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व्यापारियों, शिक्षाविदों-किसानों को नहीं भाया बजट, बताया-धरातल से दूर

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मंगल मार्केट में टीवी पर बजट देखते दुकानदार। संवाद - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किया गया चौथा आम बजट किसानों, व्यापारियों और शिक्षाविदों को रास नहीं आया। 400 नई ट्रेनें चलाने, 80 लाख घर बनाने, 60 लाख रोजगार देने के फैसलों की सराहना की गईं। हालांकि आम बजट-2022 को व्यापारियों समेत विशेषज्ञों ने आंकड़ों की बाजीगरी करार दिया।
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आयकर स्लैब में बढ़ोत्तरी नहीं होने से व्यापारी परेशान हैं, तो कोरोना के कारण शिक्षा से दूर हुए बच्चों के लिए कोई उत्साहजनक घोषणा नहीं होने से शिक्षाविदोें को ‘भविष्य’ की चिंता सता रही है। शिक्षाविदें का कहना है कि विद्यार्थियों को मजबूत शिक्षा ढांचे की जरूरत थी। ऐसे में डिजिटल यूनिवर्सिटी के परिणाम अच्छे साबित नहीं होंगे। किसान नेताओं ने भी बजट को निराशाजनक बताया। किसान नेताओं का कहना है कि एमएसपी की गारंटी का कानून नहीं बनने तक उन्हें कोई लाभ नहीं मिलेगा।
व्यापारी बोले... जीएसटी का होना चाहिए था सरलीकरण
आम बजट निराशाजनक रहा। न तो जीएसटी के सरलीकरण का प्रावधान किया गया है और न ही आयकर में छूट का प्रावधान। व्यापार करों के सरलीकरण पर भी बजट में कोई इंतजाम नहीं किया गया है। बजट आदमी के हित में नहीं है। बजट में दुकानदार व व्यापारी के लिए कुछ नया नहीं है।
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रविंद्र गुप्ता, प्रधान नगर व्यापार मंडल
दो साल से कोविड से सभी परेशान हैं। विषमकाल में सबसे ज्यादा मार व्यापारी को पड़ी है। व्यापारियों के लिए सरकार को कोई आर्थिक सहायता की घोषणा करनी चाहिए थी। इसके साथ ही जीएसटी की मौजूदा 18 प्रतिशत दर को घटाकर 12 प्रतिशत किया जाना चाहिए था। आयकर सीमा में सात लाख रुपये तक छूट का प्रावधान किया जाना चाहिए था।
रामकुमार रिटोलिया, प्रधान अनाज मंडी
रिटर्न फाइल में त्रुटि दूर करने के लिए दो साल का समय दिए जाने का निर्णय सही है। हालांकि व्यापारी के लिए नया कुछ नहीं है। आयकर का स्लैब आठ लाख रुपये तक करना चाहिए था। कोरोना महामारी की मार सबसे ज्यादा व्यापारी व दुकानदार पर पड़ी है।
बलराम गुप्ता, जिला अध्यक्ष हरियाणा व्यापार मंडल
किसान बोले... बिना एमएसपी की गारंटी लाभ नहीं
एमएसपी की राशि सीधे बैंक खाते में भेजने से किसान को कोई फर्क नहीं पड़ता है। एमएसपी की गारंटी का कानून बनाना चाहिए। अनाज की बिक्री के लिए आज किसान के पास बाजार नहीं है। बड़ी मंडियों में छोटा जमींदार अनाज बेचने में सक्षम नहीं है। उसका लागत खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में बजट निराशाजनक है। किसान के लिए कोई नया प्रावधान नहीं किया गया है।
शमशेर सिंह, सचिव, जनहित किसान समिति
बजट में एमएसपी की गारंटी का प्रावधान किया जाना चाहिए था। अनाज की बिक्री के लिए स्थायी प्रबंध किए जाने चाहिए। ऐसे में बजट पूरी तरह से निराशाजनक है। किसान को गुमराह किया जा रहा है। आयकर स्लैब का दायरा भी नहीं बढ़ाया गया है।
रामकुमार कादयान, जिला अध्यक्ष अन्नदाता किसान यूनियन
एमएसपी किसान के बैंक खाते में भेजने से बिचौलिये खत्म हो जाएंगे। बजट को मिला-जुला कहा जा सकता है। सरकार को एमएसपी की गारंटी का कानून बनाना चाहिए। किसान की आय दोगुना करने के प्रयास करने चाहिए। - सुनील पहलवान, प्रदेश अध्यक्ष जनहित किसान यूनियन
शिक्षाविद् बोले...डिजिटल शिक्षा से आंतरिक ज्ञान का नहीं होगा विकास
डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने से पहले ग्रामीण क्षेत्र को सूचना तकनीक से अपग्रेड करना होगा। हालांकि डिजिटल शिक्षा से बालक में आंतरिक ज्ञान का विकास नहीं हो सकेगा। अभी इसके प्रति ग्रामीण जागरूक भी नहीं है। आम बजट निराशाजनक है। बजट के प्रावधानों से देश में गरीबी रेखा का ग्राफ और बढ़ेगा। इससे निमभन व मध्यम वर्ग पर प्रतिकूल मार पड़ेगी।
जंगजीत सिंह साहू, रिटायर्ड डीईओ
बजट पूरी तरह से निराशाजनक है। शिक्षा का डिजिटल करने से इसकी गुणवत्ता में सुधार नहीं होने वाला है। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने से पहले ग्रामीण क्षेत्र में सूचना तकनीक को पटरी पर लाने की जरूरत है। बजट में बेरोजगारों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। आम आदमी को बजट से कोई राहत नहीं है।
स्वतंत्र सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर एवं शिक्षाविद
अर्थशास्त्री बोले... ग्रामीण स्तर पर आईटी संरचना को सुदृढ़ करने की जरूरत
डिजिटल शिक्षा से पहले ग्रामीण स्तर पर आईटी संरचना को सुदृढ़ करने की जरूरत है। आयकर स्लैब को नहीं बढ़ाने से आम आदमी पर मार पड़ना स्वाभाविक है। आज देश में रोजगार के प्रति दृष्टिकोण बदलने की जरूरत है। स्किल इंडिया को बढ़ावा देने की जरूरत है। आम बजट को मिला-जुला कहा जा सकता है।
डॉ. एमके जैन, अर्थशास्त्री एवं कॉमर्स विभाग अध्यक्ष
युवा बोले- 60 लाख रोजगार इतनी आबादी में कोई मायने नहीं रखता
बजट में युवाओं के लिए कोई राहत नहीं है। रोजगार की तरफ बजट में कोई कोई फोकस नहीं किया गया है। 60 लाख रोजगार इतनी आबादी में कोई मायने नहीं रखते। हर साल देश में बेरोजगार का आंकड़ा बढ़ रहा है। - साहिल, युवा
बजट में बेरोजगारों के लिए कोई राहत नहीं है। सरकारी क्षेत्र की नौकरियों पर बजट में कोई फोकस नहीं किया गया है। आज बेरोजगार दर बढ़ती जा रही है। जो चिंता का विषय है। जितने सरकारी पद सृजित हैं, वे तो भरे जाने चाहिए। - अंकुश, युवा
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