल ले जाने और दोबारा मंडी लाने या ट्रैक्टर को कुछ दिन मंडी में खड़ा रखने में उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मेहनत भी ज्यादा लग रही हैं।
1.20 लाख से अधिक डाटा का वेरिफिकेशन बाकी
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज किसानों की फसल संबंधी जानकारी का पटवारियों द्वारा वेरिफिकेशन किया जा रहा है। जिले में अभी भी 1.20 लाख से अधिक डाटा का वेरिफिकेशन नहीं हुआ है। ऐसे में पहले दिन मंडी में पहुंचे कई किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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कम क्विंटल पास करने का किसानों ने लगाया आरोप
कई किसानों ने वेरिफिकेशन के बाद बाजरा बेचने के लिए स्वीकृत मात्रा को लेकर भी सवाल उठाए। किसानों का आरोप था कि जिन किसानों का डाटा वेरिफाई हो चुका है उनमें भी कई की वास्तविक फसल के मुकाबले कम क्विंटल बाजरा पास किया गया। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ गई। किसान अधिकारियों से वास्तविक फसल के अनुसार खरीद की अनुमति देने की मांग करते रहे।
खुद पटवारी से वेरिफिकेशन कराने की बात पर भड़के किसान
मंडी में किसानों को जब अपने स्तर पर पटवारी से वेरिफिकेशन करवाने की बात कही गई तो स्थिति और बिगड़ गई। किसानों का कहना था कि पोर्टल पर फसल का ब्योरा दर्ज कराने और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है ऐसे में मंडी पहुंचने के बाद किसानों को इधर-उधर भेजना उचित नहीं है। नाराज किसान डीएमईओ ज्योति धनखड़ से भी मिले। किसानों के अनुसार डीएमईओ ने भी वेरिफिकेशन न होने की स्थिति में गेटपास काटने से मना कर दिया। इसके बाद किसान और भड़क गए।
हंगामा बढ़ा तो सचिव ने बुलवाई पुलिस
दिनभर मंडी में अलग-अलग समय पर किसानों और कर्मचारियों के बीच बहस होती रही। हंगामे की स्थिति को देखते हुए मंडी सचिव ने पुलिस को बुला लिया। दोनों गेटों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई ताकि किसानों की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद किसान अपनी समस्याओं को लेकर अधिकारियों से बातचीत करते रहे।
कांटे पर भी उठे सवाल, निजी कांटे पर दोबारा वजन
किसानों ने मंडी में फसल तौलने के लिए लगाए गए कांटे की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। कुछ किसानों ने तौल को लेकर असंतोष जताया और अपनी फसल का वजन निजी कांटे पर दोबारा करवाने के लिए वापस गए। निजी कांटे से वजन कराने के बाद किसानों को फिर मंडी में लगी लाइन में लगना पड़ा। इससे किसानों का समय और बढ़ गया तथा मंडी में भीड़ की स्थिति बनी रही। इसके साथ ही इस दौरान कई विवाद भी सामने आए।
300 मीटर तक लाइन, डेढ़ से दो घंटे धूप में इंतजार
पहले दिन खरीद प्रक्रिया के दौरान किसानों की लंबी कतारें लगी रहीं। मंडी में करीब 300 से 400 मीटर तक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लाइन नजर आई। किसानों को डेढ़ से दो घंटे तक धूप में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। किसान मोहित मोड़ी, परमजीत मोड़ी, प्रवींद्र आदि ने कहा कि खरीद के पहले दिन ही यदि व्यवस्था इस तरह की है तो आने वाले दिनों में आवक बढ़ने पर स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से पोर्टल वेरिफिकेशन, गेटपास और तौल की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की मांग की।
80 साल की ओमपति भी पहुंचीं फसल बेचने
गांव ढाणी फोगाट निवासी करीब 80 वर्षीय ओमपति भी बाजरा बेचने के लिए मंडी पहुंचीं। वह फसल बिक्री की प्रक्रिया के तहत बायोमेट्रिक लगाने के लिए लाइन में खड़ी नजर आईं। बेटे ने कहा कि बुजुर्ग किसानों को भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इसलिए प्रशासन को खरीद केंद्रों पर अतिरिक्त व्यवस्था करनी चाहिए।
वर्जन:
जिन किसानों के डाटा पटवारी की ओर से वेरिफाई नहीं किया गया है वो किसान बिना चेक किए मंडी में फसल लेकर पहुंच गए हैं और उनका टोकन काटने का हमारे पास प्रावधान नहीं है। सभी किसानों से अपील है कि जिन किसानों का डाटा वेरिफाई हो चुका है, केवल वही मंडी में फसल लेकर आएं। कांटे में आ रही समस्या को दुरुस्त करवाया जाएगा। - विद्या सागर, सचिव, मार्केट कमेटी।
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